Thursday, January 19, 2017

आजादी के मायने :






आजादी के मायने

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दोस्तों, यह आजादी शब्द हम सभी ने सुना है और क्यों न इस शब्द की हकीकत को जाने इसके मायने को समझने की कोशिस करें कि जब बहुत सारे पंक्षी पंख फैलाये नीले आकाश में उड़ते चले जाते हैं तो वह दृर्श्य बहुत मनोरम होता हैं क्योंकि प्रकृति का प्राकृतिक स्वभाव बहुत ही सुन्दर और प्यारा और मोहक है क्योंकि प्रकृति प्रेम देती बंधन नहीं | जैसे कोई शेर जब जंगल में रहता है तो वह जंगल का राजा कहलाता है और जब वही शेर पिंजड़े में रहता है तो केवल एक सामान्य आश्रित पालतू पशु ही उसकी पहिचान बन जाती है | उसकी आजादी उसके जंगल के प्राकृतिक जीवन में है न कि पिजड़े में आश्रित अप्राकृतिक जीवन में | 
दोस्तों! गुलामी, प्रेम तथा विकास व विराटता के मार्ग को अवरूद्ध कर देती है | इसीलिये सभी इंसान, जीव व प्राणी जगत को आजादी प्रिय है | आजादी हमें खुलकर जीना सिखाती है | हमें पंख रूपी जज्बा देती है पर इसका यह मतलब कतई नही कि हम हमारे निजीहित में किसी दूसरे के पंख ही काट दें | हम हमारी ऊर्जा अपने साथी को गिराने व तोड़ने में लगा रहे हैं| हम जलन त्यागें और व्यक्ति के भरोसे को न तोड़े बल्कि हम अपनी काबीलियत से उसके बनाये रिकार्ड को तोड़ें और एक नया रिकॉर्ड बनाने में अपनी ऊर्जा लगा दें | आजादी हमें सपनों में उड़ने के साथ-साथ सपनों को हकीकत बनाने में योग्यदान देती है| आजादी स्वभिमान की पोषक होती है |आजादी का मतलब यही है कि स्वंय की आत्मा की आवाज का पालन कर उस रास्ते पर चल देना| जिस रास्ते की मंजिल पर हम स्वंय के साथ सभी का विकास कर पाये और देश का नाम गर्व के साथ पूरी दुनिया तक पहुंचा पायें | परन्तु आज आजादी के मायने यह हैं कि हम इतने सिकुड़ कर जी रहे हैं कि पड़ोसी के भी दर्द से भी बेखबर हैं और पड़ोसी तो दूर अपने घर के बुजुर्गों का चश्मा बनवाने की फुर्सत नही है | यहां तक कि उनसे सीधे मुंह बात करना भी हम भूल चुके हैं | हमने कंजूसी की सारी हदें पार कर दी कि दो प्रेम के बोल और एक मुस्कॉन भी हमें किसी को देना गंवारा नही जबकि इसमें धन खर्च नही होता | हमारी जीभ को जिस कदर मीठा पसंद है, काश! कि उतना ही मीठा बोलना भी आ जाये तो काफी कुछ टूटने- बिखरने से बच जाये | आज हम कुछ इस तरह से आजाद हैं कि केवल अपने लिये ही जी रहे हैं जबकि यह जीवन प्रकृति से मिला है और प्रकृति तो देना जानती है और हम 'देना' शब्द ही भूल गये | दोस्तों, हम अपने अजीब बेढ़गें स्वभाव के गुलाम हो गये और दुर्भाग्य यह है कि हम इस स्वार्थी और खुदगर्ज रवैये रूपी पिजड़े से खुद को आजाद करना ही नही चाहते और आजादी की बात करते हैं | यही बुजदिल, खुदगर्ज रवैया आज हमारी नीति व नियति बन चुका है जोकि इंसानियत के लिये घातक हथियार से कम नही है
दोस्तों हम कहाँ आजाद हैं बोलो ! जब तक देश का एक भी बच्चा-बच्ची, महिला, वृद्ध भूखे व असुरक्षित सड़कों पर बदहाल सोने पर विवश हैं और एक भी युवा दुखी व बेरोजगार है जब तक दहेज के कारण देश की एक भी बेटी शोषिक व मारी जाती रहेगी और जब तक लोगों की सोच में घुल चुका नशा और छुआ-छूत का जहर खत्म नही हो जाता तथा जबतक देश में गौ, गंगा और कन्या व प्रकृति के प्रति हमारा संवेदनहीन रवैया नही सुधरता तथा समाज की हर समय बेटियों को दबाने की दकिसानूसी मानसिकता में सुधार नहीं आता तब तक हमें खुद को आजाद कहने का कोई हक नही है क्योंकि हम दकियानूसी संकीर्ण सोच व विकृत मानसिकता के आज भी आदी व गुलाम बने हुये हैं | जब तक हम हमारे दिल, दिमाग और मन में न्यायिक, समदर्शी, पारदर्शी व इंसानियत से ओत-प्रोत सोच को स्थापित नही करेगें तब तक हम सही मायनों में इंसान भी कहलाने के लायक नही है |जब तक हमारे अंदर बुराईयों की दीवारें नही गिरेगीं तब तक यह भेद-भाव की खाइयां नहीं पटेगीं | 
जब तक हमारे अंदर की तासीर नही बदलेगी
तब तक देश की तस्वीर व तकदीर भी नही निखरेगी |
इंसान का भोलापन आज उसका खोखलापन बन चुका है कि इंसान जानता सब है पर मानता नही |
विडम्बना यह है दोस्तों, कि हम हमारे पड़ोसी को बदलना चाहते हैं यकीनन देश को बदलना चाहते हैं पर खुद को बदलना नहीं चाहते | कहीं पर भी पहुंचने के लिये कदम तो स्वंय को ही बढ़ाने होगें | हम दोस्ती चाहते हैं तो हाथ हमको ही बढ़ाना होगा और सहृदय, ससम्मान मिलाना होगा | आजादी के मायने यही है कि इंसान में इंसानियत जीवित रहे | हम खुद भी जागें और लोगों को भी जगाये | हम खुद भी आगें बढ़े और लोगों को भी आगें बढ़ायें | हमेशा सर्वजनहितकारी, सम्मानकारी, समदर्शी व पारदर्शी प्राकृतिक स्वभाव अपनाये | अपने तन- मन और वाणी से अपने स्थान, गांव, शहर और देश को स्वच्छ और पारदर्शी सोच से स्वच्छ, स्वस्थ व सुन्दर बनाये रखें|

!! इंसानियत जिंदाबाद !!

!! जय हिन्द जय भारत !!

दोस्तों आप सभी को देश के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस की अग्रिम बधाई और ढ़ेरसारी शुभकामनायें | हमें अपने महान देश जो अपने में महानतम् प्रतिभाशाली, गौरवशाली इतिहास को समेटे, विश्वगुरू, पवित्र, सर्वधार्मिक सौहार्द को कायम रखे, दिव्य तेजोमय वीरों की तपोभूमि भारतभूमि को शीश नवाकर सहृदय ससम्मान शत् शत् नमन करती हूँ |  

..............!! वंदेमातरम् !!.............


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर. समाज और हम 

गणतंत्र दिवस पर विशेष :





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आजादी के मायने

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दोस्तों, यह आजादी शब्द हम सभी ने सुना है और क्यों न इस शब्द की हकीकत को जाने और इसके मायने को समझने की कोशिस करें कि जब बहुत सारे पंक्षी पंख फैलाये नीले आकाश में उड़ते चले जाते हैं तो वह दृर्श्य बहुत मनोरम होता हैं क्योंकि प्रकृति का प्राकृतिक स्वभाव बहुत ही सुन्दर और मनमोहक है क्योंकि प्रकृति प्रेम देती बंधन नहीं |जैसे कोई शेर जब जंगल में रहता है तो वह जंगल का राजा कहलाता है और जब वही शेर पिंजड़े में रहता है तो केवल एक सामान्य आश्रित पालतू पशु ही उसकी पहिचान बन जाती है | उसकी आजादी उसके जंगल के प्राकृतिक जीवन में है न कि पिजड़े में आश्रित अप्राकृतिक जीवन में| 
        दोस्तों! गुलामी, प्रेम तथा विकास व विराटता के मार्ग को अवरूद्ध कर देती है | इसीलिये सभी इंसान, जीव व प्राणी जगत को आजादी प्रिय है |आजादी हमें खुलकर जीना सिखाती है और सपनों में उड़ने के
साथ-साथ अपने सपनों को हकीकत में ढ़ालने में पूर्ण योग्यदान देती है | आजादी स्वभिमान की पोषक होती है |आजादी का मतलब यही है कि हम हमारे अंदर की बुराईरूपी बेड़ियों को तोड़कर स्वंय की आत्मा की आवाज को न सिर्फ सुने वरन उसका दृढ़ता से पालन कर उसी रास्ते पर चल दें| जिस रास्ते की मंजिल पर हम स्वंय के साथ सभी का विकास कर पाये और देश का नाम गर्व के साथ पूरी दुनिया तक पहुंचा पायें|परन्तु आज आजादी के मायने यह हैं कि हम इतने सिकुड़ कर जी रहे हैं कि पड़ोसी के भी दर्द से बेखबर हैं और पड़ोसी तो दूर, अपने घर के बुजुर्गों का चश्मा बनवाने तक की फुर्सत नही है | दोस्तों आजादी किसी कम्पनी का लेवल या ब्रांड नहीं है जिसे चिपकाये घूमें, आजादी तो सुन्दर और सार्थक जीवन जीने की कला का नाम है | आज हम कुछ इस तरह से आजाद हैं कि केवल अपने लिये ही जी रहे हैं | यानि हमने स्वतंत्रता को स्वछन्दता में बदल लिया और हम उद्ण्ड होते गये | जबकि यह जीवन प्रकृति से मिला और प्रकृति तो देना जानती है और हम 'देना' शब्द ही भूल गये | दोस्तों हम अपने अजीब बेढ़गें स्वार्थी स्वभाव के गुलाम हो गये और सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि हम इस खुदगर्ज रवैये रूपी पिजड़े से आजाद होना ही नही चाहते | यही विकृत रवैया और दुर्व्यवहार आज हमारी नियति बन चुका है जोकि इंसानियत के लिये बेहद घातक हथियार से कम नही है |
       दोस्तों हम कहाँ आजाद हैं बोलो !
जब तक देश का एक भी बच्चा-बच्ची, महिला, वृद्ध भूखे व असुरक्षित सड़कों पर बदहाल सोने पर विवश हैं और एक भी युवा दुखी व बेरोजगार है जब तक दहेज के कारण देश की एक भी बेटी शोषिक व मारी जाती रहेगी और जब तक लोगों की सोच में घुल चुका नशा और हैवानियत, छुआ-छूत का जहर खत्म नही हो जाता तथा जबतक देश में गौ, गंगा और कन्या व प्रकृति के प्रति हमारा संवेदनहीन रवैया सुधर नही जाता तथा समाज की हर वक्त बेटियों को दबाने की दकिसानूसी मानसिकता में सुधार नहीं आ जाता तब तक हमें खुद को आजाद कहने का कोई हक नही है क्योंकि हम दकियानूसी विकृत मानसिकता के आज भी आदी, बंदी व गुलाम बने हुये हैं | जब तक हम हमारे दिल, दिमाग और मन में न्यायिक, समदर्शी, पारदर्शी व इंसानियत से ओत-प्रोत सोच को स्थापित नही करेगें तब तक हम सही मायनों में इंसान तक कहलाने के लायक नही है |
जब तक हमारे अंदर छिपी बुराईयों की दीवारें नही गिरेगीं तब तक भेद-भाव की यह खाइयां नहीं पटेगीं | 
जब तक हमारे अंदर की तासीर नही बदलेगी
तब तक देश की तस्वीर व तकदीर भी नही निखरेगी |
इंसान का भोलापन आज उसका खोखलापन बन चुका 
कि इंसान जानता सब है पर मानता नही |
विडम्बना यह है दोस्तों, कि हम हमारे पड़ोसी को बदलना चाहते हैं यकीनन देश को बदलना चाहते हैं पर खुद को बदलना नहीं चाहते | कहीं पर भी पहुंचने के लिये कदम तो स्वंय को ही बढ़ाने होगें | हम दोस्ती चाहते हैं तो हांथ हमको ही बढ़ाना होगा और सहृदय, ससम्मान मिलाना होगा | 
आजादी के मायने यही है कि इंसान खुद की बुराइयों और गुरूर पर फतह हासिल करे और कम से कम इंसान में इंसानियत तो जीवित रहे | हम खुद भी जागें और लोगों को भी जगाये | हम खुद भी आगें बढ़े और लोगों को भी आगें बढ़ाये | हमेशा सर्वजनहितकारी सम्मानकारी, समदर्शी व पारदर्शी प्राकृतिक स्वभाव अपनाये | अपने तन- मन और वाणी से अपने स्थान, गांव , शहर और देश को स्वच्छ और पारदर्शी सोच से स्वच्छ, स्वस्थ व सुन्दर बनाये रखें |





 इंसानियत जिंदाबाद !!

!! जय हिन्द जय भारत !!

दोस्तों आप सभी को देश के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस की अग्रिम बधाई और ढ़ेरसारी शुभकामनायें | हमें अपने महान देश जो अपने में महानतम् प्रतिभाशाली, गौरवशाली इतिहास को समेटे, विश्वगुरू, पवित्र, सर्वधार्मिक सौहार्द को कायम रखे, दिव्य तेजोमय वीरों की तपोभूमि भारतभूमि को शीश नवाकर सहृदय ससम्मान शत् शत् नमन करती हूँ |  

!! वंदेमातरम् !!



आकांक्षा सक्सेना                 
ब्लॉगर. समाज और हम 
http://akaksha11.blogspot.com

Tuesday, January 10, 2017

23 जनवरी नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस जयन्ती पर विशेष :







भारतीयों के आदर्श एवं उनकी आदर्श विचारधारा :

......... नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस......


नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस जी का जन्म दिनाकं 23 जनवरी सन् 1897 को उड़ीसा में कटक के एक सम्पन्न बंगाली कायस्थ परिवार में हुआ था और सन् 1937 में उनका विवाह उनकी सेक्रेटरी आस्ट्रेलियन युवती ऐमिली के साथ हुआ|
   उन्होने आईसीएस की परीक्षा निर्धारित समय से पूर्व ही पूरी की थी और वह प्रथम श्रेणी के आई.सी.एस ऑफीसर कलेक्टर बने | इस प्रकार उन्होने अपने पिता वैरिस्टर श्री जानकीनाथ बोस की इच्छा पूर्ण की | आजाद हिन्द फौज के सेनापति बनकर उन्होने अपने बड़े भाई महान वैज्ञानिक डा.जगदीश चन्द्र बोस एवं रासबिहारी बोस जी की इच्छा पूर्ण की | आजाद हिन्द फौज में महारानी लक्ष्मीबाई रेजीमेन्ट बनाकर उन्होने अपनी माता श्री मति प्रभावती जी की इच्छा पूर्ण की तथा अपनी पत्नि श्री मति ऐमिली बोस को अनीता बोस पुत्रीरत्न देकर अपनी पत्नि की इच्छा पूर्ण की | 15 अगस्त सन् 1942 को  सिंगापुर में भारतवर्ष की स्वतंत्रता, आजादी व मुक्तता का तिरंगा लहराकर अपने गुरू राजर्षि स्वामी विवेकानन्द जी की इच्छा पूर्ण की | भारत में 200 वर्षों से शासन कर रहे ब्रिटिश के अंग्रेजों से कहा कि तुम लोग भारतीय सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित भारतीय नागरिक नही हो | तुम लोगों के भारत से भागने के मैने जल एवं वायु मार्ग अवरूद्ध करवा दिये हैं | तुम लोग सिर्फ थल मार्ग से भारत से भाग सकते हो | यदि तुम लोगों ने भारत न छोडा तो हमारे फौजी देशभर में मौजूद हैं | वे तुम लोगों को भारत के अंदर ही जान से मार देगें | अपनी  जान को कानूनी खतरा समझ कर ब्रिटिश के अंग्रेजों ने आनन-फानन में भारत छोड़ दिया और वे थल मार्ग से भारत से निकल भाग गये | इस प्रकार नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस ने देशवासियों को ब्रिटिश के अंग्रेजों से स्वतंत्र, आजाद व मुक्त कराकर भारतीय नागरिकों की इच्छा पूर्ण की | इसीलिये नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस भारतीयों के आदर्श हैं |
    नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस की स्वंय की इच्छा व उनकी आइडियोलॉजी (विचारधारा) यह थी कि भारत में वही रहेगा जो अपने जीवन व जीविका का टैक्सचोर व इस कालेधन का जमाखोर न हो, वह बदनियतिखोर व बदनीतिखोर न हो,
वह विभाजनकारी व विनाशकारी न हो, वह अपने पूर्वनियोजित धोखाधड़ी का षड़यंत्रकारी न हो, वह बेईमान व गद्दार न हो, वह भारतीय नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के अभिलेखों में भारतीय जनजीवन व जीविका की सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित पहिचान मिटाने वाला न हो |
         नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस भारत को अखण्ड भारतवर्ष एवं जगतगुरू बनाना चाहते थे |
  वह, यह स्वीकारते थे कि भारतीय नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के अभिलेखों में भारतीय जनजीवन व जीविका की सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित पहिचान मिटाना भारतीय सर्वोच्च घृणित, जघन्य व अक्षम्य दण्डनीय अपराध व अन्याय है |
        वह, यह स्वीकारते थे कि भारतीय जनजीवन व जीविका की सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित पहिचान ही भारतीय जनजीवन व जीविका की आत्मा है जिसके बिना भारतीय जनजीवन व जीविका अप्रमाणित व निर्जीव है |
       वह, भारतीय जनजीवन व जीविका की सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित पहिचान भारतीय नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के अभिलेखों में बनाना चाहते थे |
      वह भारतीय जनजीवन व जीविका को अपराधमुक्त व रोजगारयुक्त बनाना चाहते थे |
      वह प्रत्येक सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित भारतीय नागरिक को अपने जीवन का सृजनशील उद्देश्य पूरा किये जानेहेतु उसे उसकी इच्छा व शिक्षा योग्यतानुसार बिना किसी बाधा के समान सरकारी व मतकारी, अर्द्धसरकारी व कर्मचारी एवं निजीकारी व श्रमकारी आजीविका व पैंसन तथा समान अत्यआधुनिक बुनियादी सेवायें व सुविधायें अनिवार्य एवं परमावश्यकरूप से प्राप्त करवाना चाहते थे |
      इसके लिये वह प्रत्येक सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित भारतीय नागरिक को पंजीकृत वैधानिक स्वतंत्र आदर्श गौरवशाली स्मृद्धिशाली आनंदवादी सरकारी व मतकारी भारतीय राजनीतिक समाज का, बीमाकृत संवैधानिक आजाद महानप्रतिभाशाली वैभवशाली शिष्टाचारी अर्द्धसरकारी व कर्मचारी भारतीय आर्थिक समाज का एवं लाईसैंसीकृत कानूनी मुक्त महानतम् मर्यादाशाली सदाचारी अत्याधुनिक विश्वविजयी सैन्यशक्तिशाली निजीकारी व श्रमकारी भारतीय सामाजिक समाज का अनिवार्य एवं परमावश्यक सदस्य बनाना चाहते थे |
       इसके लिये वह भारतीय नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के राजनीतिक समाजी सरकारी व मतकारी, आर्थिक समाजी अर्द्धसरकारी व कर्मचारी एवं सामाजिक समाजी निजीकारी व श्रमकारी अभिलेखों का गठन भारतीय नागरिकों के सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित जीवन के पहिचान के अभिलेखानुसार करवाना
चाहते थे |
      इसके लिये वह प्रत्येक विवाहित, जन्में व मृतक स्त्री, पुरूष व किन्नर भारतीय नागरिक को उसके विवाहित होने, पैदा होने व मृतक होने की पहिचान का पंजीकृत वैधानिक, बीमाकृत संवैधानिक एवं लाईसैंसीकृत कानूनी भारतीय उत्तराधिकारित, राष्ट्रीय मानवाधिकारित व भारतीय सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र प्राप्त करवाना चाहते थे |
     इसके लिये वह प्रत्येक विवाहित, जन्मे व मृतक, स्त्री, पुरूष व किन्नर भारतीय नागरिक के विवाह, जन्म व मृत्यु का न्यूनतम निर्धारित आजीवन वैधानिक पंजीकरण राजस्वकर, संवैधानिक बीमाकरण वित्तकर व कानूनी लाईसैंसीकरण आयकर भारत के राजकोष, वित्तकोष व आयकोष में जमा करवाकर इन तीनों कोषों को सामर्थ से अधिक, बहुत बड़े पैमाने पर, अनावश्यक अशोधनीय हानि होने से बचाना चाहते थे | जिससे कि कोई भी भारतीय नागरिक अपने जीवन व जीविका की टैक्सचोरी व कालेधन की जमाखोरी न कर सके|
     "भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के अधिनियमों के तहत संचालित भारतीय नागरिकों के सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित जीवन के पहिचान के अभिलेखानुसार पंजीकृत वैधानिक, बीमाकृत संवैधानिक व लाईसैंसीकृत कानूनी भारतीय उत्तराधिकारित राष्ट्रीय मानवाधिकारित व भारतीय सर्वोच्च न्यायिकरूप से विवाहित, जन्मे व मृतक स्त्री, पुरूष व किन्नर को सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित भारतीय नागरिक कहते हैं |"
      वह इस परिभाषा को भारतीय संविधान एवं कानूनों में दर्ज करवाना चाहते थे | जिससे कि भारत का कोई भी शासक भारतीय जनजीवन व जीविका की सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित पहिचान भारतीय नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के अभिलेखों में न मिटा सके | नेताजी को भूमिगत इसलिये होना पड़ा कि नेताजी की ताकत उनकी आजादहिन्द फौज थी जिसकी मदद जापान सरकार कर रही थी | अमेरिका ने जापान को नष्ट कर दिया था | इसलिये नेताजी व उनकी फौज कमजोर व मजबूर हो गये थे |इसलिये वह अपनी इच्छा पूरी नही कर सके | उन्होने कहा था कि उन्हें अपने विरूद्ध लगाये आरोप व जारी गिरफ्तारी वारंट की चिंता नही उन्हें चिंता यह थी कि भविष्य में यदि दुर्भाग्यवश तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो देश की सेना में विदेशी मित्र देशों की सेनायें भी मिलकर यह युद्ध लड़ नहीं पायेगी | नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस भारतीय सेना को अत्याधुनिक विश्व विजयी बनाना चाहते थे और इस वास्ते वह भारतीय जनजीवन व जीविका को अपनी आदर्श विचारधारा के तहत पारदर्शी बनाना चाहते थे |
    वह कहते थे कि देश को एक ऐसी पार्टी की जरूरत है जो सिर्फ आजादी के काम में ही न लगी रहे बल्कि आजादी पाने के बाद राष्ट्र के पुर्नर्निर्माण में जनकल्याणकारी योजनायें भी क्रियान्वित करे |
    उन्होने दुखी होकर कहा था कि भारतीय रजिस्टर में उनके जीवन व जीविका की पहिचान ही मिटा दी गयी है|
     भारतीय संविधान में वैरिस्टर डा. भीमराव अम्बेडकर नेताजी की उक्त परिभाषा को दर्ज करना चाहते थे परन्तु वैरिस्टर  जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा नही होने दिया क्योंकि नेहरूजी को यह भय था कि कहीं उनके कुटुम्ब परिवार के जीवन व जीविका की पोल न खुल जाये |इसी से खिन्न होकर डा.अम्बेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि यदि इस संविधान को नेकनियति व नेकनीति से लागू न किया तो परिणाम गम्भीर होगें | इसी से दुखी होकर डा.अम्बेडकर ने अपने जीवन व जीविका की पहिचान मिटाकर अपने सभी पद त्यागे,हिन्दुधर्म त्यागा व हिन्दु नाम त्यागा | उन्होने बोद्धधर्म अपनाकर अपना नाम बौद्धभिक्षु दलिताईलामा रखा था |
     यही कारण है कि नेहरूजी की हठधर्मिता के कारण भारतीय संविधान व कानूनों में सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित भारतीय नागरिक की परिभाषा दर्ज नही है| भारतीय जनजीवन व जीविका की यही वह मूल कमजोरी व मजबूरी है जिसके कारण भारतीय जनजीवन व जीविका हजारों वर्षों तक विदेशी शासक डचों, पुर्तगालियों, यूनानियों, मुगलों व ब्रिटिश के अंग्रेजों का गुलाम रहा तथा विगत सत्तर वर्षों से स्वदेशी शासकों का गुलाम है|
    भारत के सवासौ करोड़ लोगों ने अबतक अपने जीवन व जीविका की इस मूल कमजोरी व मजबूरी को समझने का प्रयास ही नही किया और न ही इस बाबत भारतीय संविधान व कानूनों में संसोधन करवाया |
   इस प्रकार भारतीय नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के अभिलेखों में न सिर्फ नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस के जीवन व जीविका की सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित पहिचान मिटी पड़ी है बल्कि सभी नागरिकों की यह पहिचान मिटी पड़ी है | हम सवासौ करोड़ लोग आखिर कौन है और कहाँ के सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित नागरिक इसका सर्वोच्च न्यायिक प्रमाणित सबूत किसी के पास नही हैं क्या यही भारतीय सर्वोच्च पारदर्शी कानून व न्याय है| इस प्रकार हम कह सकते हैं कि नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस भारतीयों के आदर्श हैं व उनकी आदर्श विचारधारा है | खेद है कि नेहरू जी ने नेताजीको अपना न तो आदर्श माना और न ही उनकी आदर्श विचारधारा को अपनाया | उसी का दुष्परिणाम सबके सामने है |
  भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रनाथ दामोदरदास मोदी जी ने नेताजी कि विचारधारा को आंशिकरूप से अपनाया है जिसके तहत उन्होने राष्ट्रव्यापी टैक्सचोरी व कालेधन की जमाखोरी का अभियान चलाया है और वह भारतीय सेना को अत्याधुनिक बनाने में कार्यरत् है | उम्मीद है कि भविष्य में श्री मोदी जी नेता जी कि उपरोक्त विचारधारा को भारतीय संविधान एवं कानूनों में संसोधन करवाकर अवश्य क्रियान्वन करेगें| तभी सबका साथ और सबका विकास व नेताजी का मिशन पूरा होगा और तभी भारत विभाजन एवं विनाश की कुटिल राजनीति से मुक्त होगा|
     दोस्तों, नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस जी का सम्पूर्ण जीवन देश की आजादी में बीता
और दुर्भाग्य यह है कि देश के कुछ गद्दारों का जीवन उनकी व देश की बर्बादी में बीता|
दोस्तों, वह एक सच्चे हिन्दुस्तानी हैं कि जिनकी बेदाग शख्शियत को हिटलर, तोजो, मुसोलनी जैसे विश्वप्रसिद्ध तानाशाह सैल्यूट करते थे|वह स्वंय में भारतरत्न एवं नोबेल सम्मानित हैं|

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम

.....................जयहिन्द.....................

Monday, January 9, 2017

मिला सम्मान


जिले औरैया के सामाजिक संगठन चित्रांश सभा ने किया सम्मानित | आपके द्वारा मिले इस सम्मान के लिये आपसभी को सहृदय ससम्मान धन्यवाद |इसके बाद गौशाला में गौ माता के साथ कुछ फोटो |





.......धन्यवाद......
















Saturday, January 7, 2017

एक घटना ...बुजुर्गों के सम्मान को समर्पित




नमस्कार दोस्तों
एक पुरानी घटना आप के बीच रख रही हूँ.....

एक घटना सुनाती हूँ आपको|उस दिन हमारा कानपुर में टीजीटी का टेस्ट था तो बसों में भारी भीड़ थी | हम ऐसी भरी एक बस में चढ़े क्योंकि सभी बहुत ज्यादा भरीं आ रहीं थीं|
    बस में बहुत लोग खड़े थे सीट सब भरीं थी | हम भी खड़े थे | हमको खड़ा देख कर कुछ लोग बोले लड़की जात है इनको भाई को जगह दे दे थोडा खिसक जाओ भाई | हम चुप खड़े थे | तो कुछ लोग बोले बिटिया बैठ जाओ कब तक ....खड़ी रहोगी !
हमने लाईन में खड़े लोगों की तरफ एक नजर डाली...तो बिना बोले रहा न गया...हमने कहा भाई हम खड़े हैं और दो तीन घण्टे खड़े सफर कर सकती हूँ भाई पर...जरा देखो ये चार बुजुर्ग जिनकी हालत देखो बीमार लग रहे हैं | जरा जगह इनको दे दीजियेगा | यह सुनने के बाद केवल एक थोडा सा खिसका | हमने कहा कि अगर ये बुजुर्ग लोग आपके सगे नाना, फूपा, बाबा -दादा होते तो क्या फिर भी आप अपनी सीट पर ऐसे ही बैठे रहते |
यह सुनकर तुरन्त चार लड़के उठे और उन बुजुर्ग को विंडो सीट मिल गयी वो मुस्कुरा रहे थे | उनमें से एक बुजुर्ग लड़खड़ाती आवाज में बोला कि बिटिया ये जो आगें की सीट पर प्रोफेसर साहिब बैठें हैं इनको मैंने ही पढ़ाया पर आज गरीब गुरू को देखकर मुंह फेरे बैठा हैं, सीट क्या देगा मुझे...
आगें बैठे व्यक्ति की नजरें शर्म से झुकीं थी |
बाद में सब लोग फिर अपनी-अपनी बातों में लग गये....
हम खड़े रहे हिलते - डुलते....झूला जैसा आनंद आ रहा था | वो सब बुजुर्ग पीछे गेट से प्यारी नजर से हमें देखते हुऐ उतर गये पर हम सोचते ही रह गये...
दोस्तों,
    रूपया चाहे कितना भी गिर जाये पर शायद इतना कभी नहीं गिरेगा जितना रूपया के लिये आज इंसान गिर गया.......

 ....प्लीज बुजुर्गों को सम्मान दें...


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम

Tuesday, January 3, 2017

नववर्ष 2017 का हो शुभ आगमन, जनजन में हो सत्य जागरण..

हमारे सभी दोस्तों को नववर्ष 2017 की हार्दिक शुभकामनायें | भगवान श्री कृष्ण जी आप सभी दोस्तों के सभी सपनों को जल्द से जल्द साकार करें |
समाज और हम ब्लॉग की तरफ से आप सभी मित्रों को नववर्ष की ढे़रसारी शुभकामनायें और हमारी आपकी पत्रिका सच की दस्तक की तरफ से आप सभी को नववर्ष की हार्दिक बधाई | ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि वर्ष 2017 आपसभी के लिये शुभ और यादगार रहें|



यदि कोई भी मित्र हमारे साथी लिखने का जुनून रखते हों तो अपने लेख इस मेल आईडी पर मेल करें

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हमें आपके लेख और सुझावों का इंतजार रहेगा |
धन्यवाद |

.......धन्यवाद दोस्तों......