Tuesday, October 25, 2016

दीपावली महापर्व पर विशेष :







   

ऐसे करें अंधकार को प्रकाशित

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बैंकों की तर्ज पर हो सभी शिक्षालयों का राष्ट्रीयकरण :


भारतीय संविधान में दिये समानता के अधिकार के तहत लिंग न्याय को ध्यान में रखते हुये मा. भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय को किसी भी मामले में भारतीय जनजीवनहित में व उनके सर्वोच्चन्यायहित में व्यक्तिगत संज्ञान लेते हुये अपने फैसले के तहत भारत की केन्द्र सरकार एवं समस्त राज्यों की सरकारों को शीघ्रातिशीघ्र अपने तत्काल प्रभाव से आदेशित करना चाहिये कि वह भारत के समस्त कानूनों में तथा वर्तमान सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता में भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के अधिनियमों के तहत संचालित भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के सर्वोच्च न्यायिक दस्तावेजी साक्ष्य अभिलेखानुसार विवाहित, जन्में व मृतक स्त्री, पुरूष व किन्नर भारतीय नागरिक व्यक्ति की समदर्शी, पारदर्शी एवं सर्वोच्च न्यायिक स्पष्ट परिभाषा दर्ज कर इन अधिनियमों का उल्लंघन अक्षम्य अपराध दर्ज करें तथा इन अधिनियमों का उल्लंघन गैरजमानती संज्ञेय अर्थ व मृत्यु दंडनीय अक्षम्य अपराध भारतीय अपराध दंड संहिता में दर्ज कर इनका सैशन ट्राईल भारतीय अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में दर्ज करें और भारतीय नागरिकों के फोटो पहिचान के सभी प्रकार के राजनीतिक समाजी सरकारी व मतकारी, आर्थिक समाजी अर्द्धसरकारी व कर्मचारी एवं सामाजिक समाजी निजीकारी व श्रमकारी दस्तावेजों में दाखिल एवं खारिज प्रत्येक विवाहित, जन्मिक व मृतक स्त्री, पुरूष व किन्नर भारतीय नागरिक व्यक्ति की विवाहित, जन्मिक व मृतक जीवन की सर्वोच्च न्यायिक दस्तावेजी साक्ष्य पहिचान उसके विवाह तिथि, जन्मतिथि व मृत्युतिथि की वैधानिक पंजीकृत संख्या, संवैधानिक बीमाकृत संख्या एवं कानूनी लाईसैंसीकृत संख्या सम्बंधित संयुक्त कार्यालय के नाम पता सहित अनिवार्य एवं परमावश्यक रूप से दर्ज कर प्रत्येक भारतीय नागरिक को पंजीकृत वैधानिक सभ्य सरकारी व मतकारी राजनीतिक समाज का आदर्श गौरवशाली, बीमाकृत संवैधानिक सभ्य अर्द्धसरकारी व कर्मचारी आर्थिक समाज का महान प्रतिभाशाली एवं लाईसैंसीकृत कानूनी सभ्य निजीकारी व श्रमकारी सामाजिक समाज का महानतम् मर्यादाशाली संस्कारित, शिक्षित एवं सुरक्षित व संरक्षित सभ्य भारतीय नागरिक अपराधमुक्त सदस्य बनाया जा सके तथा उसे अपने सृजनशील जीवन का उद्देश्य पूरा किये जाने हेतु उसकी इच्छा व शिक्षा योग्यतानुसार बिना किसी बाधा के उसे समान सरकारी व मतकारी, अर्द्धसरकारी व कर्मचारी एवं निजीकारी व श्रमकारी आजीविका व पैंसन तथा समान बुनियादी सेवायें व सुविधायें प्राप्त करवायी जाकर रोजगारयुक्त स्मृद्धिशाली, वैभवशाली एवं विश्व विजयी सैन्यशक्तिशाली सभ्य भारतीय नागरिक बनाया जा सके जिससे शदियों से चले आ रहे लिंग अन्याय व अशिक्षा को मिटाया जा सके|
         जिस प्रकार भारत की सभी बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ है वैसे ही भारत की समस्त अनौपचारिक शिशु शिक्षालय से लेकर विश्व विद्यालय तक के सभी शिक्षालयों का भी हो राष्ट्रीयकरण जिससे की शिक्षा के महत्व को प्राथमिकता के आधार पर सभी तक समानता से पहुंचाया जा सके और भावी पीढ़ी को सर्वोच्च न्यायिक महत्वपूर्ण सभ्य भारतीय नागरिक बनाया जा सके | शिक्षा के साथ स्वास्थ्य, पोषण, खेलकूद, सैन्यशिक्षा एवं प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी न आ सके | भारत का सर्वाधिक बजट शिक्षा व सुरक्षा पर व्यय हो ऐसी नीति बनायी जा सके जिससे कि शिक्षा को समान व सही रूप से सभी तक अनिवार्य एवं परमावश्यकरूप से उपलब्ध कराया जा सके जिससे भारत की प्रगति एवं विकास की गति तीव्र की जा सके | भारत के सभी अनौपचारिक शिशु शिक्षालय से लेकर विश्वविद्यालय तक के सभी शिक्षालय राष्ट्रीय खर्चे से चलायें जा सकें | राष्ट्र की ओर से प्रत्येक शिक्षालय में सरल से कठिन की ओर पढ़ने व पढ़ाने की पाठ्यसामग्री समय से सभी शिक्षार्थियों एवं शिक्षकों को प्राप्त करवायी जा सके | सभी को सरल से कठिन की ओर गुणवत्तायुक्त सदैव स्मरण रहने वाली श्रैष्ठ शिक्षा सर्वसुलभ प्राप्त करवायी जा सके | राष्ट् के सभी शिक्षालयों का राष्ट्रव्यापी समान पाठ्यक्रम स्मरणीय सरल से कठिन की ओर हो| सभी शिक्षालय भवन भूकम्परोधी, अग्निरोधी एवं परमाणु विकरणरोधी तथा समस्त हाईटैक समान बुनियादी सेवाओं व सुविधाओं से युक्त हों | सभी शिक्षकों एवं शिक्षार्थियों का अपना पू्र्व निर्धारित समान यूनीफोर्म ड्रैस हो | सभी शिक्षालय अवकाश प्राप्त सैनिकों से निर्वाधरूप से सुरक्षित हों | सभी शिक्षालयों में सैन्यशिक्षा /एनसीसी अनिवार्य हो तथा प्रत्येक सक्षम शिक्षार्थी कम से कम एक वर्ष भारतीय सेना में सेवारत् हो | प्रत्येक जनपद में अनौपचारिक शिशु प्रशिक्षण ये लेकर विश्वविद्यालयी प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो | प्रशिक्षित शिक्षिका एवं शिक्षक की नियुक्ति उसके जनपद के सामान्य निवास ब्लॉक स्तर पर ही हो | प्रत्येक शिक्षक को राष्ट्रव्यापी समान वेतन तथा समान बुनियादी सेवायें व सुविधायें समान समय पर बिना किसी बाधा के उपलब्ध हों | रिटायरमेंट के समय शिक्षिकाओं एवं शिक्षकों के समस्त बकाया धन उसे अपने शिक्षालय में विदायी समारोह से पूर्व बिना किसी बाधा के हर हालत में प्राप्त हो | प्रत्येक शिक्षिका एवं शिक्षक निर्वाचन आदि अतिरिक्त कार्य से मुक्त हो | प्रत्येक शिक्षालय में क्लर्कों का स्टॉफ हो जिससे शिक्षक एवं शिक्षिका अध्ययन एवं अध्यापन कार्य में कोई बाधा न हो | समस्त शिक्षालयों में परीक्षायें समान राष्ट्रव्यापी एक ही समय पर हों और परीक्षा परिणाम भी एक ही समय पर प्रकाशित हों | सभी प्रश्नपत्र राष्ट्रव्यापी समान हों | प्रत्येक शिक्षिका एवं शिक्षक को विशेष रियायती स्वास्थ्य एवं यातायात सुविधा आजीवन प्राप्त हो | प्रत्येक शिक्षालय अनुशासन एवं समानता के मामले में धर्म, जाति, समुदाय, लिंग, रंगरूप, आकार प्रकार, अमीरी-गरीबी इत्यादि की असमानता की बदनियति एवं बदनीति के धोखाधड़ी के षड़यंत्र से मुक्त हों | प्रत्येक शिक्षालय के छात्र प्रवेश फार्म एवं पंजीयन अभिलेख में अविवाहित एवं विवाहित छात्र एवं छात्रा की जन्मतिथि एवं विवाहतिथि की वैधानिक पंजीकृत, संवैधानिक बीमाकृत एवं कानूनी लाईसैंसीकृत संख्या सम्बंधित संयुक्त कार्यालय के नाम पता सहित दर्ज की जानी अनिवार्य एवं परमावश्यक हो| इसी प्रकार छात्र एवं छात्रा के माता पिता की जन्मतिथि एवं विवाहतिथि तथा मृतक माता या पिता या दोनों मृतक माता पिता के मृत्यु तिथि की वैधानिक पंजीकृत, संवैधानिक बीमाकृत एवं कानूनी लाईसैंसीकृत संख्या सम्बंधित कार्यालय के नाम पता सहित दर्ज हो| जिससे कि शिक्षालयों में जैंडर अनजस्टिस को समाप्त किया जाकर तथा जैंडर जस्टिस को स्थापित किया जाकर समान राष्ट्रवाद को पुर्नस्थापित किया जा सके और संस्कारिक, शिक्षित, सुरक्षित एवं संरक्षित होने का मूल सर्वोच्चन्यायिक उद्देश्य पूरा हो सके | जिससे कि कोई भी शिक्षा की फर्जी प्रमाणपत्र व डिग्री एवं पहिचानपत्र प्राप्त न कर सके |
     फिनलैंड एक ऐसा छोटा देश है जिसने शिक्षा के महत्व को समझा और सभी तक प्राथमिकता से समानरूप से पहुंचाया है | जहाँ उपरोक्त समस्त व्यवस्थायें मौजूद हैं | इसी प्रकार कुछ सम्बंधित देशों की शिक्षा में प्रत्येक स्तर पर सैन्यशिक्षा अनिवार्य है | जहाँ सक्षम शिक्षार्थी को निर्धारित समय के लिये वहाँ की सेना में सेवारत् रहना होता है |
     अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सन् 2001-02 के स्मरण शक्ति प्रशिक्षण के "पीसा" प्रोग्राम में भारत 73 देशों में 72 वें स्तर पर आया था | तब से लेकर बाद के चक्रों में भाग लेने से भारत पीछे हट गया और अब तक सामिल नहीं हुआ | भारत में प्रगति एवं विकास का समान लाभ तभी सभी को सम्भव है जब सभी को श्रेष्ठ गुणवत्तायुक्त सर्वसुलभ समान संस्कारित शिक्षा व सर्वोच्च प्रबंधन उपरोक्त प्रकार से प्राप्त हो |भारत में जिन्हें यह जिम्मेदारी प्राप्त है वे सिर्फ शब्दों से खेलते रहे और प्रगति व विकास के नाम पर आंकड़े परोसते रहे | उन्होने न तो अपनी जिम्मेदारी निभाई बल्कि संस्कारों एवं शिक्षा की शाख ही तिरोहित कर दी | अच्छे संस्कार एवं शिक्षा ही राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक परिवर्तन का आधार है | एक सफल व्यक्ति की तुलना में अच्छे व्यक्ति की उपलब्धि काफी समय तक स्मृति में रहती है |
     अत:, भारत के मा. सर्वोच्च न्यायालय के, केन्द्र एवं सभी राज्यों के संस्कृति एवं शिक्षा के मानव विकास संसाधन मंत्रालयों को एवं देश की केन्द्र सरकार व समस्त राज्यों की सरकारों को भारत को आश्चर्यजनक सभ्य विकासशील राष्ट्र बनाने के लिये उपरोक्त कदम उठाने चाहिये | इस प्रकार हम अपने राष्ट्र के अंधकार को प्रकाशित कर सकते हैं और दीपावली के इस महापर्व पर एक दीपक उन महिलाओं के नाम जो जैण्डर जस्टिस पाने के लिये शहीद हो गयीं और शेष दीपक उन महिलाओं के नाम जो जैंडर जस्टिस पाने के लिये जैंडर अनजस्टिस का डटकर मुकाबला कर रहीं हैं|

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम






Sunday, October 23, 2016

मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार कब तक. ......?





जैण्डर जस्टिस  : एक देश एक कानून 

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प्रगतिशील लोगों का तर्क है कि जब अन्य धर्मों की महिलाओं के जैण्डर जस्टिस के लिये तमाम संवैधानिक नियम,अधिनियम एवं कानून बनाये गये है तो मुस्लिम महिलाओं को इनसे महरूम क्यों रखा जा रहा है ? सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता को लेकर देश में गर्मीगर्म बहस का दौर जारी है | हिन्दुस्तानी जहालती उलेमा तीन तलाक एवं बहुविवाह के विरोधी क्यों नहीं हैं| क्या वे भारत में इस्लाम के पूर्व के अरबों के जहालत युग को कायम रखना चाहते हैं ? इस युग में जैसे वर्तमान में भारत में भी मुस्लिम बालकों की बाल्यावस्था में  मुसलमानी खतना के द्वारा उनकी मुस्लिम पहिचान बना दी जाती है | उसी प्रकार अरब में जहालत युग में मुस्लिम बालिकाओं की बाल्यावस्था में इसी प्रकार सुन्नत प्रथा द्वारा उनकी मुस्लिम होने की पहिचान बना दी जाती थी | इस प्रक्रिया से अक्सर बालिकाओं की मृत्यु हो जाया करती थी | इस प्रकार की महिलाओं से संतानोत्पत्ति सम्भव नहीं थी परन्तु फिर भी उनसे निकाह किया जाता था | तीन तलाक के द्वारा विवाह सम्बंध विच्छेद हो जाता था और महिला को अपने ही घर में परपुरूष के साथ निकाह करना होता था और तीन माह तक इद्दत काल पूरा करना होता था और इसके बाद उस पीड़ित महिला को उस परपुरूष को तलाक देना होता था और फिर उस महिला को अपने पूर्व पति से निकाह करना होता था और फिर यह पति भी उस पीड़ित महिला को तलाक देकर अपने से हमेशा के लिये दूर करने वास्ते यूज एण्ड़ थ्रो कर देता था और संतानोत्पति के लिये मानव तस्करी के द्वारा बाहरी देशों से बालिकाओं एवं महिलाओं की प्राप्ति करता था | इस प्रकार अरब में इस्लाम के पूर्व यह जहालत का युग जारी था |
       तत्कालीन इस प्रथा से पीड़ित महिलाओं की आवाज पर ही इस तीन तलाक एवं बहुविवाह के विरोधी पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब थे | इस्लामी न्याय शास्त्र में कानून या नैतिक सिद्धांत का आधार केवल कुरान एवं सुन्नत या हदीस-ए-नववी है जो पैगम्बर साहब के कथनी एवं करनी है | इसके बाद इजमा तथा कयास यानि आम सहमति एवं विवेक का प्रयोग है जो देश काल की जरूरतों के अनुसार नियम रचना के सिद्धांत के तौर पर स्वीकृत है |
      मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की पुस्तक मजमूमा कवानीन इस्लमी, पृष्ठ १३७ में यह स्वीकार्य है कि "तलाक विद्दत एवं ममनू" यानि धार्मिक विकृति और निषिद्ध है |
      आज के तरक्कीनुमा जमाने में मुस्लिम महिलाओं की बदतर स्थिति के लिये जिम्मेदार हिन्दुस्तान के उलैमा हैं जो रहनुमा बनकर तलवार लिये खड़े हैं और जिनका निशाना उनकी हीं अपनी मुस्लिम महिलायें हैं | ऐसा प्रतीत होता है कि यह लोग हिन्दुस्तान में भी वही पुराना अरबों का जहालत युग कायम रखना चाहते हैं | ये लोग मुस्लिम महिलाओं को कम अक्ल का कहते हैं और मा.सर्वोच्च न्यायालय में इसे सिद्ध करने के लिये
पहुंच जाते हैं |
     इस्लाम का इतिहास बदलाव पर टिका है| शरियत के कानून सन् 632 से ही बदलते चले आ रहे हैं | कानून समाज की जरूरत के हिसाब से बनाया जाता है न कि कानून के हिसाब से समाज गढ़ा जाता है |
          अरब में तीन तलाक एवं बहु विवाह की प्रथा इसलिये समाप्त हुई जब सम्बंधित देशों ने मानव तस्करी को प्रतिबंधित कर दिया और इस वास्ते कानून सख्त कर दिये | जब तत्कालीन अरब के लोगों को तस्करी के द्वारा प्राप्त होने वालीं बालिकायें एवं महिलायें प्राप्त होनी बन्द हो गयीं | वर्तमान में अभी भी भारत से बालिकाओं एवं महिलाओं की मानव तस्करी पूरी तरह से उन्मूलित नही हो पायी है |अरब एवं कुछ पश्चिमी मुस्लिम देशों में अभी भी सम्बंधित लोगों को बालिकायें एवं महिलायें तथा बालक एवं पुरूष मानव तस्करी के द्वारा प्राप्त होते हैं जिनका उत्पीड़न किसी से छिपा नहीं है |
       भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 के अनुसार भारत के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं जिसके तहत धर्म,जाति ,समुदाय, लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता | सभी को समान अधिकार सुनिश्चित करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है| अनुच्छेद 19 के अनुसार जीवन जीना और आजादी से जीना मूल मानवाधिकार है | अनुच्छेद 25 के अनुसार लोक व्यवस्था, सदाचार, स्वास्थ्य तथा अन्य मूल्य अधिकारों के उपबंधों के तहत सभी को अंत:करण की स्वतंत्रता व धर्मपालन का एवं आचरण व प्रचार का समान अधिकार है | अनुच्छेद 44 जैण्डर जस्टिस का है |वर्तमान में भारत में तीन तलाक एवं बहुविवाह का टकराव स्त्री अधिकार व पुरूष प्रधान सत्ता की विचारधारा का है |
        यह टकराव भारत के समस्त कानूनों में मौजूद है | भारत के समस्त कानूनों में भारतीय नागरिकों के विवाह,जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के अधिनियमों के तहत संचालित सर्वोच्च न्यायिक दस्तावेजी साक्ष्य अभिलेखानुसार पंजीकृत वैधानिक, बीमाकृत संवैधानिक व लाईसैंसीकृत कानूनी सर्वोच्च न्यायिक रूप से विवाहित, जन्में एवं मृतक स्त्री, पुरूष एवं किन्नर भारतीय नागरिक व्यक्ति की समदर्शी, पारदर्शी सर्वोच्च न्यायिक स्पष्ट परिभाषा ही दर्ज नहीं है और इन अधिनियमों का उल्लंघन भारत के समस्त कानूनों में अक्षम्य अपराध भी दर्ज नहीं है | इससे बड़ा जैण्डर अनजस्टिस और क्या हो सकता है | जीवन की टैक्सचोरी व इस कालेधन की जमाखोरी  यही सर्वोच्च अन्याय देश में व्याप्त समस्त प्रकार के अशिक्षा, अपराधीकरण एवं बेरोजगारीकरण का मूलकारण है और यही जैण्डर अनजस्टिस बालिकाओं एवं महिलाओं के विरूद्ध होते चले आ रहे अपराधों एवं अन्याय का मूल कारण है जो भारतीय जनजीवन के विकास में सबसे बड़ी बाधा है |
      अत: भारत के केन्द्रीय विधि आयोग को उपरोक्त तथ्यों को एवं जैण्डर जस्टिस व एक देश व एक कानून को ध्यान में रखते हुये यथाशीघ्र सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता का सृजन एवं क्रियान्वन तथा भारत के समस्त कानूनों में उक्त अधिनियमों से सम्बंधित संसोधन स्व:विवेकानुसार करवाना चाहिये |

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम

Saturday, October 22, 2016

अादर्श व्याख्यान


जस्टिस काटजू का अंतराग्नि से भरा व्याख्यान

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कानपुर आई आई टी के सांस्कृतिक महोत्सव "अंतराग्नि" में अपने व्याख्यान के दौरान मा.भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री मार्कंण्डेय काटजू ने कहा कि अंग्रेजों ने महात्मा गाँधी व जिन्ना का इस्तेमाल किया जिसके नकारात्मक परिणाम सामने आये | चीन पाकिस्तान के पीछे खड़ा है | देश के सैनिकों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है | जिन्हें आरक्षण प्राप्त है वे सभी अब समर्थवान है और महिलाओं को भी आरक्षण की जरूरत नहीं | वे भी समर्थवान है और यदि सुविधायें देनी ही हैं तो उन्हें दी जायें जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं | इस देश को अच्छी शिक्षा व अच्छे रोजगार की जरूरत है | उन्होने कहा राजनीति एक ऐसा पेशा बन गयी है कि जहाँ  धर्म व जाति के नाम से खेल होता है | लोकसभा का चुनाव लड़ने में 10करोड़ रूपैया खर्च होता है | ऐसे में तो भ्रष्टाचार होना ही है | इससे नौकरशाही भी अछूती नहीं है | देश के कानून एवं न्याय व्यवस्था से देश की व्यवस्था ही ध्वस्त हो रही है | इसे बचाने के लिये क्रांति व शस्त्र क्रान्ति की जरूरत है | हालात इतने खराब हो चुकें हैं कि इन्हें सुधारने के लिये त्याग जरूरी हो गया है | जिस तरह के हालात चल रहे हैं उससे युद्ध सम्भव है |
    अत:, उनके व्याख्यान से यह स्पष्ट है कि सन् 1949 में विश्व की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों ने चीन को शामिल नहीं करना चाहा था और भारत को शामिल करना चाहा था | इन देशों के विरोध के बावजूद भी तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू ने अपनी पुरजोर पैरवी कर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन को यह सोच कर सामिल करवा दिया था कि भारत के हिमालय का क्षेत्र चीन सुरक्षित किये रहेगा | उस चीन ने सन् 1950 में भारत के तिब्बत पर ही अपना कब्जा कर लिया व सन् 1962 में भारत पर हमला कर युद्ध में भारत को हरा दिया और अब चीन पाकिस्तान के पीछे खड़ा है जो भारत को इस परिषद में भी स्थाईरूप से ब्रिटिश, अमरीका, रूस, फ्रांस व अपने साथ भारत को अपने स्थान पर सामिल नहीं होने दे रहा और पाकिस्तान के माध्यम से भारत को असंतुलित किये हुये है |
      कानून एवं न्याय व्यवस्था की हालत यह है कि सन् 1949 से ही सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता के क्रियान्वन का मामला देश के केन्द्रीय विधि आयोग के यहाँ विचाराधीन पड़ा हुआ है | भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के अधिनियमों के अनुसार पंजीकृत वैधानिक, बीमाकृत संवैधानिक व लाईसैंसीकृत कानूनी सर्वोच्च न्यायिक रूप से विवाहित, जन्में व मृतक स्त्री,पुरूष व किन्नर भारतीय नागरिक व्यक्ति की समदर्शी, पारदर्शी एवं सर्वोच्च न्यायिक स्पष्ट परिभाषा ही देश के कानूनों में दर्ज नहीं है और न ही इन अधिनियमों का उल्लंघन अक्षम्य अपराध दर्ज है | भला ! लोगों को समदर्शी, पारदर्शी, सर्वोच्च न्यायिक, सस्ता एवं त्वरित न्याय कैसे प्राप्त हो सकता है ? इसलिये भारतीय जनजीवन शिक्षित, अपराधमुक्त, रोजगारयुक्त एवं सर्वोच्च न्याययुक्त संतुलित नहीं है |
    ऐसा प्रतीत होता है कि विश्व की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद स्वंय में एक पूर्वनिर्धारित "सप्त ऋषि मंडल" है जिसमें पाँच सदस्य के साथ कोई  छठंवा सदस्य एवं इन सब का मुखिया सांतवा सदस्य भारत सामिल होना चाहिये | ताकि यह मंडल संतुलित एवं पूरा हो सके जिससे कि दुनियां की सभी व्यवस्थायें भी संतुलित एवं पूरी हो सके और आतंकी, भ्रष्टाचारी व दुराचारी जीवन के टैक्सचोरी के कालेधन के जमाखोरों का पूर्वनियोजित धोखाधड़ी का षडयंत्र उन्मूलित हो सके और उनकी यह गंदी राजनीति समाप्त हो सके | नि:संदेह जस्टिस काटजू का व्याख्यान अंतराग्नि से भरा विचारणीय एंव सराहनीय व्याख्यान है |

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम 

Friday, October 21, 2016

सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता पर मचा है घमासान.....




सभ्यभारतीय समान नागरिक अाचार संहिता पर मचा घमासान

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विश्व में विश्वव्यापी अमीरों का विश्व व्यापार संगठन एक ऐसा विश्वव्यापी काम कर रहा है जो विश्व के प्रत्येक देश में गरीबी को मिटाने के लिये हर तरीके से गरीबों को ही मिटाने में न जाने कब से लगा हुआ है | इस संगठन की गैरअंतर्राष्ट्रीयकृत निजी स्विस बैंक है जिसकी कोओपरेटिव बैंक के नाम से शाखायें विश्व के सभी देशों में सभी जगह मौजूद हैं जिनमें सभी देशों के सभी अमीर लोग अपने जीवन के टैक्स चोरी का बकाया काला धन बहुत बड़े पैमाने पर जमा करते हैं जिससे यह संगठन अपना मिशन पूरा करता चला आ रहा है |
     चूंकि भारत गरीब व अशिक्षित किसानों एवं मजदूरों का एक कृषि व मजदूरी प्रधान देश है |भारत में भरण पोषण का कृषि किसानी एवं मजदूरी के सिवाय कोई अन्य मजबूत विकल्प नही है |भारत की मूल अर्थव्यवस्था कृषि किसानी व मजदूरी आधारित है जिसकी तथा छोटे, मध्यम एंव बड़े उद्दोगों की भी वर्तमान में बहुत दयनीय दशा है |
      भारत ने विगत हजारों वर्षों से स्वदेशी लोगों की एंव विदेशी डचों, पुर्तगालियों, यूनानियों ,मुगलों एंव ब्रिटिश के अंग्रेजों की विभाजनकारी एवं विनाशकारी,धोखाधड़ी के षड़यंत्र की बदनियति एंव बदनीति की विषमदर्शी व अपारदर्शी कानूनों के जरिये असमानता की गुलामी सही है और आजादी से लेकर अब तक भारत विगत 70 वर्षों से स्वदेशी लोगों की भी असमानता की गुलामी सहता आ रहा है |
   भारतीय संविधान में समानता का अधिकार मौजूद है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में सन् 1949 से ही सभ्य भारतीय समान नागरिक अाचारसंहिता का प्रावधान दर्ज है | सन् 1949 में ही पश्चिमी देशों ने भारत को विश्व की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सामिल होने को कहा था | परन्तु पश्चिमी देशों के विरोध के बाबजूद भी तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी ने चीन की पुरजोर पैरवी कर प्यूपिल्स रिपब्लिक ऑफ चीन को विश्व की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ब्रिटिश, अमरीका, रूस, फ्रांस के साथ सामिल करवा दिया था यह सोचकर कि चीन, भारत के हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा करेगा | परन्तु इसी चीन ने सन् 1950 में भारत के तिब्बत पर अपना कब्जा कर लिया और सन् 1962 में इसी चीन ने भारत पर हमला कर दिया और इस युद्ध में चीन से भारत हार गया | अब चीन पाकिस्तान पर हाथ रख कर भारत को असुंतलित किये हुये है |
     सन् 1949 से लेकर अब तक सभ्य भारतीय समान नागरिक आचारसंहिता का क्रियान्वन भी रूका पड़ा है और यह मामला वर्तमान में भारत के केन्द्रीय विधि आयोग के पास विचाराधीन पड़ा हुआ है | भारत के केन्द्रीय विधि आयोग ने भारत सरकार से एवं भारतीय नागरिकों से अपने कुछ सवालों का जवाब मांगा है | भारत की वर्तमान केन्द्र सरकार ने अपना जवाब बाजरिये शपथपत्र दे दिया है | इस जवाब पर भारत के कुछ मुश्लिम संगठनों के पुरूषों ने अपनी ही मुश्लिम महिलाओं को बुद्धिमत्ता में, मुस्लिम पुरूषों से कम आंका है | ऐसे मुस्लिम पुरूष, अपनी ही मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की गुलामी से स्वतंत्र, आजाद व मुक्त नहीं करना चाहते है |
       विश्व के सभी धर्मों के लोगों को यह सत्य
स्वीकारना ही होगा कि जीवविज्ञान के अनुसार महिलाओं की उत्पत्ति समसंख्यक 48 कोशिकाओं से है और पुरूषों की उत्पत्ति विषम संख्यक 47 कोशिकाओं से हैं | इसी लिये महिलायें विषम परिस्थितियों में भी सम रहती हैं और पुरूष सम परिस्थितियों में भी विषम रहते हैं | महिलाओं की भाषा समदर्शी एवं पारदर्शी न्यायिक व्यवहार की होती है और पुरूषों की भाषा विषमदर्शी,अपारदर्शी कानूनी सिद्धांत की होती है | समदर्शी एवं पारदर्शी न्यायिक व्यवहार महिलाओं के द्वारा संचालित होते हैं और विषमदर्शी एवं अपारदर्शी कानूनी सिद्धांत पुरूषों के द्वारा संचालित होते हैं | समदर्शी एवं पारदर्शी व्यवहारिक न्याय महिलाओं की व्यवहारिक भाषा से संचालित होता है तथा विषमदर्शी एवं अपारदर्शी सिद्धांतिक कानून पुरूषों की सिद्धांतिक भाषा से संचालित होता है | सभी लोगों को समदर्शी एवं पारदर्शी व्यवहारिक न्याय तभी प्राप्त हो सकता है जब सिद्धांतिक कानून भी समदर्शी एवं पारदर्शी व्यवहारिक हों | इसलिये समदर्शिता, पारदर्शिता, व्यवहारिक न्याय एवं सैद्धांतिक कानून तथा बुद्धिमत्ता के मामले में महिलायें, पुरूषों से अधिक बुद्धिमान एवं श्रेष्ठ होती हैं |
     दुनियाँ के सभी धर्मों के प्रत्येक स्त्री व पुरूष को यह सत्य भी स्वीकार करना चाहिये कि आपसी सामंजस्य बनायें रखने एवं एक दूजे का आशय समझने के लिये, एक दूजे से, एक दूजे की ही भाषा में वार्तालाप करना चाहिये |देश दुनियां की जितनी भी सभ्यतायें पुरूषों ने सृजित की हैं उनका विकास एवं  विनाश महिलाओं के सहयोग एवं असहयोग के कारण ही हुआ है |
      इस देश व दुनियाँ के प्रत्येक व्यक्ति को यह भी मालूम होना चाहिये कि जब कोई नवजात शिशु संतान अपने माँ से जन्म लेती है तो उस समय उसकी माँ के आंचलों में दूध नहीं होता उसकी भूख मिटाने, रोने से बचाने, आजीवन प्रसन्न रखने एवं जीवित रखने के लिये उस समय मौजूद उस नवजात शिशु संतान की माँ का दर्जा प्राप्त माँ जैसी यानि कर रिश्ते की या मैत्री की या संस्कृतिक सम्बंधों कि शिशुवान माँसी प्रसन्नचित्त होकर अपने आंचलों का अमृतमय दूध सबसे पहली बार पिलाती है जैसे माता देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण को यशोदा ने पिलाया था तो वह नवजात शिशु संतान सभ्यमानवीय मानवता के सृजनशील गुणमूल्यों से भर जाती है और वह जन्मजात् सदा प्रसन्नचित्त रहने वाली नेकनियति व नेकनीति की नेक व एक इंसान एवं भगवान द्वारिकाधीश श्री कृष्णचन्द्र बासुदेव जी के समान बन जाती है जिनकी नजरों में रिश्तों के तथा मैत्री के व सांस्कृतिक सम्बंधों के सभ्यमानवीय गुण मूल्य हुआ करते हैं | जिनके रहते व्यवहार एवं सिद्धांत संतुलित रहते हैं | इस प्रकार माँ के हाथों में संतानउत्पत्ति की शक्ति है परन्तु उस संतान को नेक इंसान व एक भगवान बनाने की शक्ति उसकी माँसी के हाथों में है यदि वह अपने मानक का कर्तव्य पूरा करे| जब से यह प्राविधान अवरूद्ध हुआ तब से सभी धर्मों के धर्म मानवधर्म एवं मानवता का पतन हो गया |यह कुछ और नही यह किसी षड़यंत्रकारी का पूर्वनियोजित मानवता के साथ किया गया धोखाधड़ी का षड़यंत्र है | परन्तु  जब किसी नवजात शिशु संतान को जन्मजात ही पशुओं का दूध पिलाया जाता है तो वह पशुता के गुणों से भरपूर शैतान व हैवान बन जाती है जिसकी नजरों में रिश्ते के, मैत्री के व सांस्कृतिक संम्बंधों के सभ्य मानवीय सृजनशील मानवता के गुणमूल्य नहीं होते जिनके रहते कोई भी चैन अमन से नहीं रह सकता | ऐसे ही सिर के बल उल्टे पैदा होने वाले पशुता के गुणों से भरपूर लोगों को नियंत्रित किये जाने वास्ते और उन्हें यह सीधी बात आसानी से समझायी जाने वास्ते समदर्शी एवं पारदर्शी संतुलित न्याय एवं कानून की तथा सभ्य भारतीय समान नागरिक आचार संहिता की जरूरत पड़ी | इसीलिये न्याय एवं कानून की शक्ति की देवी महिला के हाथ में न्यायतुला दी गयी |
       मानवता को पशुता में बदलने का काम किसी ऐसे धोखाधड़ी के षड़यंत्रकारी ने करवाया है जो अपने जीवन का टैक्सचोर व इस कालेधन का जमाखोर है जो अपना कालाधन देकर अपने ही जैसे धोखाधड़़ी॒ के षड़यंत्रकारियों के द्वारा अपने व अपने अमीरों के हित में तथा गरीबों के अहित में अपने ही जैसे पुरूषों को निर्वाचित, चयनित व मनोनयनित करवाकर उनके द्वारा अपने व अपने जैसों के हित में विषमदर्शी, अपारदर्शी, असंतुलित, विभाजनकारी,विनाशकारी कानून गरीबी के मिटाने के नाम पर गरीबों को ही मिटाने के लिये बनवाता रहता है| यह पूर्वनियोजित धोखाधड़ी का षड़यंत्र भारत में विगत हजारों वर्षों से अब तक जारी है|
     भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँघी जी ने इसी असमानता को मिटाने के लिये भारत की सभी निजी बैंको का राष्ट्रीयकरण करवा दिया था और वह विश्व व्यापार संगठन की निजी बैंक का भी जिसकी शाखायें विश्व के सभी देशों में चालू हैं उसका भी अंतर्राष्ट्रीयकरण कराना चाह रहीं थी जिससे कि किसी भी देश का कोई भी नागरिक किसी भी देश की किसी भी बैंक में अपने जीवन के टैक्सचोरी का कालाधन जमा न कर सके | उन्होंने भारत के सभी राजा महाराजाओं के प्रिवीपर्स समाप्त करवा दिये थे और पूर्वी पाकिस्तान को बांग्लादेश बना दिया था |ऐसा देख सम्बंधित षड़यंत्रकारी ने अपना कालाधन देकर उनके विरूद्ध भारत में राष्ट्रव्यापी आंदोलन करवा कर सत्ताहीन करवा दिया था तथा उन्हें कारावास करवा दिया था| जब वह पुन: देश की प्रधानमंत्री बनी तो उन्हीं के अंगरक्षकों को कालाधन देकर उन्हीं के द्वारा श्रीमती इंदिरा गाँधी जी की हत्या करवा दी थी | इस प्रकार यह काम जो उनके पिता पं.जवाहर लाल नेहरू न कर सके वह उनकी पुत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने कर के दिखा दिया था और उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि महिलायें बुद्धिमत्ता में पुरूषों से कम नहीं है |
     अत: भारत के केन्द्रीय विधि आयोग को चाहिये कि वह सम्बंधित षड़यंत्रकारियों के षड़यंत्र को दरकिनार करते हुये सभ्यभारतीय समान नागरिक आचार संहिता में तथा देश के सभी कानूनों में भारतीय संविधान में दिये समानता के अधिकार के तहत भारतीय नागरिकों के विवाह,जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण एवं लाईसैंसीकरण के अधिनियमों का अनुपालन अनिवार्य एवं परमावश्यक रूप से सुनिश्चित दर्ज करवायें तथा इनका उल्लंघन इस संहिता में व देश के समस्त कानूनों में अक्षम्य अपराध दर्ज करवायें तथा इन अधिनियमों का उल्लंघन गैर जमानती संज्ञेय अर्थ व मृत्यु दंडनीय अक्षम्य भारतीय अपराध दंड संहिता में व इनका सैशन ट्राईल भारतीय अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में दर्ज करवायें | जिससे कि भारत में व पूरी दुनिया में बालिकाओं व महिलाओं के विरूद्ध होने वाले सभी प्रकार के अपराध समाप्त हो सकें तथा देश व दुनियाँ में फैली अमीरी व गरीबी की असमानता तथा अन्य सम्बंधित बिषमतायें समाप्त हो सकें |देश दुनियां में जो भी अपराधीकरण एवं बेरोजगारीकरण है वह सब इन्हीं अधिनियमों के उल्लंघन के कारण है |
     इस प्रकार भारत की संकृति, समानता व शांति को स्थापित रखे जाने के लिये देश के प्रत्येक विवाहित, जन्मे व मृतक भारतीय नागरिक के द्वारा इन अधिनियमों का अनुपालन करवाया जाना भारतीय जनजीवनहित में एवं उनके सर्वोच्च न्यायहित में अनिवार्य एवं परमावश्यक है|जिससे कि वर्तमान में सभ्यभारतीय समान नागरिक आचार संहिता पर मचा घमासान समाप्त हो सके |भारत की लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था भारतीय संविधान के तहत ही संचालित होनी सुनिश्चित है |भारत की लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था किसी भी धर्मग्रंथ के अनुसार संचालित होनी सुनिश्चित नहीं क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है |

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम

Thursday, October 20, 2016

Motivation wallpaper












               


                  

                  

               






Monday, October 17, 2016

मत हो निराश......जीवन जीने का है नाम.....


आपका टैलेन्ट आपकी मेहनत ही आपका सच्चा दोस्त 

है जो आपको कभी भी धोका नही देगा....


आगें बढ़ो और बढ़े चलो....















.......धन्यवाद दोस्तों.........



निराश हों फिर भी ना करें आत्महत्या ......




ना करें आत्महत्या

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आत्महत्या करने का मन करे तो 

अच्छा साहित्य पढ़ें |


 "प्लीज मत करें आत्महत्या "


करना है तो नकारात्मक विचारों की हत्या करें...
परिस्थितियों से घबरायें नहीं

यह सख्त टीचर है आपको सही मार्गदर्शन देकर जायेगीं|हर किसी ईमानदार मेहनती और अच्छे इंसान के जीवन में एक कठिन वक्त जरूर आता है और उस वक्त में ऐसा लगता है कि चारों ओर अँधेरा है और दूर -दूर तक कोई नही है | ऐसा लगता है कि अपने भी बस हमसे स्वार्थवश ही जुड़े हैं | माता पिता भाई रिश्तेदार सिर्फ और सिर्फ तरक्की ही देखना चाहते हैं | वह हमेसा तुलना करते हैं कि उसकी सरकारी नौकरी लग गयी वो सैटल हो गया हमारी औलाद कुछ न बन सकी हमारी परवरिश में खौट रही | पता नहीं क्या पूर्वजन्म के बुरे कर्म किये होगें | लड़को से अक्सर कहा जाता कि दिन भर नेट पर लगे हो जॉब का कुछ सोचा है वो देखो अमेरिका बस गया तुम्हारा तो कुछ नही हो सकता | रिश्तेदार की फ्री की एडवाइश शादी कर दो शायद कमाने लगे | शादी के बाद बोलते कि क्या हमारे दम पर की थी, कब कमाओगे ? बहू के पाँव भी शुभ नही रे! बाबा | गल्ती खुद की बेटे की पर भड़ास बहु पर क्यों ? दोषी बहू क्यों ? हे! भगवान फिर से उठा लिया गिटार इस गाने बजाने से जिंदगी नही कटेगी कमाओ सरकारी नौकरी के लिये ट्राई करो | अब अगर ससुराल से पीड़ित बेटी घर आ जाये तो कुछ दिन बाद मां बाप कहते हैं कि हमारी बेटी की किस्मत ही खराब है |  समाज क्या कहेगा ? अब पता नही क्या होगा ? नही पुलिस के लफड़े में नहीं पड़ना बिना मतलब बदनामी | चुप बैठ कर सरकारी नौकरी की तैयारी करो |
हद हो गयी....! सरकारी नौकरी के अलावा क्या लाइफ ही बेकार है | लड़का भी रोज की किच किच से मरना चाहता | लड़की भी सोचती मर ही जाऊँ | अब माँ पापा पर बोझ क्यूँ बनूं | जिस समय बच्चों को माता पिता के प्रेम और साथ की सबसे ज्यादा जरूरत होती है तब माता पिता बच्चों को वो प्यार और साथ क्यों नहीं देते और बदनसीब कह कर क्यों कोसने लगते हैं ? आखिर! माँ बाप बच्चों का सपोर्ट कब करेगें ? कब बच्चों के टैलेन्ट को सम्मान देगें ?  अरे! ससुराल में अत्याचार हुआ तो तुरन्त रिपोर्ट दर्ज करवाओ उनको सजा हो |गलत बेटी के साथ किया गया इसमें बेटी की क्या गलती ? बेटी क्यों बदनसीब ? बेटी भगवान की सबसे प्यारी कृति है वह कभी बदनसीब नहीं हो सकती | आप बेटी को प्यार दो और समझाओ कि वह नहीं हारी बुरा वक्त जल्द हारेगा | उससे कहो कि यह उसकी जिंदगी है वह अपना निर्णय ले और लाईफ में आगें बढ़े | मातापिता को चाहिये कि बच्ची को आत्मनिर्भर बनने में बैक बोन की तरह खड़े रहें | माता पिता जिसदिन अपने बच्चों के साथ खड़े हो जायेगें और उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुये उन्हें जीवनपथ पर आगें बढ़ने के लिये प्रेरित करने लगेगें और बिना किसी रिश्तेदार पड़ोसी के बच्चे से तुलना किये बगैर बच्चों का सपोर्ट करेगें  तो उस दिन सकारात्मक क्रांति होगी और कोई भी बच्चा फ्रस्टेशन से आत्महत्या के लिये कभी भी बाध्य नही हो सकेगा |हमारा देश के प्रत्येक माता-पिता से निवेदन है कि प्लीज तुलना मत कीजिये बच्चे को अतुलनीय बनाने में उसका सपोर्ट कीजिये | बच्चे को आपका प्यार, साथ, समय और सपोर्ट की बहुत आवश्यकता है | ये उसका हक है आप उसे दीजिये | जिस प्रकार एक फिल्म में एक सा ही रोल सभी को नहीं मिलता | उसी प्रकार परमात्मा की सृस्टि में सभी किसी विशेष कार्यहेतु ही भेजे गये हैं और दोस्तों! प्लीज अगर कभी भी मन में निराशा आये तो अच्छा साहित्य पढ़ें और मरने की न सोचें बल्कि अपने टैलेन्ट रूचि को पहिचाने और एक बडा वक्त उस टैलेन्ट को निखारने में लगा दें | एक दिन आपका भी आयेगा और आता ही है | प्यार में धोका मिला लड़की ने छोड़ा लड़के ने छोड़ा इसलिये दुनियां छोड़ने चले थे | तुम भी साहस करो और यादों को छोड़ो और बढ़ो जिंदगी में आगें आज जिस मोती के लिये रोते हो मरने की प्लॉनिंग करते हो क्या पता मोती की जगह तुम्हारे नसीब में परमात्मा ने हीरा लिखा हो तुम प्लेटिनम हो तुम्हें हीरा सूट करता है | अपने आत्म की सुनो और बढ़ोे आगें की सोचो निश्चित अच्छा ही होगा | जो सिर्फ तुम्हारा है वो तुम्हारे पास होगा और है | जो तुम्हारा था ही नही उसके लिये अपना समय बर्बाद मत करो | बुरा वक्त हमेसा अच्छे इंसान के जीवन में ही आता है उसे और भी अच्छा, सुन्दर, उम्दा बनाने के लिये | निराश हतास मत हो जिस कार्य में मन लगे वही कार्य और भी अच्छे तरीके से करने का प्रयत्न करो तुम्हारी सफलता निश्चित है | प्रकाश प्रतिभा और सुगंध को क्या कोई रोक पाया है | खुद पर विश्वास रखो और अपने हृदय से बोलो हाँ मैं कर सकता हूँ | जीत तुम्हारी होगी | जीवन को यस कहो , हाँ कहो | सच्चा प्रयास विफल नही जाता और प्रतिभा कभी धोका नही देती | आपका टैलेन्ट ही आपका भाग्य है | दुनिया की तरफ मत देखो यह आज तुम पर हँसेगी अगर मर गये तो पागल कहेगी और यदि जिन्दा रहे और कामयाब हुये तो यही दुनिया कल सैल्यूट भी करेगी | इसलिये उठो और स्वंय को स्वीकारो क्योंकि आप जो भी हो ईश्वर के सबसे प्रिय और अद्धितीय संतान हो और ईश्वर को कभी निराश मत करना | जीवन अमूल्य है कभी इसे नष्ट करने का प्रयास मत करना | इंसान हो इंसान बनो नित नवीन संभावनायें खोजो | इंसान वही जो जीवन का सद्प्रयोग करे | दोस्तों, जाना सभी को है पर जी कर जाओ लोगों के चेहरों पर मुस्कॉन बिखेर कर जाओ |


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम



Friday, October 14, 2016

अपराधीकरण चरम पर.....



अपराधीकरण से देश की महिला न्यायाधीश भी सुरक्षित नहीं...


भारतीय संविधान में दिये " समानता के अधिकार" के तहत मा. भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ती कुरियन जोसफ व मा. आर.एफ नरिमन ने घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम 2005 में दर्ज धारा 2(क्यू) में दर्ज "वयस्क पुरूष" वाला अंश हटाया जाने का फैसला कर आदेश भारत सरकार को महिलाओं के आदर व सम्मान को ध्यान में रखते हुये जारी किया | इस आदेश को जारी हुऐ अभी समय भी न बीता था कि देश के उ.प्र जिला जालौन उरई निवासी कानपुर नगर थाना कैंट क्षेत्र अन्तर्गत स्थित सर्किट हाउस के सरकारी आवास बी-2 में कानपुर देहात की गर्भवती महिला ज्यूडीशियल मजिसट्रेट श्री मति प्रतिभा गौतम की हिंसा उनके पति मनुअभिषेक राजन एडवोकेट ने कर शव को पंखे के हुक में टांग दिया उनके दोनों हाँथों की नसें कांट दीं | अपनी ओर से आत्महत्या की सूचना कोतवाली को दे दी | कोतवाली के लोग उनके शव को टैम्पों से कोतवाली लाये और बिना प्रपत्र दिये पोस्टमार्टम हाउस उसी टैम्पों से ले गये | पोस्टमार्टम कराने के बाद उनके शव को उसी टैम्पों से उनके परिजन उरई ले गये और वहाँ उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया | इससे बड़ी घरेलू हिंसा व महिलाओं का असंरक्षण तथा अनादर व अपमान और क्या हो सकता है ? इस प्रकार भारतीय महिलाओं चाहे वे गर्भवती ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट ही क्यों न हों ? वे व उनकी गर्भस्त संतान भी इस अपराधीकरण से सुरक्षित नही | क्या लाभ है भारत को ऐसे अधूरे और अविश्वसनीय कानूनों से किसी को पूर्व से ही न्याय प्राप्त न हो | देश के कानून इतने सख्त हों कि अपराधी अपराध करने से पहले हजार बार सोचे जिससे कि देश में इस प्रकार की हृदयविदारक घटनायें घटित न हों |


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम' 

Tuesday, October 11, 2016

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अगर भगवान श्री राम हो तो ही रावण पर तीर चलाना क्योंकि उन्हें जलाया तो विभीषण ने था..प्रभु श्री राम ने नहीं .....





Monday, October 10, 2016

ऐसे मनायी हमने नवरात्री

नवरात्री के पावन पर्व पर कन्याओं को पढ़ाई के प्रोत्साहनहेतु पाठ्य सामग्री वितरित की |

'बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ'

आप सभी को हमारी व हमारे परिवार की ओर से दुर्गाष्टमी,रामनवमी व दशहरा पर्व की बहुत बहुत शुभकामनायें ।

    माँ व प्रभु का आशीर्वाद आप पर ,आपके परिवार पर,और आपके शुभचिंतकों पर बनी रहे|







सर्वोच्च न्यायालय का सराहनीय फैसला






सर्वोच्च न्यायालय का सराहनीय फैसला

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भारतीय संविधान में दिये गये "समानता के अधिकार" को ध्यान में रखते हुये तथा उम्र व लिंग का लिहाज किये बिना माननीय भारतीय  सर्वोच्च न्यायालय के मा. न्यायमूर्ती श्री कुरियन जोसेफ व माननीय न्यायमूर्ती श्री आर.एफ नरीमन महोदय ने देश की भारत सरकार को आदेशित किया है कि घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम सन् 2005 की धारा 2(क्यू) में दिया गया "वयस्क पुरूष" वाला अंश हटा दिया जाये | शीर्ष न्यायालय ने यह माना है कि घरेलू हिंसा करने में महिलाओं के ससुराल पक्ष के 16-17 साल के लोग तथा ससुराली रिश्तेदार महिलायें भी पीछे नहीं है लिहाजा उन्हें भी इस कानून के शिकंजे में लिया जाना न्याय संगत है | अब महिलाओं के ससुराल का कोई भी नावालिक एंव वालिग व्यक्ति इस कानून के शिकंजे से बच नहीं पायेगें| जो अब तक इस कानून से बचते आ रहे हैं | मा. न्यायमूर्तीगणों  ने जो यह ऐतिहासिक और सराहनीय फैसला दिया है वह इनके द्वारा समदर्शी एंव पारदर्शी विषम परिस्थितियों में अपनी ससुराल में पीड़ित महिलाओं को दिया गया उनका आदर व सम्मान है | मा.भारतीय सर्वोच्च न्यायालय को चाहिये कि वह इसी अधिनियम में व राष्ट्र के अन्य सभी कानूनों में भारतीय संविधान में दिये गये "समानता के अधिकार" के तहत भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के सर्वोच्च न्यायिक दस्तावेजी साक्ष्य अभिलेखानुसार पंजीकरण वैधानिक, बीमाकरण संवैधानिक व लाईसौंसीकृत कानूनी सर्वोच्च न्यायिक रूप से विवाहित, जन्में व मृतक स्त्री, पुरूष व किन्नर भारतीय नागरिक व्यक्ति की समदर्शी, पारदर्शी व संतुलित स्पष्ट परिभाषा भी दर्ज किये जाने का आदेश भारत सरकार को जारी करे जिससे की कोई भी बालिका एंव महिला अपने घर के अंदर, बाहर घरेलू हिंसा से अशांति रक्षित, असुरक्षित एंव असंरक्षित अर्थात् अनारक्षित न हो सके और मा.भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय को समदर्शी,पारदर्शी एंव संतुलित नेक नियत का व नेक नीति का नेक इंसान व एक भगवान का दर्जा प्राप्त हो सके और राष्ट्र का भारतीय जनजीवन अपराधमुक्त व रोजगारयुक्त हो सके जिससे कि राष्ट्र के वर्तमान के समस्त न्यायालय अनावश्यक करोड़ों मामलों के दबे बोझ से स्वतंत्र, आजाद व मुक्त हो सके और राष्ट्र की प्रत्येक बालिका एंव महिला अपने समदर्शी, पारदर्शी एंव संतुलित व्यवहारिक को आदर व सम्मान को पुन: प्राप्त कर सकें |

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'

Sunday, October 9, 2016

शुभकामनायें |


* आप सभी को महाष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें,

 माता रानी की कृपा आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहें।*








किराये की कोख



किराये की कोख

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इस देश में सभ्य मानवता का, नैतिकता का एंव चरित्रता का पूरा पतन हो चुका है | एक तरफ देश में महिलाओं की पूजा होती है, बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ तथा बेटी को आत्मनिर्भर बनाओ , महिलाओं की इज्जत आबरू बचाने की एंव उनके आत्मसम्मान को कायम रखने के बहुत बड़ी लम्बी चौड़ी बातें की जाती हैं और दूसरी तरफ इन महिलाओं के दूसरों के बच्चों को पैदा करने के लिये उन्हें व उनकी कोख को किराये पर देने के प्रावधान बनायें जाते हैं और उन्हें बच्चों को पैदा करने की यांत्रिक वस्तु समझा जाता है | क्या ऐसी महिलाओं से जन्मीं संताने इन्हें अपनी माँ कह सकेगीं ?
क्या ऐसी जन्मी संताने अपने पिता को सम्मान की दृस्टि से देखेगें ? क्या ऐसी संतानों को समाजी सम्मान प्राप्त हो सकेगा | क्या ऐसी महिलाओं को कभी समाजी सम्मान प्राप्त हो सकेगा ? क्या इस देश की महिलाओं को ऐसा बनाया जायेगा जैसा बनाया जा रहा है | क्या इसकी आड़ में मानव अंगों की तस्करी को तो अंजाम नहीं दिया जा रहा ? इससे अधिक घ्रणित महिलाओं के सम्मान के विरूद्ध अन्यायी कार्य और क्या हो सकता ? धन्य है इस देश के सत्तासीन और धन्य है हम सभी लोग जो आज धन के लालच में पूरी तरह संवेदनहीन हो चुके हैं | जिस परिवार समाज व देश में महिलाओं का आत्मसम्मान नहीं व परिवार समाज व देश स्वंय में अपराधयुक्त एंव रोजगारमुक्त और गुलाम है |


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'

कैसे रोकें मानव तस्करी






कैसें रोकें मानव तस्करी  :

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भारतीय जनजीवन की आखिर वह कौन सी कमजोरी एंव मजबूरी है जिसके तहत भारतीय जनजीवन डचों , पुर्तगालियों, यूनानियों , मुगलों एंव ब्रिटिश के अंग्रेजों का  अपराधयुक्त एंव रोजगारमुक्त गुलाम बनकर हजारों वर्षों तक पीड़ित रहा है | देश की स्वतंत्रता , आजादी व मुक्तता के बाद भारतीय जनजीवन की आखिर वह कौन सी कमजोरी व मजबूरी है जिसके तहत भारतीय जनजीवन वर्तमान में भी स्वदेशी सत्तासीनों , पूँजीपतियों एंव कानूनविदों का अपराधयुक्त एंव रोजगारमुक्त गुलाम है | भारतीय जनजीवन की आखिर ! वह कौन सी कमजोरी एंव मजबूरी है जिसके तहत भारतीय जनजीवन की बहुत बड़े पैमाने पर मानव तस्करी होती है | देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार देश से प्रतिवर्ष लगभग 42,000 लोगों की मानव तस्करी होती है | जो लोग इस गोरखधंधे को अंजाम देते हैं | उन्हें यह पता है कि वे जिन विवाहित, अविवाहित व मृतक लोगों की मानव तस्करी कर रहे हैं उनके पास अपने विवाह जन्म व मृत्यु का पंजीकरण बीमाकरण व लाईसैंसीकरण का ना तो प्रमाण पत्र व पहिचानपत्र प्राप्त है और ना ही उनकी विवाह तिथि जन्मतिथि व मृत्यु तिथि की पंजीकृत , बीमाकृत व लाईसैंसीकृत संख्या सबंधित कार्यालय के नाम पता सहित भारतीय नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के दस्ताबेजों में दर्ज है | ये लोग इन अभिलेखों एंव दस्तावेजों के अनुसार वैधानिक , संवैधानिक एंव कानूनी रूप से ना तो विवाहित है और ना ही जन्में हैं | ये तो पूर्व से ही मृतक हैं और इनको तो अपनी मृत्यु का भी प्रमाणपत्र एंव पहिचानपत्र प्राप्त नहीं है | लिहाजा इन अपराधयुक्त एंव रोजगारमुक्त दस्तावेजी लाबारिसों की मानव तस्करी करना, इनका शोषण करना व इनके महत्वपूर्ण शारीरिक मानव अंगों को जबरन निकालकर एंव बेच कर धनार्जन करना तथा इस वास्ते इनका वध एंव विनाश करना ना तो कोई वैधानिक संवैधानिक कानूनी अपराध है और ना ही कोई धार्मिक एंव कार्मिक पाप है | मानव तस्कर भारतीय जनजीवन की इसी मजबूरी व कमजोरी का भरपूर लाभ उठातें हैं | देश के माननीय भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय यदि चाह लें तो क्या भारतीय जनजीवन अपराधयुक्त व रोजगारमुक्त रह सकता है ? खेद इस बात का है कि जब से यह देश स्वतंत्र आजाद व मुक्त हुआ है तब से लेकर अब तक के किसी भी भारतीय सर्वोच्च मुख्य न्या़याधीश महोदय ने देश की केन्द्र सरकार व सभी राज्य सरकारों को यह आदेशित नहीं किया है कि भारतीय जनजीवन को अनिवार्य एंव परमावश्यकरूप से अपराधमुक्त एंव रोजगारयुक्त बनायें | अत: यदि ऐसा आदेश किया गया होता तो भारतीय जनजीवन पूरी तरह से अपराधमुक्त व रोजगारयुक्त होता | अत: देश के प्रत्येक परिवार के मुखिया को चाहिये कि वह स्वय ही अपने परिवार के प्रत्येक विवाहित जन्में व मृतक सदस्य के विवाह तिथि , जन्मतिथि व मृत्यु तिथि का अनिवार्य एंव परमावश्यकरूप से पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण करवायें एंव प्रमाणपत्र प्राप्त करके देश के नागरिकों के पहिचान के सभी प्रकार के दस्तावेजों में दर्ज करायें और अपना तीनों प्रकार का भारतीय जनजीवन वैधानिक, संवैधानिक व कानूनी रूप से दस्तावेजी लावारिस होने से बचायें | इस प्रकार देश का प्रत्येक नागरिक अपनी इच्क्षा व योग्यतानुसार बिना किसी बाधा के समान सरकारी व मतकारी, अर्धसरकारी व कर्मचारी एंव निजीकारी व श्रमकारी आजीविका एंव पैंसन तथा बुनियादी सेवायें एंव सुविधायें प्राप्त कर अपना तीनों प्रकार का भारतीय जनजीवन अपराधमुक्त व रोजगारयुक्त सुखी बनायें | अपने जीवन को  मानव तस्करों से बचायें |


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'