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Showing posts from March, 2016

हाल ही में प्रकाशित हुई कुछ रचनायें और लेख |

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कुछ कहती है ये होली

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कुछ कहती है ये 'होली'  ...................................
होली 'क्षमा' है  होली 'मिलन' है होली 'प्रेम' है होली 'ऐकता' है |
दोस्तों कुछ दिन बाद होली का महापर्व पूरे देश में आनंद मनाया जायेगा, बीते हर साल की भांति|हर जगह दही हाण्ड़ी फोड़ी जायेगी जो कि ऐकता और आत्मविश्वास की शक्ति का प्रतीक है और वहीं दूसरी ओर आप कभी मथुरा बिहारी जी के मंदिर गये हों, तो याद कीजियेगा बिहारी जी के मंदिर की वो प्यारी होली जिसमें देशों की सीमायें टूट जाती हैं, दुनिया के कोने- कोने से सैलानी और भक्त-प्रेमी आये हुऐ होते हैं, वास्तव में नजारा देखने लायक होता है |सोचो ! भगवान कृष्ण जैसे प्रेमी, प्रेम और सदभावना को चरित्रार्थ कर देने वाले, ऐसे भगवान हमारी इसी हिन्दुस्तान की धरती पर हैं जिन्होंने पूरे समाज और दुनिया को प्रेम से साक्षात्कार कराया |आज भी उनकी भांति उनके भक्त होली पर होली के प्यारे गीतों पर लोग झूंमते-थिरकते एक - दूसरे को रंग लगाते दिखेंगें |कितना सुंदर त्योहार है ये होली |देखने में आया है कि लोग सारी पिछली कड़वाहटों को भुलाकर इसी दिन एक-दूसरे को रंग- गुलाल ल…

बड़ा मुश्किल है |

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मुश्किल है ..................
जितना मुश्किल है पानी पर पानी लिखना उतना मुश्किल है  उसकी आरजू पर अपनी कहानी लिखना |
जितना मुश्किल है  हवा पर हवा लिखना उतना मुश्किल है उसकी देशभक्ति पर अपनी जवानी लिखना |
जितना मुश्किल है अंतरिक्ष पर अंतरिक्ष लिखना उतना मुश्किल है  उसकी कहानी में  अपनी कहानी लिखना |
जितना मुश्किल है आँसू पर आँसू लिखना  उतना मुश्किल है उसके दर्द में अपनी तकदीर लिखना |
जितना मुश्किल है  आँख से आँख देखना उतना मुश्किल है उसके सपने पर  अपनी हकीकत लिखना |
जितना मुश्किल है  अंधेरे में अंधेरा लिखना उतना मुश्किल है उसकी हथेली पर अपनी गल्ती लिखना |
जितना मुश्किल है अपनों की तरक्की देखना उतना मुश्किल है उसकी शौहरत में अपने ज़ज्बात लिखना |

स्वरचित रचना
ब्लागिस्ट आकांक्षा सक्सेना जिला - औरैया उत्तर प्रदेश http://akaksha11.blogspot.com




.........धन्यवाद......










हाल ही में प्रकाशित हमारे लेख :

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[3/13, 9:51 PM] akaksha: http://www.hntv.co/news/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7/%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%97/
[3/13, 9:51 PM] akaksha: http://www.shramjeevijournalist.com/%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%AF/why-organically-on-women-wearing-jeans-jeans-opinion-of-the-society/











............धन्यवाद............






विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च पर कविता :

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घर की गौरैया ...................
किसे देखती हो तुम गौरैया कौन तुम्हें बुलायेगा  गंगा को भागीरथ लाये  तुम्हें कौन ले आयेगा आज दुनिया ऑनलाइन है किसके पास आज टाइम है चाँद मंगल पर पानी ढू़ढ़ते घर की गौरैया गायब है |
किसे ढू़ढ़ती हो तुम गौरैया कौन दाना तुम्हें चुगायेगा हाथी को ले आये थे भीम तुम्हें कौन ले आयेगा दुनिया आज स्वार्थी है          
तुमसे वो क्या पायेगा परग्रही पूर्वजों को ढू़ढ़ते घर की गौरैया गायब है |
किसे सोचती हो तुम गौरैया कौन तुम्हें पुकारेगा कामधेनु को ले आये थे मुनि आज तुम्हें कौन ले आयेगा दुनिया आज प्रपंची है पर कुछ दुधवा वाले चिंतित है महामशीन से कंण ढू़ढ़ते घर की गौरैया भी लायक है |

स्वलिखित रचना ब्लागिस्ट आकांक्षा सक्सेना जिला - औरैया उत्तर प्रदेश