Monday, April 25, 2016

बाल मजदूरी / प्रवासी मजदूरी











बाल मजदूर और प्रवासी मजदूरों की बेरहम मजबूरी :

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मजदूर कहता है,"मेहनत करता हूँ साहिब मुझे मजदूर कहिये |"
आंसू कहता है,"मजदूर नहीं साहिब मुझे मजबूर कहिये |"

दोस्तों, दुनियां में एक और भारत का योग, कला, अध्यात्म और अनुसंधान के क्षेत्र में डंका बज रहा है | पूरी दुनिया आज भारत का लोहा मान गयी है वो चाहे चांद पर पानी खोजने की बात हो या लार्ड हैड्रल कोलाइड्रल महामशीन से बृह्माण्ड़ का सबसे शूक्ष्म कंण (गॉड पाॉटिकिल) की खोजने की चल रही हो | यह देख और सुन कर हमारा सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है और दूसरी तरफ जब बात हमारे उस गरीब पिछड़े तबके की आती है जो कि मजदूर के घर में सिर्फ मजदूर होने के लिये मजबूर है | जिन तक सरकारी सुविधायें नहीं पहुंचती जिनका बचपन भूख, गरीबी, बेकारी, बेबसी और जिम्मेदारियों और लालच तले हर पल रोंदा जा रहा है| जिनका बचपन पेट की आग में हर पल सुलगता रहा है | वह होटलों पर बंधुआ मजदूर बनकर झूठे बर्तन धोने को मजबूर हैं | छोटे-बड़े ढ़ाबों, बस, ट्रेन, स्टेशनों पर चाय बेचने को मजबूर है | दोस्तों पूरे बाजार में कौन सी दुकान ऐसी जहाँ पर बाल मजदूर काम न कर रहे हों और ये किस से छिपा है आज | जबकि 12 जून को प्रतिवर्ष बालमजदूर विरोध दिवस पूरे देश में मनाया जाता है | आईएलओ 2002 से हर साल इस दिन को मनाता आ रहा है | हमारे देश में इतना सख्त कानून भी है | फिर भी दोस्तों हमारे देश में 5-17 वर्ष की छोटी उम्र के 57लाख बाल मजदूर
हैं |और विश्व में यह संख्या पूरे 2.5 करोड़ पार कर रही है | एक करोड़ बाल मजदूर हैं और सबसे बड़ी दुख की बात यह है कि उसमें पचास फीसदी बच्चियाँ हैं जो बहुत शर्मनाक है | देश का कानून कहता है कि 14साल के बच्चों से जबरन श्रम करवाया तो दण्ड़नीय अपराध है पर आकंड़े बताते हैं कि देश दुनिया में 11 वर्ष के छोटे बच्चे प्रत्येक दिन पूरे 20 घण्टे बालश्रम में लगे हैं | हालत यह है कि राजधानी दिल्ली में 14 बच्चे प्रत्येक दिन गायब हो जाते हैं और दोस्तों यही बच्चे फिर बाल मजदूरी और वैश्यावृत्ती जैसी घिनौनी दुनियां में जबरन उतारे जाते हैं | यूनीसेफ कहता है 5000-7000  नेपाली बच्चे मजबूरीवश वैश्यावृत्ति लिप्त हैं | आज देश में जो भी मर्यादाहीनता दिख रही यह नेट पर गंदी सोसल साइटस का नतीजा है | जबकि देश की सरकारों को ऐसी अश्लील साईट्स पर बिल्कुल प्रतिबंध लगा देना चाहिये जो देश के सुनहरे भविष्य को असभ्य, अमर्यादित, हिसंक और पशु बनाने पर पूर्णत: अामादा हैं जिनका एकमात्र मकसक है युवाओं को भटकाना और उनका भरपूर शोषण करना | आज सब जानते है पर कोई आवाज नहीं उठती | आज फेसबुक पर लाईक और कॉमेन्ट्स तक सिमट चुके हैं हम और वास्तविकता से कोसों दूर हैं हम | आज सरकारी प्राईमरी स्कूल में खिचड़ी मुफ्त, पढ़ाई मुफ्त, वजीफा भी और गणवेश भी मुफ्त पर बच्चे नहीं आते ? शिक्षा में गुणवत्ता नहीं क्योंकि बच्चों को खिचड़ी के साथ टेक्नोलॉजी अच्छी व्यवस्था और गणवेश का रंग और ढंग आकर्षित करते हैं जो कि हालत यह है कि सरकारी स्कूलों में वॉशरूम की हालत किससे छिपी है | वहीं यह बच्चें गरीब पिछड़े मजदूर और किसान के घरों से हैं जो कि कभी आलू बीनने चले जाते, कभी ईट- भट्टे पर काम करने, धान रोपने, कभी किसी की दुकान पर मजदूरी करने क्योंकि पेट की आग उनको पढ़ने नही देती दोस्तों | आंकड़े बताते हैं कि आज आधे से ज्यादा बाल मजदूर कृषिक्षेत्र में लिप्त हैं | बाद में यही बच्चे बड़े होकर बड़ी कम्पनियों के हाँथ की कठपुतली बन जातें हैं और दूर विदेशों में खून के आंसू रोते हैं जिनको प्रवासी मजदूर कहते हैं | तमाम सोसल मीडिया पर वीडियो बताते हैं कि दूर देशों में हजारों लाखों प्रवासी मजदूर अपने देश आने के लिये तड़प रहा पर वो मजबूर हैं क्योंकि जो कम्पनियाँ ऐजेंसी उनको मोटी सैलरी का लालच देकर अपने साथ ले जाती हैं वह परायी धरती पर पांव रखते ही उन मजदूरों से उनके पासपोर्ट छींन लेती हैं और फिर उनका शारीरिक और मानसिक जबरजस्त शोषण होता है | पर उनकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं | आपको पता ही होगा कि एक तरफ तो देश को इन्हीं मजदूरों से श्रमिक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे 70 अरब डालर की बहुत बड़ी धनराशि प्राप्त होती है जोकि देश की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत करती है | पर वह मजदूर जो स्वंय इस देश की नींव हैं आज वह नींव जर्जर हालत में हैं | आखिर! इन मजदूरों की खैर ख़बर क्यूँ नहीं ली जा रही | जिस तरह माननीय मोदी जी ने यमन में फंसे 14 भारतीय को सुरक्षित निकाल लिया था | आज उसी तरह पूर्व सोवियत संघ के देश अजरबैजान में भारतीय कुशल मजदूरों को बंधक बनाया गया है |उसका एक वीडियो अजरबैजान में फंसे एक भारतीय ने जो बिहार के गोपालगंज का निवासी है, ने किसी तरह अपने परिवार में भेजा है | यह अत्यंत दुख की बात है जिन मजदूरों के कारण सरकारी खजाने तथा देश की प्रतिष्ठा में इजाफा होता है वही इजाफा प्रति महीने उनकी खैर खबर में क्यों नहीं होता | आखिर ! ये सुस्ती क्यों ? हमें तो इतना ही कहना है कि प्रवासी मजदूर देश की संतान के समान है और देश की सरकारों की ये जिम्मेदारी है कि वह एक ऐसा पैनल बनाये जो प्रति महीने उनकी कुशलक्षेम की रिपोर्ट लें जिससे वह खुद को सुरक्षित महसूस करें न कि उपेक्षित | अभी कुछ दिन पहले हमें अच्छा लगा यह देखकर कि सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट किया कि हर बच्चे को अपने सपने का पीछा करने का पूरा हक है और सपने का पीछा होने दें | अगर इसी तरह देश दुनिया की नामचीन हस्तियां अगर आगें आयें और गांव - गांव जागरूकता फैलायी जाये और पुरानी मिलें, छोटे उद्दोगों को बढ़ावा मिले और देश के कुशल कारीगरों को उचित सम्मान मिलें तो देश की प्रतिभायें दूर देशों में पलायन करने को मजबूर न हो सकें और उनका कहीं भी शोषण न हो सके | देश दुनियां की सरकारें और देश दुनिया के सभी स्वंयसेवी संगठन एक हों जायें तो निश्चित ही बदलाव की क्रांति घट जाये और देश में बालमजदूरी जैसी गम्भीर समस्या में बहुत बड़ी सफलता हाँथ लगे जिससे देश का सुनहरा भविष्य कभी कहीं अंधेरों में गुम न हो सके | आइये इस ओर हमसब मिलकर कदम बढ़ायें और विकास के नये मार्ग बनायें |
धन्यवाद मित्रों

 


ब्लॉगर (समाज और हम )
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उत्तर प्रदेश







Sunday, April 24, 2016

... ..वक्त बदलाव का....






          व्यवस्था परिवर्तन 

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भारत विश्व का केन्द्रबिन्दु है | यहाँ लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन का जो भी सिस्टम लागू होता है वह पूरे विश्व में लागू होता है | भारत की लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन की पूर्वनिर्धारित व पूर्वप्रचलित संगठन एंव विकास की यूनाइट रूल ऑफ लॉ एण्ड़ आर्डर की पंजीकृत, बीमाकृत, लाईसैंसीकृत यानि बिजीलैंसीकृत भारतीय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ परिवार न्यायपालिका की संघात्मक कार्यप्रणाली है जिसका लागू होने का आगाज देश व दुनिया के परिवारों में हो चुका है | भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व विघटन एंव विनाश का दुष्परिणाम झेल कर अब संगठन एंव विकास की ओर भागने लगा है | 15 अगस्त 1942 को भारत की स्वतंत्रता, आजादी व मुक्तता का तिंरगा सिंगापुर में फहरानेवाले, वैरिस्टर जानकीदास बोस के अंतिम पुत्र, राजर्षि स्वामी विवेकानन्द जी के हठ योगी शिष्य, आई.सी.एस. ऑफीसर, कलेक्टर, आजाद हिंद फौज के इंचीफ तथा भगवान बृह्मा जी, विष्णु जी व महेश जी के आत्मज भगवान चित्रगुप्त जी के अंतिम पुत्र भगवान राघौराम वाल्मीकि जी के परिवारी, अपने पंजीकृत, बीमाकृत व लाईलैंसीकृत यानि बिजीलैंसीकृत भारतीय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ परिवार के मुखिया व मुख्य जनप्रतिनिधि नेताजी, इस सिस्टम के भारत के राष्ट्रपिता, अपने व देश के संघ परिवारों के भारतीय नागरिकों के जन्म, विवाह व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण यानि बिजीलैंसीकरण के मुख्य रजिस्ट्रार, भारत के विशेष राष्ट्रीय अखण्ड़ उत्तर प्रदेश इलाहाबाद उच्च परिवार न्यायालय  के पूर्व निर्धारित मुख्य न्यायाधीश, भारत की बिजीलैंसीकृत संघ परिवार न्यायपालिका की संघात्मक लोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन की कार्यप्रणाली के जनक, स्वंय में भारतरत्न, स्वंय में विश्वशांति नोबेल सम्मानित, पूरे जगत को यूनाईट रूल ऑफ लॉ एण्ड़ आर्डर के ज्ञानदाता जगतगुरू, अपने पूर्वजों की भांति इच्छा मृत्यु वरदानी, अपने परिवारी श्री कृष्णचन्द्र वासुदेव जी के समान देश दुनिया के सबसे बड़े भगवान एंव हैवान, नेताजी श्री सुभाषचन्द्र बोस जी ने अपनी फौज से कहा था कि फिर मिलेगें, देश की स्वतंत्रता, आजादी व मुक्तता की लड़ाई जारी रखना, हिन्दुस्तान को कोई भी अपना गुलाम नहीं बना सकता, हिन्दुस्तान अपनी स्वतंत्रता, आजादी एंव मुक्तता से युक्त होकर रहेगा, इसके लिये हमें कुछ भी क्यों ना करना पड़े | काश! नेताजी की संगठन एंव विकास की बात देश व दुनिया ने मानी होती तो देश व दुनिया के परिवारों एंव समाजों को अपने विघटन व विनाश का दुष्परिणाम न भुगतना पड़ता | चूँकि देश व दुनिया में संगठन एंव विकास की कार्यप्रणाली लागू हो चुकी है | निकट भविष्य में भारतीय नागरिकों के पहिचान के राजनीतिक समाजी सरकारी व मतकारी दस्तावेजों में, आर्थिक समाजी अर्द्धसरकारी व कर्मचारी दस्तावेजों में एंव सामाजिक समाजी निजि व श्रमकारी दस्तावेजों में दाखिल अविवाहित, विवाहित एंव मृतक नागरिकों की जन्मतिथि, विवाहतिथि व मृत्युतिथि की पंजीकृत, बीमाकृत व लाईसैंसीकृत यानि बिजीलैंसीकृत संख्या सम्बंधित कार्यालय के नाम पता सहित अनिवार्य रूप से दर्ज होगी| जिससे प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन का उद्धेश्य पूरा करने हेतु समान सरकारी आजीविका व मतकारी पैंसन, समान अर्द्धसरकारी आजीविका व कर्मचारी पैंसन एंव समान निजी आजीविका व श्रमकारी पैंसन अर्थात् समान आधारित सेवायें एंव सुविधायें अनिवार्यरूप से प्राप्त होगीं | देश का कोई भी नागरिक इस सिस्टम के तहत बेरोजगार, गरीब एंव दरिद्र तथा भूखा, निवस्त्र एंव बेघर तथा आत्महत्या करने को अथवा आतंकी, भ्रष्टाचारी एंव दुराचारी अर्थात् अन्यायी बनने को कमजोर एंव मजबूर नहीं होगा | देश के प्रत्येक नागरिक का तीनों प्रकार का जीवन वैधानिक, संवैधानिक एंव कानूनी अर्थात् न्यायी नेक नियत एंव नेक नीति का संगठन एंव विकास का प्रेमपूर्वक सुखमय अनिवार्यरूप से व्यतीत होगा | भारतीय नागरिकों के जन्म, विवाह व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसैंसीकरण के अधिनियमों का अनुपालन देश के प्रत्येक नागरिक के द्वारा तथा देश के प्रत्येक नियम, अधिनियम एंव निर्देश को करना अनिवार्य एंव परमावश्यक होगा | इनका जानबूझ कर उल्लंघन अक्षम्य दण्ड़नीय अपराध होगा | ताकि कोई भी षडयंत्रकारी नागरिक इस देश में इस कार्यप्रणाली को उन्मूलित न कर सके और वह अपनी विघटन एंव विनाश की कार्यप्रणाली लागू करने की हिम्मत न कर सके | ताकि दुनिया के सभी परिवार एंव समाज अपना संगठित विकास कर सकें| यह ध्यान रहे कि संगठन एंव विकास की फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी व इसके मुखिया ईश्वरीय एंव तपोनिष्ठ हैं | इसलिये इसे किसी की भी जरूरत नही | संगठन एंव विकास पसंद लोगों को अपनी बदनियति व बदनीति त्याग कर सच्चे मन से इसका आवाहन करना होगा | ऐन, केन व प्रकरेन प्रसिद्ध तो कोई भी प्राप्त कर लेता है | परन्तु ऋद्धि - सिद्धि व निद्धि पाने के लिये कठोर प्रकट तप करना होता है | भारत पूरे जगत की केन्द्र बिंदुत तपोभूमि/कर्मभूमि है | यहाँ शुभ व अशुभ फल तत्काल प्राप्त होता है | यदि देश के सभी लोगों को संगठन एंव विकास का नेक नियति व नेक नीति का शुभ फल चाहिये तो सभी को इस पार्टी की केन्द्र व सभी राज्यों में सरकार बनानी होगी | यह देश के उत्तर प्रदेश झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई रेजीमेन्ट की अर्थात् महिलाओं के सशक्तिकरण व उनके आत्मसम्मान की व्यवस्था है | इसलिये देश की सभी महिलाओं को इस व्यवस्था का आवाहन करना चाहिये | ताकि यह देश पूर्वकाल की भांति डचों, पुर्तगालियों, यूनानियों, मुगलों, अग्रेजों व देशी चुगलखोर अंग्रेजों का  गुलाम बनकर न रह सके |इस अखण्ड़ देश की आंतरिक एंव बाहरी सुरक्षा एंव खुफिया सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रह सके |

ब्लॉगर
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उत्तर प्रदेश



Saturday, April 23, 2016

हाल में ही प्रकाशित हुएे हमारे लेख कुछ न्यूजपैपर न्यूज पोर्टल में :



प्रकाशित हुएे लेख/कहानी और इंटरव्यू

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Amja India http://www.amjaindia.com/archives/27233


Take a look at the website I made with Jimdo! http://emedialivemp.jimdo.com/ल-ख/

मिलिए कलयुग के अवतार योगेशराज श्रीवास्तव से - http://goo.gl/zeLQ2Y








                 

                 http://epaper.navjammu.com























Sunday, April 17, 2016

रक्त प्रदाता : जीवन दाता




 .. प्रत्यक्ष अवतार श्री योगेश राज श्रीवास्तव जी...

















मिलिये भारतरत्न और पद्मविभूषण के लायक कलयुग के अवतार श्री योगेश राज श्रीवास्तव जी से :


             प्रत्यक्ष अवतार

      रक्त प्रदाता :  जीवन दाता

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दोस्तों आपको तो पता ही होगा कि हमारी भारत भूमि पावन देवी - देवताओं की जननी मानी गयी है और हमारे देश में इतने महान समाज सुधारक हुऐ हैं जिन्होंने पूरे देश - दुनिया को उन्नत सोच के साथ - साथ उन्नत दिशा भी दी कि जिससे हमारा समाज एक उन्नत समाज बने और हमारे देश के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न अंग बने | दोस्तों, हमारी पृथ्वी पर जो भी महान लोग अवतरित हुए उन्होंने श्रेष्ठ सामाजिक कल्याणकारी कर्म किये और लोगों का सही मार्गदर्शन किया जिससे वो जनप्रिय और लोकप्रिय बने और बाद में समाज ने उनको एक नाम दिया 'अवतार' | दोस्तों, अवतार के मायने हैं, समाज में उन्नत बदलाव के लिये भगवान के द्वारा भेजे गये दिव्य दूत जिनका मात्र एक ही उद्धेश्य होता है, इंसानियत की रक्षा करना | जिनका सम्पूर्ण जीवन समाज में कल्याणकारी कार्य करने में ही बीतता है | दोस्तों, ऐसा नहीं है कि आज हमारी धरती माँ अवतारों से रिक्त है | आज भी श्रीलंका में रामायण काल की शूपर्नखा कहीं जाने वाली शख्शियत मौजूद हैं | जिनका नाम गंगा सुदर्शनी उर्फ शूर्पनखा है | जिनके पास दिव्य शक्तियाँ हैं जो पल भर में तेज बारिस को अपने मंत्रों से रोकने की शक्ति रखती हैं | जिनको लंका सरकार की तरफ से वीवीआईपी सुरक्षा प्राप्त है  | दोस्तों, अवतार आज भी हैं जरूरत बस उस आंख की है जो उनको पहिचान सके | जिनमें से एक साक्षात, प्रत्यक्ष अवतार से हम आपको मिलवायेगें वो कोई चमत्कार नहीं दिखाते पर उनके सुकर्म से चमत्कार सिद्ध जरूर होते हैं | दोस्तों वह लोगों को जीवन बांट रहें हैं | हम आज आपको मिलवायेगें जोकि भारत के दिव्य रत्न कोहिनूर रूप और पारस स्वरूप, दिव्य अवतारी श्रेष्ठ व्यक्तित्व के धनी है | जिनका नाम बताते हुऐ हमें गर्व की अनुभूति हो रही है | दोस्तों, यह महान शख्शियत हैं, हैदराबाद के श्री योगेश राज श्रीवास्तव जी | जिनके कर्म ही उनकी पहिचान बन गये | जिनके नाम को एक दिन हमारे देश के गौरवशाली इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जायेगा | जिनको कलयुग का अवतार कहने में कोई अतिश्योक्ति ना होगी | तो, आइये मिलवाते हैं, माननीय श्री योगेश राज जी से |
      युगपुरूष योगेशराज श्रीवास्तव जी से बातचीत के कुछ अंश.......

आकांक्षा-   नमस्कार आदरणीय योगेश जी

योगेश जी -  नमस्कार आकांक्षा

आकांक्षा -  योगेश जी आपका जन्म कहाँ हुआ और आपके माता-पिता का क्या नाम है ?

योगेश जी-  मेरा जन्म हैदराबाद में हुआ और मेरी माता का नाम सविता देवी व पिता जी का नाम स्वर्गीय श्री श्याम सुन्दर लाल श्रीवास्तव है|

आकांक्षा-  योगेश जी आपको रक्त दान करने का ख्याल कब और कैसे आया ?

योगेश जी-  यह बात मेरे कॉलेज के समय 2 अक्टूबर 1983 की है | जब हमारे कॉलेज में ब्लड डोनेट कैंप (रक्तदान सिविर) लगा था | मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त ने कहा," योगेश तुम भी ब्लड डोनेट कर दो |" हमने तुरन्त हाँ कर दी और फिर ब्लड डोनेट करने के बाद मैं खुद में बहुत ऐक्टिव फील फील कर रहा था | कि तभी डा. प्रभारक रेड्डी मेरे समीप आकर बोले," आज आपने ब्लड डोनेट करके दो लोगों की लाइफ सेफ की है | हमने उत्सुकतावश पूछा," कैसे डाक्टर ? वह बोले," हम इस ब्लड को सील पैक कर देगें जो कम से कम दो लोग के काम आयेगा | वो बहुत प्यारी द्रष्टि से मेरी ओर देखते हुऐ निकल गये | यह सुनकर मैं इतना खुश हुआ कि मैं तो बिल्कुल साधारण परिवार से हूँ | धन से नहीं तो रक्तदान करके ही मैं किसी के काम आ सकूँ तो मेरा जीवन सार्थक हो जाये |
बस उसी दिन से सोच लिया कि रक्तदान करके जरूरतमंद लोगों की हमेसा मदद करता रहूंगा|
बस फिर कभी न रूका कभी न थका |

आकांक्षा - योगेश जी दोस्त हों तो ऐसे अच्छे दोस्त हमारा जीवन लक्ष्य दे देते हैं और बुरे दोस्त जीवन लक्ष्य बिगाड़ देते हैं |

योगेशजी -  सही कहा आपने आकांक्षा

आकांक्षा - योगेश जी अब तक कितने बार रक्तदान कर चुके हैं आप ?

योगेश जी - मैं 75 ब्लड डोनेशन कैंप से जुड़ा और एक सौ ग्यारह बार ब्लड डोनेट कर चुका हूँ |

आकांक्षा -  योगेश जी आज भी हमारे देश में लोग रक्तदान करने से डरते हैं तो इस विषय पर क्या कुछ समझाना चाहेंगे समाज के लोगों को ?

योगेश जी - आकांक्षा मैं आपके माध्यम से सभी को स्पष्ट शब्दों में यह कहना चाहूंगा कि रक्तदान करने से किसी भी तरह की कमजोरी नहीं आती है | इस बात को विज्ञान की कसौटी पर बताता हूँ आपको कि हमारे शरीर में 6 से 7 लीटर तक रक्त मौजूद होता है और मित्रों हमारे शरीर को तो बस 5 लीटर रक्त की ही जरूरत होती है | बाकि का बचा 2 लीटर रक्त वह तो बस सरप्लस है | उसमें से हम आप मात्र 350 ml रक्त ही तो डोनेट करते हैं | तो बताओ हमको कहाँ से हानि हुई और एक जरूरी बात कि हम जैसे ही रक्तदान करते हैं, हमारे शरीर के तंत्रिकातंत्र में तुरन्त ताजा ब्लड बन जाता है|
इसलिये डर को त्यागो और पूरे मन से रक्तदान करो |

आकांक्षा - योगेश जी आपने बिल्कुल सही समझाया हम सभी को कि रक्तदान करने से कोई कमजोरी नही आती|
योगेश जी यह बताइये कि रक्तदान करने हमारे शरीर को क्या-क्या लाभ हो सकते हैं ?

योगेश जी - जो लोग रक्तदान करते हैं उनको मधुमेह ( डाईविटीज ) व हृदयरोग कभी नहीं होते और व्यक्ति लम्बी आयु के साथ स्वस्थ जीवन सकारात्म ऊर्जा के साथ व्यतीत करता है |

आकांक्षा - बिल्कुल सही कहा आपने योगेश जी | योगेश जी हमको पता चला है कि आप ब्लड डोनेट तो करते ही हैं पर आपने अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंग भी दान कर दिये हैं |
कृपया इस बारे में भी कुछ बतायें ?

योगेश जी - मैं तो बस यही कहूंगा कि यह योगेश जब पृथ्वी छोड़कर जाये यानि मेरे मृत्यु के बाद भी कम से कम 9 लोग जीवन का आनंद लें | हमने अपनी आँखे, फैफड़े, जिगर, यकृत, हृदय, गुर्दे दान कर दिये हैं | मैं तो यही सोचता हूँ कि जीते जी रक्तदान और मरणोपरान्त देहदान |

आकांक्षा - योगेश सर आपको तो भारतरत्न मिलना चाहिये, सचमुच |

योगेश जी -  नहीं आकांक्षा आप सभी लोगों का स्नेहरत्न ही मेरे लिये काफी है |

आकांक्षा - योगेश जी हमको हैदराबाद तैलांगाना के लोगों ने बताया कि आपने समाजहित में ढ़ेरों काम किये हैं चाहे वो गुजरात में आये भूकम्पपीड़ितों को दवा पहुंचाना हो या फिर 12,950 गरीब लोगों को मुफ्त में नजर के चश्में देना , या फिर कड़ाके की शर्दी में 762 जरूरतमंद लोग को कंबल बांटना हो, या फिर 157 मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध करा देना हो और या फिर 242 मधुमेह रोगियों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराना हो या फिर अनेक गरीब बच्चियों की अपनी जिम्मेदारी पर बिना दहेज़ शादी सम्पन करवा कर और या फिर सरकारी महिला प्रसूती अस्पताल में आपके द्वारा बनवाये गये दो वॉशरूम 350 महिलाओं को बैठने की स्थायी, उचित और अच्छी व्यवस्था और रोगियों के लिये ठण्ड़े स्वच्छ पानी की मशीनें और ना जाने कितने नेक कार्य किये आपने |तो इस बात पर क्या कुछ कहना चाहेंगे आप ?

योगेश - क्या बोलूं सभी लोग का प्रेम, सहयोग और आशीर्वाद है | यह योगेश तो माटी का पुतलाभर है |


आकांक्षा - योगेश जी आपकी कोई वेवसाईट भी है क्या कृपया हमारे दोस्तों को बतायें ?

योगेश जी - हाँ आकांक्षा
www.yogeshrajsrivastava.in
इसमें मेरे बारे में सब जानकारी उपलब्ध है |

आकांक्षा - योगेश जी अब तक आपको जो भी अवार्ड व सम्मान से नवाजा गया कृपया करके हमें और हमारे सभी दोस्तों को बतायें ?

योगेश जी - आकांक्षा मैं अवार्ड के लिये नहीं जिया पर कुछ लोग नहीं माने तो क्या करूँ |
मैं समाज और हम ब्लॉग के माध्यम से उन सभी का दिल की प्रत्येक धड़कन से आभार व्यक्त  करना चाहूंगा जिन्होंने मुझे इन आवार्ड के लायक समझा | आप पूछ रहीं हैं तो जरूर बताऊंगा मुझे ...

1 - रक्तदान में अभिलेखों के आश्चर्य किताब अवार्ड |

2 - 16 वीं फिलिप्स गुडफ्री बहादुरी पुरस्कार |

3 - 17 स्वर्ण, 4 सिल्वर पदक और
14 योग्यता प्रमाण पत्र |

4 - सर्वश्रेष्ठ सचिव पुरस्कार |
शेर एकीकरण 1994-1995

5 - राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार |
20-08-1996

6 - वर्ष 1998-99 में लाइन अंतरराष्ट्रीय     पुरस्कार |

7 - समाज रतन पुरस्कार  |
(सहारा स्वैच्छिक संगठन) पर 2012/02/06

8 - प्रतिबद्ध सामाजिक कार्यकर्ता
पुरस्कार |

9 - 17-08-2003 के स्वेक्षा भारती पुरस्कार |

10 - अखिल भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी से सराहनीय सेवा पुरस्कार 27-09-2011 को नई दिल्ली में भारत सरकार के स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्री माननीय श्री गुलाम नबी आजाद द्वारा सम्मानित किया गया |

ये सभी अवार्ड प्राप्त हुए पर सच पूछों तो मैं खुद को अवार्ड के लायक नही समझता क्योंकि मैं तो सिर्फ इंसान होने का कर्तव्य निभा रहा हूँ बस |

आकांक्षा - सर ये तो आपका बडप्पन है | तो, योगेश जी अब हम ये जानना चाहेंगें कि आपके आदर्श कौन हैं|

योगेश - मेरे आदर्श मेरे माता-पिता, गुरू, श्री लालालाजपत राय,श्री सुभाषचन्द्र बोष, स्वामी विवेकानन्द, लालबहादुर शास्त्री, और हाँ एक नाम और लेना चाहूंगा हमारे भारत के विश्वप्रिय प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी|

आकांक्षा - योगेश जी हम भी इन सभी के फैन है | कृपया ये बतायें कि वर्तमान में आप किस पद पर आसीन हैं ?

योगेश जी - चेयरमैन ऑफ हैदराबाद मेडिकल सॉप ऐसोसियेसन |

आकांक्षा - योगेश जी आप समाज और युवाओं क्या कहना चाहेगें ?

योगेश - क्या बोलूं सभी लोग का प्रेम, सहयोग
और आशीर्वाद है | यह योगेश तो माटी का                 पुतलाभर है |

आकांक्षा - योगेश जी अब तक आपको जो भी
अवार्ड व सम्मान से नवाजा गया कृपया करके
हमें और हमारे सभी दोस्तों को बतायें ?

योगेश जी - आकांक्षा मैं अवार्ड के लिये नहीं जिया
पर कुछ लोग नहीं माने तो क्या करूँ |मैं समाज और हम ब्लॉग के माध्यम से उन सभी का दिल की प्रत्येक धड़कन से आभार व्यक्त करना चाहूंगा जिन्होंने मुझे इन आवार्ड के लायक समझा |
आप पूछ रहीं हैं तो जरूर बताऊंगा मुझे ...

1 - रक्तदान में अभिलेखों के आश्चर्य किताब अवार्ड |

2 - 16 वीं फिलिप्स गुडफ्री बहादुरी पुरस्कार |

3 - 17 स्वर्ण, 4 सिल्वर पदक और
14 योग्यता प्रमाण पत्र |

4 - सर्वश्रेष्ठ सचिव पुरस्कार |
शेर एकीकरण 1994-1995

5 - राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार |
20-08-1996

6 - वर्ष 1998-99 में लाइन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार |

7 - समाज रतन पुरस्कार  |
(सहारा स्वैच्छिक संगठन) पर 2012/02/06

8 - प्रतिबद्ध सामाजिक कार्यकर्ता
पुरस्कार |

9 - 17-08-2003 के स्वेक्षा भारती पुरस्कार |

10 - अखिल भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी से सराहनीय सेवा पुरस्कार 27-09-2011 को नई दिल्ली में भारत सरकार के स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्री माननीय श्री गुलाम नबी आजाद द्वारा सम्मानित किया गया |

ये सभी अवार्ड प्राप्त हुए पर सच पूछों तो मैं खुद को अवार्ड के लायक नही समझता क्योंकि मैं तो सिर्फ इंसान होने का कर्तव्य निभा रहा हूँ बस |

आकांक्षा - सर ये तो आपका बडप्पन है | तो, योगेश जी अब हम ये जानना चाहेंगें कि आपके आदर्श कौन हैं|

योगेश - मेरे आदर्श मेरे माता-पिता, गुरू, श्री लालालाजपत राय,श्री सुभाषचन्द्र बोष, स्वामी विवेकानन्द, लालबहादुर शास्त्री, और हाँ एक नाम और लेना चाहूंगा हमारे भारत के विश्वप्रिय प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी|

आकांक्षा - योगेश जी हम भी इन सभी के फैन है | कृपया ये बतायें कि वर्तमान में आप किस पद पर आसीन हैं ?

योगेश जी - चेयरमैन ऑफ हैदराबाद मेडिकल सॉप ऐसोसियेसन  |

अाकांक्षा - योगेश जी आपको इतने अच्छे कार्यों की शक्ति कहाँ से मिलती हैं ?

योगेश जी - आकांक्षा मेरा आदिशक्ति माँ अम्बें में बहुत विश्वास है और मैं मेरे पूरे परिवार को बहुत प्यार और सम्मान करता हूँ और सभी सहयोगियों इष्ट मित्रों की मेरे प्रति जो स्नेह भावना है | यही मेरी शक्ति और मेरी ऊर्जा है |

आकांक्षा - योगेश जी हमें पता चला है कुछ कुशल फिल्म निर्माता आप पर आपके कार्यों से प्रभावित होकर फिल्म और डाक्यूमेंट्री बनाना चाह रहे हैं | आप इस विषय पर क्या कुछ कहना चाहेगें ?

योगेश जी - आकांक्षा मुझे बहुत दुख होता है जब फेसबुक, ट्यूटर, तमाम सोसल साइट्स पर पोस्ट देखता हूँ कि मेरे परिवारी की हालत बहुत सीरियस है प्लीज इस ब्लड ग्रुप की जरूरत है प्लीज | पर ब्लड ना मिलने वह अपने को खो चुका होता है | समाज की जो ये चुप्पी है| यह मुझे रात-दिन चुभती है अगर फिल्म के माध्यम से समाज की चुप्पी टूटती है तो सचमुच मुझे बहुत खुशी होगी |

आकांक्षा - योगेश जी आप देश के युवाओं को क्या                      संदेश देना चाहगें?

योगेश जी- मैं सभी से कहना चाहूँगा कि ब्लड किसी फैक्टरी में नही बनता | यह क्षमता केवल आपके शरीर में है जिससे आप प्रेगनेन्ट महिला, बीमार बच्चों, ऐक्सीडेण्टल मरीजो, ऑपन हार्ट सर्जरी के मरीजो की मदद क्या जीवन दान दे सकते हो |आओ संकल्प ले आज कि हमारे होते हुऐ कोई भी मरीज ब्लड की कमी से दुनिया और हमारा साथ ना छोड़ पाये |
प्लीज रक्तदान कर जीवन को बचायें |

आकांक्षा - योगेश जी आपने अपना कीमती वक्त हमारे ब्लॉग को दिया | इसके लिये आपका बहुत - बहुत धन्यवाद |

योगेश जी - नहीं ऐसी कोई बात नहीं| मैं आकांक्षा का   आभार व्यक्त करता हूँ कि हमको सभी लोगों से मिलने का मौका मिला |
धन्यवाद मित्रों |



ब्लॉगर
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उत्तर प्रदेश











Friday, April 15, 2016

देश के प्रतिभाशाली उभरते महनती डाईरेक्टर अमृत सिन्हा जी की फिल्म A Soul that Beats जरूर देखें |






क्रिऐटिव फिल्म डाइरेक्टर अमृत सिन्हा जी 

          से बातचीत के कुछ अंश..



देश के प्रतिभाशाली उभरते महनती डाईरेक्टर अमृत सिन्हा जी की फिल्म A soul that beats जो कि भोजन की बर्बादी पर आधारित है |समाज और देश दुनिया के हित के लिये, हमारे जीवन मूल्यों पर और मानवता धर्म पर समाज के एक सत्य को पर्दे पर ला रहें हैं अमृत सिंहा जी | जो  कि समाज और देश दुनिया को भोजन की बर्बादी को रोकने के लिये, अपनी फिल्म के माध्यम ये पूरी दुनिया को जागरूक करते दिखेगें Film A Soul that beats में |अत: दोस्तों आप से समाज और हम ब्लॉग की तरफ से ये गुजारिश है कि मानवता को जिंदा रखने के नाते और अपने जीवन मूल्य और सच्चे कर्तव्य के नाते ये फिल्म जरूर देखें और अपने दोस्तों को भी दिखायें जिससे हमारे समाज में श्रेष्ठ बदलाव की उम्मीद सच सिद्ध हो सके और लोगों की मानसिकता में सुधार हो जिससे हमारा देश प्रगृति के नये कीर्तिमान स्थापित करने में सफल सिद्ध हो |

धन्यवाद

http://blogavleenaanand.tumblr.com/post/142850951053/a-soul-that-beats


ये है फिल्म A soul that beats के सूटिंग के कुछ द्रश्य......








तो ये थे फिल्म कास्ट के कुछ फोटो और सूटिंग के कुछ फोटो |
इस फिल्म की कहानी के सम्बंध में अमृत सिंहा जी ने बताया कि कहानी आनंद डी गुप्ता जी ने लिखी और फिल्म के डाइरेक्टर भी आनंद डी गुप्ता जी हैं और मैं क्रिऐटिव डाइरेक्टर हूँ इस फिल्म में और भी अमृत जी ने  जी भी हमें बताया वो इस प्रकार से है ......


Some stories, they just come and go. They will either make u laugh or cry for a moment. We can simply count them in numbers, to be precise box office numbers. This is termed as commercial cinema trending all over the world and we adore this. Don’t we?
But there are certain films which make us think about ourselves, leave a kind of impression on us by their simple storytelling and then we tend to ask few questions about ourselves, “What are we doing on this earth”? “What’s my purpose?” Am I setting the right example? And many more...
Such films are known as social experimental films. These films, just want to make a difference in your life by leaving a mark on your heart. 
“A soul that beats” is one such kind of a movie based on the morals of Mahatma Gandhi and his ideology. Nobody wants to be the last in this race of high thinking and high living knowing the fact that still inequality and poverty prevails in their own country. People who are living much urban life will continue to do so and those who are under poverty and caste system, well they will be there only. 
Tanay Films wants to explore the idea of Mahatma Gandhi, his belief in simple living and high thinking by showing four real life characters which not only shows reality of modern India but also bring those people in front who actually follows “Gandhian philosophy” but they usually get unnoticed.
“This film has shaped up nicely, and can bring a difference in people’s mindset. It carries a strong message which can bring tears and make people think” says Anand Das Gupta, writer of A soul that beats.
Tanay Films International has been in the commercial industry for long, and he is sure with his experimental social service film that he can and will bring the change in the society.

अपनी फिल्म के विषय में अमृत सिंहा जी से हमने पूछा कि सर आपकी फिल्म के बारे में बतायें तो उन्होंने देखो क्या कहा ?

We are living in a society  where poverty prevails in every sphere of Indian society 
Through our film we not only portray  that poverty and class ethics but also focuses wasting food is a crime. It may be luxury for some on the other hand it may be neccesity for other.

धन्यवाद सर जो आपने अन्न की बर्बादी पर फिल्म बनायी ये सचमुच बहुत जरूरी बात है आज बड़ी बड़ी शादियों में जो खाने की बर्बादी होती है किसी से छुपी नहीं हैं |बबफ सिस्टम आज बर्बादी सिस्टम बन गया चुका है |हम तो कहते हैं  कि हर शादी समारोह में एक कलेण्डर टांगा जाये जिस पर बड़ा बड़ा लिखा हो ..

उतना ही हो थाली में
बरबाद ना जाये नाली में

धन्यवाद सर हमसे बातचीत के लिये और समाज और हम ब्लॉग को इतनी अच्छी फिल्म की जानकारी देने के लिये और धन्यवाद आपके कीमती समय के लिये |हम आकांक्षा सक्सेना आपकी फिल्म की सफलता की कामना करती हूँ कि आपकी फिल्म सभी के दिलों में अपनी छाप छोड़ सकने में कामयाब रहे |
आपको अापकी फिल्म के लिये समाज और हम ब्लॉग की तरफ से अग्रिम बधाई |

दोस्तों अपने देश में अन्न को देवता का दर्जा प्राप्त है  अत: अन्न की बर्बादी का मतलब है भगवान का अपमान |इस लिये इस अच्छी फिल्म सपरिवार
जरूर देखियेगा |