Thursday, June 30, 2016

मैग्जीन आ रही है ...सच की दस्तक


हमारी मैग्जीन सच की दस्तक का कवर पेज

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 धन्यवाद.....





हाल ही में प्रकाशित हुऐ समाचार पत्रों में लेख



   प्रकाशित लेख

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http://www.shramjeevijournalist.com/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%AF/active-in-the-country-all-district-employment-office/











                 

 


Thursday, June 23, 2016

रूलाती बेरोजगारी :







सक्रिय हों देश के सभी जिला रोजगार कार्यालय 

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दोस्तों बहुत बुरा लगता है यह सुनकर कि एम.एस.सी पास लड़की बेरोजगारी और शोषण के कारण घर में बैठी सिलाई करके अपना परिवार का पेट पाल रही | एम.बी.ए किये बेरोजगार गांव में मिस्त्री बनकर दिन का पांच सौ कमा रहे हैं और बीएड बेरोजगार जिन्हें समय पर जॉब ना मिल पाने के कारण और ओवर ऐज हो जाने के कारण ईट -भट्टे पर धूप में लेवरी करने पर विवश हैं कि मंहगाई इतनी ज्यादा है तो क्या करें गरीब का सारा पैसा पढाई और ट्यूशन - कोचिंग में गया और दुर्भाग्यवश नौकरी भी नही मिली तो पेट और परिवार के लिये जो दिख रहा वो कर रहा बेरोजगार | आज विश्व में वैश्विक रिपोर्ट यूएन के मुताबिक, विश्व में कुल 20 करोड़ बेरोजगार युवा हैं और भारत में देश की कुल आबादी के लगभग 11 फीसदी यानि 12 करोड़ बेरोजगार हैं जोकि दिन-रात नौकरियां ढूंढ़ने में व्यस्त हैं | भारत में 15-59 आयु वर्ग के मात्र 21.2 फीसदी लोग ही हैं जो वेतन पर काम करते हैं | जबकि श्रम मंत्रालय की श्रम ब्यूरो द्वारा जारी ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के आंकड़े यह बताते हैं कि बीते वित्त वर्ष में राष्ट्र स्तर पर बेरोजगार की दर बढ़कर 4.9 % पर पहुंच गयी थी जो 2012-13 में 4.7 % थी | वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 2013-14 से घटकर 5.5 %  पर आ गयी जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 5.7% आंकी गयी | जिसमें पुरुषों की बेरोजगारी की दर 2013-14 में बढ़कर 4.1 % पहुंच गयी जोकि 2012-13 में 4 % थी | वहीं महिलाओं में बेरोजगारी की दर बढकर 7.7% पहुंच गयी जोकि 2012-13 में 7.2 % थी | शहरों में महिलाओं के बीच बेरोजगारी की दर घटकर 12.4 % पर आ गयी जोकि 2012-13 में 12.8 % थी | सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इनमें पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या सबसे अधिक है और बेरोजगारों में 25 % 20 - 24 आयुवर्ग के हैं, जबकि 25 - 29 वर्ष की उम्र वाले युवकों की संख्या 17 % है | 20 वर्ष से ज्यादा उम्र के 14.30 करोड़ युवाओं को नौकरी के लिये सिर पीट रहें हैं | इस साल बेरोजगारी दर 3.8 % होने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जो पिछले साल 3.7% थी | यह हालात देखकर बस यही शब्द लिखने को विवश हूँ कि बेरोजगार की आंख का आंसू देश के भावी, भयावह हालात का आईना है | अब भी ना नींदें टूटी तो इस आंसू को सुनामी बनने से कोई रोक नहीं पायेगा | जिसमें फिर भारी जन- धन हानि तय है | आज ना जाने कितने ही बेरोजगार अपराध की काली दुनिया में कदम रख चुके हैं जिसके परिणाम ना जाने कितने बेकसूर लोग रोज भुगत रहे हैं | जैसे कि आप रोज ही सुनते होगे कि महिलाओं की गले से चैन खिंच रहीं हैं और पुरूषों के जेब कट रही है| अब हालात बेकाबू हों जायें उससे पहले सरकार को इस ओर गम्भीरता दिखानी होगी और पुराने बंद पड़े कारखाने, मिलें, लघु और कुटीर उद्दोग पुन: संचालित करने होगें और नवीन कारखाने लगाने होगें | जिससे कि कोई भी बेरोजगार व्यक्ति आतंक, भ्रष्टाचार, दुराचार एंव अन्याय करने को विवश न हो | प्रत्येक व्यक्ति शांति और खुशी चाहता है पर वो मजबूरीवश पाप करने को विवश होता है जिससे उसका पूरा जीवन खराब हो जाता है जोकि देश की किसी भी जेल में अपराधियों की बड़ी संख्या से लगाया जा सकता है | देश की प्रतिभायें बेरोजगारी और उपेक्षा के कारण परदेश पलायन कर रहीं हैं जोकि विकसित भारत निर्माण के सपने के लिये बहुत चिंता का विषय है | हम सभी प्रदेशों की सरकारों से यही निवेदन करते हैं कि वह इस ओर गम्भीरता से सोचें और ध्यान ने कि देश के सभी जिला रोजगार कार्यालय जो निस्क्रिय पड़े हैं उनको सक्रिय किया जाये | जिससे जिला रोजगार कार्यालयों से जारी हों सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी एंव निजीकारी नौकरियाँ | जिससे कि जिला स्तर के बेरोजगार लोगों को इन नौकरियों के बारे में सूचना प्राप्त हों और वे इन कार्यालयों के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर सकें और देश के विकाश के स्वर्णिम रथ को बहुत आगें ले जा सके और भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी के सुनहरे सपने को साकार कर सके |

( हमारा सुझाव :   प्रशिक्षण के बाद निरस्त हो जोड़ा गया अतिरिक्त परीक्षण जो प्ररिक्षणार्थी को बेरोजगार बनाने के लिये कमजोर एंव मजबूर करता है )


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर समाज और हम
स्क्रिप्ट राईटर, फिल्म डाईरेक्टर
राष्ट्रीय युवा सचिव अ.भा.का.महासभा
विशेष संवादाता अमजा न्यूज पोर्टल, वाराणसी
















Tuesday, June 14, 2016

आज के समाचारपत्रों में प्रकाशित हमारे लेख |

          ़़़़ रक्तदाता दिवस पर                                   प्रकाशित लेख ़़़

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Monday, June 13, 2016

रक्तदाता दिवस 14 जून पर विशेष :




                  रक्तदाता दिवस

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विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून)
पर विशेष :
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स्वेच्क्षा से करो रक्त दान 
जीवन बचाओ करो नेक काम

14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस है आप जानते ही होगें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए 14 जून को ही विश्व रक्तदाता दिवस के तौर पर क्यों चुना ! दरअसल कार्ल लेण्डस्टाइनर (जन्म- 14 जून /1868- मृत्यु-26 जून 1943) नामक अपने समय के विख्यात ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और भौतिकीविद् की याद में उनके जन्मदिन के अवसर पर यह दिन तय किया गया है इन्होंने रक्त में अग्गुल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्त का अलग अलग रक्त समूहों - ए, बी, ओ में वर्गीकरण करके चिकित्साविज्ञान में मानवताहित में लोककल्याणहेतु अपना अहम योगदान दिया और इसी दिन विश्वभर में लोग स्वेच्क्षा से रक्तदान करते हैं पर जिस हिसाब से करना चाहिये उस हिसाब से आज भी लोग स्वेच्छित रक्तदान करने से हिचकिचाते हैं पर यह सोच उनकी तब बदल जाती है जब कोई उनका रक्त की कमी से जूझ रहा होता है | आज भी देश का रक्तदाता उतना जागरूक नहीं हो पाया है जितना सही मायनों में होना  आवश्यक है | हम लोग की विकृत मानसिकता के कारण आज भी भारत में हर साल 15 लाख लोगों की रक्त की कमी के कारण मौत हो जाती है और कई दुर्घटनाओं में रक्त की समय पर आपूर्ति न होने के कारण अकाल काल के गाल में समा जाते हैं जो बहुत ही दुखद बात है | हम इतने भी मॉर्डन और हाई-फाई न हो जायें कि दया जैसा सद्गुण हमसे दूर हो जाये |दोस्तों विकास पैसे की अमीरी को ही नही कहते विकास तो मदद के भाव की ऊंचाई को कहते हैं | दोस्तों हम इंसान क्या इतने कमजोर हो गये हैं कि आज इंसान को ही इंसान को रक्त खरीदना पड़ रहा | दोस्तों आज भी स्वेच्छा से रक्तदान के आकड़े संतोषजनक नहीं है जो बहुत ही गम्भीर बात है | अपने देश में विकास की हालत का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक देश में एक भी केंद्रीयकृत रक्त बैंक की स्थापना नहीं हो सकी है जिसके माध्यम से पूरे देश में कहीं पर भी खून की जरूरत को पूरा किया जा सके | रक्तदान में सबसे बड़ा पेच है रक्त का व्यापार | सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि देश-दुनिया में सर्वप्रथम रक्त का ये व्यापार बन्द हो | हर साल 14 जून को 'रक्तदाता दिवस' मनाया जाता है जिसका 1997 में यही लक्ष्य रखा गया था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को ही बढ़ावा देगें  जिससे कि रक्त की जरूरत पड़ने किसी भी दुखी और पीड़ित व्यक्ति को उसके लिए पैसे देने की जरूरत न पड़े पर अब तक लगभग 49 देशों ने ही इस पर अमल किया है। तंजानिया जैसे देश में 80 प्रतिशत रक्तदाता पैसे नहीं लेते, कई देशों जिनमें भारत भी शामिल है, रक्तदाता पैसे लेता है यह बहुत ही शर्मनाक बात है | हम धन में बढ़ गये पर ईमान से इतने गिर गये | हमारा देश का डीएनए तो दाता था फिर यह मानसिकता में बदलाव क्यों | दोस्तों  रक्तदान करने वाले राज्यों की सूची में म.प्र. की में रक्त दान प्रतिशत की बात करें तो वर्ष 2006 में 56.2 प्रतिशत, वर्ष 2007 में 65.17 प्रतिशत, वर्ष 2008 में 68.75 प्रतिशत के लगभग रहा और हरियाणा की स्थति में इजाफा हुआ जिसमें अब तक के सर्वाधिक 210 यूनिट का रिकॉर्ड 256 के साथ  तोड़ दिया जो कि काबिले तारीफ है | केवल चूरू का यह आंकड़ा 80 प्रतिशत तक का है। यूथ वर्ग अपनी मर्जी से रक्त दान कर रहे हैं | 2005 में 266, 2006 में 171, 2007 में 216 और 2008 में 370 यूनिट रक्त विभिन्न शिविरों के माध्यम संग्रहित किया गया था। चुरू में तो 2015 में ही सात हजार 219 रक्तदाता ने रक्तदान किया | बाकि सब पिछड़े हैं | भारतवर्ष की कुल आबादी की एक प्रतिशत जनसंख्या भी रक्तदान नहीं करती | रक्त दान के मामले में थाईलैण्ड में 95 फीसदी, इण्डोनेशिया में 77 फीसदी और बर्मा में 60 फीसदी हिस्सा रक्तदान से पूरा होता है। भारत में  मात्र  46 लाख लोग स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं। इनमें महिलाएं मात्र 06 से 10 प्रतिशत हैं। दोस्तों यह है रक्त दान के आकंडे | आज भी हमारे देश के बड़े शहरों में ब्लड बैंक हैं पर छोटे शहरों, जिलों में ब्लड बैंक नहीं हैं और गांवों की स्थिति तो और भी खराब हैं जहां का हर पीड़ित अच्छे डाक्टर और सही इलाज की बस शदियों से बांट जौह रहे हैं पर गांव का गरीब आज भी झोलाझाप डॉक्टर के भरोसे है जो बहुत गम्भीर और दुखद पहलू है | जागरूकता के लिये पहल दोस्तों हमें और आप को ही करनी होगी तभी कुछ सुधार हो सकेगा | विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट कहती है कि यदि देश में 5 प्रतिशत लोग स्वेच्छित रक्तदान करें तो काफी हद तक रक्त की पूर्ति हो सम्भव हो सकती है | दोस्तों चूंकि मौका है रक्तदाता दिवस तो रक्त दाता के रूप में हम  हैदराबाद के फैमस समाजशास्त्री श्री योगेश राज श्रीवास्तव जी का नाम कैसे भूल सकते हैं जिन्होंने 112 बार रक्तदान किया और यहाँ तक कि अपने शरीर के 9 महत्वपूर्ण अंगों का भी दान कर अपना पूरा जीवन लोकहित के नाम कर दिया जिनपर एक डाक्यूमेन्ट्री फिल्म भी आयी "रक्त प्रदाता जीवनदाता" जिसके प्रोड्यूसर श्री अमृत सिन्हा जी और डाईरेक्टर आनंद दास गुप्ता जी तथा ऐसोसिऐट डाईरेक्टर आकांक्षा सक्सेना | इस आदर्श फिल्म को सबसे पहले रिलीज बीजेपी के सांसद राज्यसभा सदस्य आदरणीय आर.के.सिन्हा जी ने किया और रक्तदान कैम्प की अगुहाई भी की और देश की सबसे बड़ी शख्शियत श्री लालबहादुर शास्त्री जी की पुत्र बधु आदरणीय नीरा शास्त्री जी ने भी इस फिल्म की तारीफ की और रक्तदान सभा में आकर सभी का हौंसला बढ़ाया | अगर ऐसे ही देश के उच्चपदाशीन नेता और मंत्री लोग इसी तरह से रक्तदान कैम्प में आकर सभी का उत्साहबर्धन करें तो निश्चित ही देश में रक्त दान के प्रति लोगों की सोच सुधरे और अगर देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को यह फिल्म दिखाई जाये और अगर देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी जनता में यह संदेश दें कि रक्तदान करने से कोई खतरा नहीं बल्कि यह शरीर को रोगमुक्त रखता है तो प्रधानमंत्री जी की बात का समाज में गहरा असर होगा | क्योंकि रक्तदान के प्रति जागरूकता प्रचार और प्रसार से ही लायी जा सकती है जो आज बहुत जरूरी है जिससे समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और लोगों की सोच सकारात्मक होगी |क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी क़रीब 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज़ दम तोड़ देते हैं। भारत की आबादी भले ही सवा अरब पहुंच गयी हो पर रक्तदाताओं का आंकड़ा कुल आबादी का एक प्रतिशत भी नहीं पहुंच पाया जो बहुत दुखद है | अत: यह पहल हम और आपको ही करनी होगी क्योंकि असमय दुर्धटना और बीमारी का शिकार कोई भी हो सकता है और उसी समय मदद मिल सके| किसी का जीवन बच सके इसकी शुरूवात की रेखा हम और आपके सोच के केन्द्र से ही जाती है | आज भी बहुत ऐसे नेक लोग मौजूद हैं समाज में जो रक्तदान की विश्व व्यापी मुहिम चला रहें हैं और जिसको भी रक्त की आवश्यकता है उसको रक्त मुहैया कराते हैं |ऐसी ही नोयड़ा की कुशल डाक्टर और महान समाज सेविका आदरणीय रेनू वर्मा जी हैं जो वोल्युन्टियर ब्लड डोनर नाम का ग्रुप बनाकर हर रक्तपीडित की निशुल्क मदद कर रही हैं जो हमारे समाज के लिये आदर्श डाक्टर है जिनके जागरूकता अभियान ने अभी 29 मई में नोयड़ा में लगे कैम्प में करीब 220 लोगों  ने रक्त दान किया और अभी भी संजय श्रीवास्तव नाटी जैसे तमाम यूथ, सोसल वर्कर उनके साथ है और वह 24 घण्टे समाज के लिये कार्य कर रही हैं | तो आइये हम सब भी नुक्कड़ नाटक के जरिये, बस में ट्रेन में , सोसल साईट्स पर लोगों को जागरूक करें कि रक्त दान से कोई कमजोरी नहीं आती बल्कि रक्त दान करने वाला सदा निरोगी रहता है उसे हृ्दय की कभी कोई बीमारी नहीं होती कभी भी कैंसर नही हो सकता | रक्तदान करने से आयरन का लेवल कम हो जाता है और कैंसर का खतरा 95 प्रतिशत कम हो जाता है। एक सामान्य मनुष्य में पांच से छह लीटर रक्त होता है। रक्तदान के दौरान मात्र 300 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है। शरीर इस रक्त की आपूर्ति मात्र 24 से 48 घंटे में कर लेता है। दोस्तों प्रत्येक मनुष्य के शरीर में उसके वजन का सात प्रतिशत रक्त होता है। आधा लीटर रक्त तीन जिंदगियाँ बचा सकता है।
दोस्तों यही जागरूकता हम सब मिलकर अपने दोस्तों और समाज में अपने-अपने तरीके से सभी तक पहुंचा सकते हैं | आपका एक मेसेज, एक सही कदम समाज में क्रांति ला सकता है एक बड़ा बदलाव ला सकता है जो किसी का जीवन बचा सकता है | दोस्तों आपके द्वारा की गयी चर्चा से किसी का जीवन बच सकेगा क्योंकि किसी के जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण और कुछ भी नहीं हो सकता |

रक्तदान की करें हम चर्चा
मन से दूर हों सब आशंका

आईये करें हम रक्तदान
जीवन सुन्दर बने महान




आकांक्षा सक्सेना
स्क्रिप्ट राईटर,
फिल्म डाईरेक्टर,पत्रकार
ब्लॉगर 'समाज और हम'
राष्ट्रीय युवा सचिव कायस्थ महासभा

Saturday, June 11, 2016

film certificate...


Certificate

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Rakt Pradata Jivan Data film link
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https://youtu.be/AxT4Lw-LUEs

A Saul That Beats film link
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https://youtu.be/ClItEiGgp9M












             




Thursday, June 2, 2016

टूटे परिवार बिखरे रिश्ते....







 

टूटे परिवार बिखरे रिश्ते

        (मिश्रण)

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देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जो देश की विघटन एंव विनाश की
बदनियति व बदनीति का शिकार नहीं |

देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जिसे देश की संघटन एंव विकास की
नेकनियति व नेकनीति का इंतजार नहीं|

देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जो सभी का साथ व सभी का विकास
के लिये तैयार नहीं |

भारतीय परिवारों का परिवार,
राष्ट्रीय स्वंयसेवक परिवार है,
जिसे पंजीकृत, बीमाकृत व लाईसैंसीकृत
किया जाना देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व कानूनमंत्री के द्वारा भारतीय जनजीवनहित में परमावश्यक एंव अनिवार्य है |


यह भारतीय नागरिकों के जन्म, विवाह व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के मुख्य रजिस्ट्रार का संघपरिवार है |


यह देश के संघ परिवार न्यायालय के
सर्वोच्य मुख्य न्यायाधीश का संघ परिवार है |


यह प्रगृति के न्याय की, संघटन एंव विकास की संघ परिवार न्याय पालिका की संघात्मक कार्यप्रणाली के संचालक का संघ परिवार है |


यह ब्रह्मा विष्णु महेष शेष दिनेश, कार्तिकेश के पूर्वजन्मी पिता गणेश जी श्री चित्रगुप्त जी का संघ परिवार है |


यह संघ परिवार के मुखिया नेता जी श्री सुभाष चन्द्र बोस का संघ परिवार है |


देश का ऐसा कोई परिवार नहीं,
जो प्रगृति के न्याय की संगठन एंव विकास की संघ न्यायपालिका की संघात्मक कार्य प्रणाली को अपनाने को तैयार नहीं |


क्यों टूटे परिवार क्यों बिखरे रिश्ते,
देश के सभी परिवार समझते |


कब पंजीकृत, बीमाकृत व लाईसैंसीकृत होता यह संघ परिवार है,
देश के युवाओं को बस इसी का इंतजार है |


देश के सभी सत्तासीनों को निज बदनियति व बदनीति की करनी
अब स्वंय ही सफाई है,
यह कुछ और नहीं सिर्फ देश के
संगठन एंव विकास के लिये
व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई है |


आजादी से लेकर अब तक सत्तासीनों ने की जमकर काली कमायी है,
जिनके सिर पर मुखर्जी आगे मोदी कुआँ और पीछे गौड़ा खाई है |


कुछ लोग समझते हैं कि नेता जी
अब नहीं रहे, सच तो यह कि अन्यायी परिवारिक जीवन जीने वालों के
अब अच्छे दिन नहीं रहे |


देश के युवाओं ने की कड़ी पढ़ाई है,
उन्होंने ही इस देश की दुनिया में साख बढ़ाई है | बाद बाकियों ने इस देश की बस लुटिया ही डुबाई है |


जिनकी नजरों में नैतिक मूल्य नहीं,
उनके लिये ना कोई बहन और न ही कोई भाई है, ऐसे ही लोगों ने परिवारों में व रिश्तों में नफरत की आग लगाई है |




स्वलिखित रचना

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'


............धन्यवाद........



Wednesday, June 1, 2016

सम्मान समारोह





भारतवर्ष की सबसे लोकप्रिय और सौम्य प्रधानमंत्री माननीय लाल बहादुर शास्त्री जी की पुत्रवधु चित्रांशी आदरणीय नीरा शास्त्री जी भाजपा की वरिष्ठ नेता भूतपूर्व उपाध्यक्ष,भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारणी की पूर्व सदस्य हैं |



देश के सबसे सोम्य व्यक्तित्व के मालिक और महान समाजसेवी बिहार के रहने वाले भाजपा से राज्यसभा सांसद और कायस्थ रत्न आदरणीय श्री आर.के.सिन्हा जी |


़.............. कोटि-कोटि प्रणाम  .................़



            




रक्त प्रदाता जीवन दाता फिल्म रिलीज और विश्वप्रसिद्ध कायस्थ संगठन संगत पंगत की तरफ से आयोजित रक्त दान कैम्प की बड़ी सफलता पूरे 220 लोगों ने किया रक्त दान :


रक्त प्रदाता जीवन दाता फिल्म जो हैदराबाद के महान डाक्टर और समाज सेवक और अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के तेलागंना राज्य के अध्यक्ष जिन्होंने 112 बार रक्त दान कर लोककल्याण की एक परिभाषा बन चुके आदरणीय श्री योगेश राज श्रीवास्तव जी के जीवन पर आधारित डाक्यूमैन्ट्री फिल्म है जिसमें हमने लेखन कार्य और डाईरेक्शन कार्य किया |इसी रक्तदान पर आधारित फिल्म को बीजेपी से राज्यसभा सदस्य और कायस्थगौरव और महानहृदय के स्वामी आदरणीय श्री आर.के.सिन्हा जी के शुभ करकमलों से कायस्थ संगठन संगत पंगत की तरफ से मानवताहितकारी कार्यक्रम रक्तदान कैम्प में यह फिल्म नोयडा में रिलीज हुई जो सभी को बहुत पसंद आयी | जिसमें फेमस फिल्म प्रोड्यूसर आदरणीय अमृत सिन्हा जी और भोपाल के युवा समाज सेवक और युवा जिलाध्यक्ष जय श्रीवास्तव भी उपस्थित थे जो बचपन से समाज के लिये अच्छा कार्य करते रहे हैं और इस महान कल्याणकारी रक्त दान कैम्प की महान संचालिका डा.रेनू वर्मा जी उपस्थित थी जिनके बारे में यह बात फैमस है कि वो समाजहित के लिये बहुत काम करती है जिनका पूरा जीवन सेवा की परिभाषा है वो कभी फोटो नहीं खिचवाती सोसल मीडिया में फेसबुक पर वो नही है व्हाटसअप पर कोई फोटो नही है उनका कहना यही है कि सेवा करती हूँ , खुद की पब्लिसिटी नही| और वहाँ अखिल भारतीय कायस्थ महा सभा के महामंत्री माननीय श्री मनीष श्रीवास्तव जी जिनको जरूरी काम से विदेश जाना था मजबूरीवश वो थोड़ी देर ही रूके और जल्दी ही चले गये  | वहाँ महान कायस्थ संगठन संगत पंगत की तरफ से प्रत्येक ब्लड डोनर यानि रक्त दान करने वाले को एक सम्मान प्रमाण पत्र भी दिया गया | और अब शाम हो चुकी थी | वहाँ पूरा पूरा जिम्मेदारी से कार्य सम्भाला आदरणीय आर.के .सिन्हा जी की पी.ए रतना दीदी, और श्री अशोक श्रीवास्तव जी , संजय श्रीवास्तव नाटी, राहुल जी ने और वहाँ श्री अशोक श्रीवास्तव जी ने हमारे कुलदेवता और न्याय के देवता श्री चित्रगुप्त जी की आरती के साथ कार्यक्रम की शुरूवात की वहाँ युवा कार्यकर्ता नीति श्रीवास्तव जी ने श्री योगेश जी की उपलब्धियों को बताया और वहाँ पर देश की सबसे बड़ी शख्शियत हमारे देश के महान प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुत्र वधु श्री मती नीरा शास्त्री जी उपस्थित रहीं, वहाँ श्री योगेश राज श्रीवास्तव जी ने साल उढाकर आदरणीय श्री आर.के.सिन्हा.जी का सम्मान किया सभा में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों की तालियों की गढ़गढ़ाहट से पूरा माहौल सम्मान की खुशबू में शराबोर हो गया | तभी मंच से बोल रहे आदरणीय अशोक श्रीवास्तव जी ने मंचाधीष आदरणीय राज्यसभा सदस्य श्री आर.के.सिन्हा जी और देेश की सबसे बड़ी शख्शियत आदरणीय श्री मती नीरा शास्त्री जी  से सर्वसहमति से आग्रह और यह निवेदन किया  कि श्री योगेश राज श्रीवास्तव जी को जिन्होंने जीवन भर रक्त दान किया यहाँ तक कि अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंग भी लोककल्याणहित में दान कर दिये ऐसे व्यक्ति को पद्मविभूषण मिलना चाहिये यह सुनकर सम्पूर्ण सभा  मण्डल तालियों से गूंज उठा |उसके बाद श्री योगेश जी ने बताया कि वो उस मंच पर है, नोयडा आये हैं तो आकांक्षा सक्सेना के कारण तो फिर हमको भी वहां बुलाया गया और हमने तो सोचा भी नहीं था कि वहाँ देश की सबसे बडी शख्शियत आदरणीय श्री मती नीरा शास्त्री जी ने हमको साल उढाकर बोला बहुत आगें जाओगी और फिर राज्यसभा सदस्य आदरणीय आर.के.सिन्हा सर ने हमको गिफ्ट देकर आशीर्वाद दिया | फिर महान समाज सेविका आदरणीय रेनू वर्मा जी ने भी सर्टीफिकेट देकर कहा हम है ना, हम सब साथ हैं | दोस्तों में बता नहीं सकती कि उस पल में निशब्द खड़ी थी जब माइक दिया कि कुछ कहना चाहती हो तो हम बस थैक्यूसोमच ही बोल पाये | दोस्तों यह हमारी लाईफ का पहला और सबसे बडा अनुभव था | जो हम देश की सच्ची शख्शियत से मिले यह हमारी लाईफ का महान गर्व का क्षंण था जिसको शब्दों में लिखना हमारे लिये बहुत मुश्किल है |
इतने सुन्दर मानवताहितकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे सभी गणमान्य अतिथियों और अपने समस्त कायस्थ भाई बहनों का हृदय से आभार प्रकट करती हूँ कि जब समाजशास्त्री आदरणीय रेनू वर्मा जी जैसे लोग कायस्थ ग्रुप वाली भावना से ऊपर उठकर मानवता के लिये किसी के जीवन को बचाने के ऐसे महान कार्यक्रम आयोजित करते हैं जिसमें संगत पंगत के 350 लोग सामिल हुये जो दूर दराज शहरों से आये हुऐ थे उनमें कुछ लोग यूट्यूब पर रक्त प्रदाता फिल्म  देख कर केरला से हम सब से मिलने आये थे और भी बहुत लोग अलग अलग प्रान्त से थे  जो समाज में अपने -अपने तरीकों से लोगों की सेवा कर रहे हैं | ऐसे सभी भले लोगों ने  इस कार्यक्रम में शिरकत कर समाज को दिखाया कि भले कार्य ही जीवन की प्राथमिकता होती है | जब महान समाज सेविका डा.रेनू वर्मा जैसी शख्शियत ऐसे लोककल्याणकारी मानवताहितकारी कार्यक्रम आयोजित करते हैं तो जो "एकता" देखने को मिलती वो सीधे -सीधे हृदय को जोड़ती है और समाज की विकृत मानसिकता को सबक देती है कि इंसान वही जो इंसान के काम आये, बस यही हमारा मूल धर्म भी है और कर्तव्य भी जो आदरणीय रेनू दीदी ने साबित किया है अब हमारे कथन में अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आदरणीय रेनू दीदी जैसी महान शख्शियत को पद्मश्री और पद्मविभषूण मिले तो क्योंकि यही है समाज के रियल हीरो जिन्हें हम अक्सर नजरंदाज करते हैं और जिन्हें हम अक्सर फिल्मों में ढ़ूढ़ते हैं जबकि वो हमारे बीच हमारे सामने ही होते हैं उन्हें देखने के लिये सच्ची दृष्टि चाहिये |
क्योंकि जैसी हमारी दृष्टि होगी वैसी ही यह सृष्टि दिखेगी |

29 मई का यादें कुछ फोटो के रूप में आप सभी के साथ सेयर कर रहीं हूँ....

(कुछ लोगों के नाम हमको पता नहीं हैं हमें क्षमा कीजियेगा इसे कृपया अन्यथा न लीजियेगा )