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Showing posts from May, 2017

करूण पुकार : प्रभु आओ गोपाल !

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               करूण पुकार          ...........................
कोई नही जहाँ में तेरा दर्द सुनने वाला

"हरि" नाम ही है भक्तों तुम्हें आबाद करने वाला

क्रूरता की सारी हदें आज इंसान ने हैं लांघी

सरे आम काट रहे  गौ माता को हमारी

ये ताकत का गुरूर बेजुबानों पर न दिखाओ

है दम और जिगरा तो अपराध को मार गिराओ

जिसका दूध पिया उसकी ही हत्या करते हो

मानव हो या हो दैत्य तुम किसकी पूजा करते हो

ऐसे हत्यारों को श्री कृष्ण कभी क्षमा न करते हैं

सारे कुकर्मों का हिसाब वो इसी जन्म में करते हैं

सनातन धर्म पर हमेसा होते  कुठाराघात् क्यों

क्योंकि राम और कृष्ण के भक्त साधे है मौन व्रत

भगवान राम टैण्ट में बैठें  गौ माँ कटी बाजार

गंगा माँ दुर्गंध सहे और बेटियों पर अत्याचार

बेरोजगार माथा पीटें हर खेमे में भ्रष्टाचार

सरहद पर पाकिस्तानी खेलें गंदी चाल

एक दिन इन पापियों का संघार करेगा हिन्दुस्तान

सुन्दर संस्कृति संस्कारों का है अपना हिन्दुस्तान

इस पर कोई कुदृष्टि डाले तो होगा समूल विनाश

सत्य की भक्ति करने वालों सुन लो भारतवासियों

अपने देश को विश्वताकत बनाने उठो भारतवासियों !

हे !…

Vichar wallpaper (स्व:विचार)

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स्व:विचार  ..................़..़....................

हमारे ब्लॉग से लिया गया इंटरव्यू  म.प्र के फेमस न्यूजपेपर अकोदिया सम्राट में प्रकाशित :



ब्लॉग इंटरव्यू वेव न्यूज पोर्टल व्यवस्था दर्पण में प्रकाशित :



सच की दस्तक मैग्जीन में हमारा लेख प्रकाशित :
















ब्लॉग इंटरव्यू : जानिये रंगमंच की एक महान शख्शियत के बारे में : "वो एक मसीहा जो कलाकार बनाने निकला" ...

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रंगमंच को समर्पित एक सच्ची शख्शियत : रंगमंच के उद्धारक व भारत के रत्न  'गुरूजी' श्री अनिल तिवारी जी 

नमस्कार दोस्तों ! आप सभी जानते हैं कि हमारी भारतभूमि पावन देवी-देवताओं की जननी मानी गयी
है | यहाँ की पावन भूमि से न जाने कितने शूरवीरों व समाजसुधारकों ने जन्म लेकर अपने सुकर्मों से देश-दुनियां को उन्नत सोच के साथ उन्नत दिशारूपी श्रेष्ठ मार्गदर्शन और सर्वहित की उन्नतमानसिकता का परिचय देकर  हमारी भारतभूमि को धन्य किया है |इसी कड़ी में हम नाम जोड़ना चाहेगें : ऐतिहासिक शहरों आगरा उ.प्र और ग्वालियर म.प्र के गौरव व देश के महान नाटक रत्न व बहुमुखी प्रतिभा के धनी सर्वसम्माननीय बेहतरीन शख्शियत आदरणीय श्री अनिल तिवारी जी का जो किसी परिचय के मोहताज नही जिन्हें रंगमंच के 'गुरूजी' होने का सम्मान प्राप्त है |
       64 वर्षीय श्री अनिल तिवारी जी जिन्होने अविवाहित रहकर अपना सम्मूर्ण जीवन रंगमंच को सौंप दिया | उन्हें ग्वालियर के पहले फिल्म निर्माता और निर्देशक होने का गौरव प्राप्त है जिन्होने 1986 में
फिल्म : हम जियेगें जैसी रंगीन फिल्म बनाकर खुद को सिद्ध करके दिखाया | इस फिल्म में ख्…

कविता : तारीफ़

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तारीफ़ .........
तारीफ़ अगर अपनी हो तो खुशी का पहर है यारों तारीफ़ अगर परायी हो तो वो कोबरे का जहर है यारों हमें कोई महान कहे तो हम फूले नही समाते हैं  हमें कोई गुलाब कह दे तो मानो गुलाबजल में ही  डूब जाते हैं, पर, जब कोई हमारे सहकर्मी के अच्छे कार्य की तारीफ़ हमारे सामने करता है,तो  तुरन्त मुँह फूल जाता और कभी घिघ्घी सी बंध जाती है सुन परायी तारीफ़
बीपी हाई-लो हो जाता है किसी के सिर में दर्द तो  किसी का हाजमा बिगड़ जाता है, बस एक परायी  तारीफ़ से वर्षों का मौन भंग हो जाता है मन में ईर्ष्या है या प्रेम मिनटों में बाहर आता है बस एक परायी तारीफ़ से आत्मा और धर्मात्मा का असलीरूप प्रकट हो जाता है, वो जाते रहे वर्षों कथा और सत्संगों में  बताया गया कि बहुत पहुंचे हुये हैं, मिलना न होगा मुफ्त में पहले भुगतान चैक/ड्राप्ट से कराओ फिर गुरूदेवजी के शुभदर्शन पाओ बन जायेगें बिगड़े काम गुरूदेव का ऐसा प्रताप हो कितना कस्ट गुरूदेव की मुस्कॉन  कभी जाती नही है सांसारी व्याधियाँ भी इन्हें अब अाजमाती नही हैं इनके भी गुरूजी इन्हें अब प्रणाम करने लगें है विदेश से भक्त लोग इनसे आकर मिलने लगे हैं,  फिर, साम…

हटाओ विनाशरूपी "तलाक" की चिप, लगाओ विकासरूपी "मिलाप" की चिप :

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अपने खूबसूरत जीवनरूपी मोबाईल से हटाओ "तलाक" की चिप व लगाओ "मिलाप" की चिप |
अनिवार्य, परमावश्यक एवं महत्वपूर्ण है "तलाक' का उन्मूलन :
. भारत के संगठन एवं विकास के लिये,
. भारतीय राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक   समाज    के संगठन एवं विकास के लिये,
. भारतीय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ परिवार के    संगठन एवं विकास के लिये,
. प्रत्येक भारतीय परिवार के संगठन एवं      विकास के   लिये,
. प्रत्येक भारतीय पति-पत्नि के संगठन एवं विकास के     लिये,
. भारतीय विधान, संविधान, कानून व न्याय में दर्ज तथा    भारत में मौजूद सभी धर्मों के निजि विधान, संविधान,    कानून व न्याय में दर्ज "तलाक" के प्रावधान का उन्मूलन अनिवार्य,परमावश्यक एवं महत्वपूर्ण है  जिससे कि भारत में क्रियान्वित वैरिस्टर मोहनदास करमचन्द्र गाँधी की एवं वैरिस्टर जवाहर लाल नेहरू  की "बेकार,अनावश्यक एवं महत्वहीन "विभाजन एवं विनाश की बदनियति एवं बदनीति" को अनिवार्य एवं परमावश्यकरूप से उन्मूलित किया जा सके और  भारत में राजर्षि स्वामी विवेकानन्दजी एवं नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोसकी अनिवार्य, परमा…

हमारी आन-बान-शान हमारा, हमारी पहिचान "तिरंगा" |

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हमारी पहिचान है "तिरंगा" है |





|| जय हिन्द जय भारत ||