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Showing posts from February, 2016

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष :

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महिला आज भी एक उपेक्षित आँसू ............................................

सोच को विस्तार कहाँ
बातों को आधार कहाँ
निर्धन को प्रेम कहाँ
औरत को सम्मान कहाँ

दोस्तों हम सभी जानते हैं कि इस 8 मार्च 2016 दिन मंगलवार को सम्पूर्ण विश्व, विश्व अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है |इस महिला दिवस के पीछे महिलाओं की पहली वो आवाज थी जब वर्ष 1908 में न्यूयार्क की एक कपड़ा मिल में काम कर रहीं महिलाओं ने अपने कार्य की समय सीमा तय करने, सही तनख्वाय, और अपने वोट के हक के लिये आवाज बुलन्द की थी | यह घटना विश्व के इतिहास की इतनी प्रभावशाली घटना थी कि वर्ष 1909 में अमेरिका की सोशलिष्ट पार्टी ने पहली बार नैशनल वुमन डे मनाया जिससे महिला शक्ति जाग उठी थी और अब उसने वर्ष 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के खिलाफ जोरदार प्रदर्शनों को अंजाम दिया | फिर इन सभी प्रदर्शनों को महिला अधिकारों से जोड़ते हुए एक इतिहास रच गया जब 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया गया | यह था वो वर्ष 1900 का अमिट एतिहासिक पल और आज वर्ष 2016 यानि 116 वाँ वर्ष तो क्या बदलाव और सुधार आया है इतने संघर्षपूर्ण वर्षों में, हमारे देश की ग…

ग्राम सन्देश अखबार में .....आपकी दोस्त

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ग्राम सन्देश अकबार की पूरी टीम को धन्यवाद


एक कदम

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एक कदम आपका ........................
दोस्तों हमेशा सिर्फ अपने लिये जीना बस खुद के लिऐ सोचना क्या ये खुदगर्जी नहीं और क्या आप यही  जीवन चुनना चाहेंगे शायद नहीं | कुछ लोग बड़े मंच पर खड़े होकर समाजहित, राष्ट्रहित, प्रेम और दया  की बड़ी - बड़ी बातें करते हैं पर देखा गया है कि वही लोग जब बस और ट्रेन का सफर कर रहे होते हैं तब अपने साथी यात्री को पूरी यात्रा में उसे खड़े हुऐ यात्रा करते देख,उनका मन नहीं पसीजता जो थोड़ा सा खिसक जाते और वो भी यात्री बैठ जाता | हम दुनिया को खुद को दिखाते तो बहुत महान है पर हैं कितनी संकीर्ण मानसिकता के | इस मानसिकता को बदलना बहुत जरूरी है | वैसे भी विड्म्ना यह है कि जो मूर्तिकार भूखा प्यासा एकाग्रचित हो पत्थर को तरास कर मूर्ति बनाता है | मूर्ति बनाने में उसकी कला और भक्ति दोनों के दर्शन होते हैं पर वह और उसका परिवार गरीबी में जीते हैं उसकी पूरी मेहनत भी उसे नहीं मिलती| एक मूर्ति खरीदने में भी बड़ा मोलभाव चलता | मूर्तिकार अपने रोटी चलाने के लिये अंतत: मूर्ति लागत से भी कम दाम में दे देता है पर देखो ! जो व्यक्ति मोलभाव करके मूर्ति ले गया उसने वो मूर्ति मंदिर मे…

एक कदम

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Your Step ………………….
Friends always live for themselves what they think is just selfishness latter in itself and you would probably not choose this life. Some people stood on the big stage Smajhit, national, love and mercy great - great things have been seen on the bus and train travel are the same ones that are awake and your fellow travelers to visit her standing in the tour seeing, they do not mind a little bit Pasijta are eroding and that the passengers. If we show ourselves to the world is very great on how narrow minded. It is important to change this mindset. It is that which Vidmna be focused thirsty hungry stone sculptor creates statue Tras. Devotion to his art and sculpture are seen on both he and his family live in poverty do not get him his whole work. Or buy a sculpture shows great bargains. To run your bread sculptor finally give the statue look at less than the cost price! He negotiated the person who took the statue and said that she had put the statue in the temple gro…

सिर्फ बातें

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बातें ..........

अंगलियों के पोरों पर
गणना की सितारों की
इस अंधेरी दुनिया से
आशा की उजालों की
घर में रखा है फूटा बर्तन
बातें की हजारों की

कंकरीट पर रात बिताकर
सपने देखे महलों के
इस भिकारी दुनिया से
आशा की मिल जाने की
एक पुरानीबात छिपाकर
कोशिश की सो जानेकी

मुट्ठी में छिपाये आँसू की आँधीं
बातें की मुस्कुराने की
इस मूर्झित दुनिया से
आशा की स्व: जगाने की
पड़ोसी का नाम पता नही
बातें की मंगल पर जाने की


स्वरचित रचना
लेखिका
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उत्तर प्रदेश


सर्वसुलभ हो भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र :

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भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र की अनिवार्यता : ...........................................

देश के प्रत्येक विवाहित, जन्में व मृतक स्वदेशी एंव विदेशी भारतीय लाभार्थी नागरिक को अपने राष्ट्रीय मानवाधिकार व कर्तव्य के तहत अपने विवाह जन्म व मृत्यु का पंजीकृत वैधानिक, बीमाकृत संवैधानिक व लाईसैंसीकृत कानूनी सर्वोच्य निर्णायक भारतीय लाभार्थी नागरिकता का प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र अनिवार्य एंव परमावश्यक रूप से चाहिये ताकि उसकी भारतीय नागरिकता की प्रमाणिकता व सत्यता के पहिचान के सभी प्रकार के राजनैतिक समाजी सरकारी व मतकारी दस्तावेजों में तथा सभी प्रकार के आर्थिक समाजी अर्धसरकारी व कर्मचारी दस्तावेजों एंव सभी प्रकार के सामाजिक समाजी निजि व श्रमकारी दस्तावेजों में दाखिल विवाहित नागरिकों की विवाह तिथि की,दाखिल विवाहित व अविवाहित नागरिकों की जन्मतिथि की एंव खारिज मृतक नागरिकों की मृत्यु तिथि की पंजीकृत वैधानिक संख्या, बीमाकृत संवैधानिक संख्या एंव लाईसेंसीकृत कानूनी संख्या सम्बंधित कार्यालय के नाम पता सहित अनिवार्य एंव परमावश्यक रूप से दर्ज की जा सके यही सभी का विशेष एंव सामान्य राष्ट्रीय …

भले कुछ काम

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भले काम ...............
जीवन के दिन चार  कर लो भले कुछ काम
कश्मीरी पण्ड़ितों की खामोश जिंदगी की बेचैन खोयीं आँखें क्यों हैं आज भी उलझी,उपेक्षित बातें
काहे दंगा काहे फसाद कर लो भले कुछ काम
जात-पात देश-धर्म पर बन्द हो राजनीति देश का गौरवशाली
इतिहास बन्द हों
इसपर कुठाराघात

जीवन के दिन चार कर लो भले कुछ काम
हे!कलम तू भी कर एक भला ये काम जय हिन्द लिखकर ही रूकना अब चाहे
स्याही भी ना दे साथ
जीवन के दिन चार कर लो भले कुछ काम

स्वलिखित रचना लेखिका आकांक्षा सक्सेना जिला-औरैया उत्तर प्रदेश



जरूरत

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वर्तमान की जरूरत ...........................

अपने राष्ट्रीय मानवाधिकार व कर्तव्य के तहत देश के प्रत्येक विवाहित, जन्में व मृतक स्वदेशी व विदेशी भारतीय लाभार्थी नागरिक को अपने विवाह, जन्म व मृत्यु के  पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसेंसीकरण के प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र पाने हेतु अपने मजरा, गाँव, कस्बा, नगर व महानगर के प्रत्येक मोहल्ले व कॉलोनी में भारतीय नागरिकों के विवाह, जन्म व मृत्यु के पंजीकरण, बीमाकरण व लाईसेंसीकरण के आधुनिक कार्यालयों की जरूरत है ताकि इन कार्यालयों से देश के नागरिक इस प्रमाणपत्र व पहिचानपत्र को प्राप्त करके इनके प्रयोग द्वारा अपने जीवन का उद्धेश्य पूरा करने हेतु अपनी इच्क्षा व योग्यतानुसार राजनीतिक समाजी सरकारी आजीविका व मतकारी पैंसन तथा आर्थिक सामाजी अर्धसरकारी आजीविका व कर्मचारी पैंसन एवंम  सामाजिक समाजी निजी आजीविका व श्रमकारी पैंसन तथा बुनियादी सेवायें व सुविधायें अनिवार्य एवम् परमावश्यक रूप से प्राप्त कर सकें और अपना,अपने देश का व अपनी दुनिया का सृजनशील विकाश कर सकें| राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त व मुख्य सचिव को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है | ताकि सभी का …

कानपुर और जबलपुर के न्यूज पैपर में प्रकाशित ब्लाग न्यूज

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आभार
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उत्तर प्रदेश के महानगर कानपुर के कर्म कसौटी अखबार
में प्रकाशित ब्लाग न्यूज और जबलपुर के साप्ताहिक अखबार जबलपुर दर्पण में प्रकाशित ब्लाग न्यूज,साप्ताहिक सनन्यूज न्यूज पैपर आपका बहुत -बहुत आभार |

















गवरमेन्ट जॉब ही क्यों माँ...?

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पछतावा ........................
आज वेलेन्टाईन डे है यार कोई मस्त लव स्टोरी सुना अरे!कहाँ खोई है अंकिता बोल ना कुछ चल बता क्या हुआ ? अंकिता ने कहा,"कुछ नहीं रिया मैं ठीक हूँ| रिया,"देख ! अंकिता,तू अपनी माँ की कड़वी बातों को दिल पर ना ले एक दिन उनके पता चलेगा कि उनकी बेटी कितनी टेलेंटिट है जरा सोच ! तेरे पापा उड़ीसा माईन में सर्विस करते हैं वो तेरी माँ से मतलब नहीं रखते और पूरा घर तेरी माँ चलाती है कितनी मंहगाई है आज जिसपर जिम्मेदारी होती है वो थोड़ा चिड़चिड़ा हो ही जाता है |इसलिये चिन्ता न कर चल उठ मेरे बगीचे में दो मोर हैं चल दिखाती हूँ |अंकिता तैयार होकर जैसे ही घर के गेट पर पहुँचती है कि माँ जो बैंक में क्लर्क है वो फोन करती है तुरन्त अंकिता अपना मोबाईल निकालती है जी मम्मा वह कहती हैं | मेरी तुम पर पूरी नजर रहती है जाओ अंदर और पढ़ाई करो स्टॉफ कमीशन आयोग का बैंक पीओ का फोर्म भरा है तो चुपचाप तैयारी करो |रिया ने कहा,"यार ! तेरी माँ ये मोहल्ले की ये सामने वाली आंटी खबर देती है पर ये आन्टी कुछ ज्यादा सख्ती कर रही जो ठीक नही और रिया चली जाती है| शाम को अंकिता पूजा कर …

शब्द प्रतिज्या औ पीथयान मैग्जीन में प्रकाशित ब्लाग...

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बहुत - बहुत आभार .........................






धन्यवाद







भोपाल के राजधानी न्यूज पेपर में ब्लाग न्यूज

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खब़र .......












तेज न्यूज और न्यूज नेशन पर ब्लाग स्टोरी व न्यूज

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खब़र में ... ............ तेज न्यूज और न्यूज नेशन को बहुत - बहुत धन्यवाद जो उन्होने हमारी ब्लोग स्टोरी और न्यूज को तवज्जो दी| शुक्रिया|

समाज और हम - फेसबुक , व्हाट्सएप पर लव फिर शादी http://dhunt.in/TqK0


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ब्लोग से बनायी पह्चान आकांक्षा सक्सेना ने

www.newsnationindia.com





धन्यवाद 





बसंत एक आनंद उत्सव

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बसंत एक संत .......................     
कल 12 फरवरी है और पूरा देश बंसतोत्सव की तैयारियों में व्यस्त है | यह पर्व प्रकृति के श्रंगार का नवीनता,प्रेम और खुशी का पर्व माना जाता है|इस त्योहार में जहाँ एक ओर पतंगे उड़ाई जाती हैं कि हम पतंग की ही तरह आसमान की उँचाइयाों को स्पर्श कर सके| वहीं एक ओर माँ शारदे की पूजा की जाती है कि वो हमें ज्ञान और विवेक के उजालें प्रदान करें और हम जब उँचाईयों पर हों तब हम में धैर्य और स्थिरता और विनम्रता रूपी गुण आशिर्वादरूप में प्रदान कर हमें अविभूत करें|वैसे बसंत को सभी मौसम का राजा कहा जाता है पर हम इसे एक संत के रूप में देख रहें हैं जो हमें ये समझाता है कि बीती ताये बिसार दे और आंगे की सुध ले मतलब जीवन में घटी बुरी स्मृतियों को भुला कर आगें नये सिरे से जीवन जीने की कला सिखाता है |अरे ! बसंत का अर्थ ब से बहार,स से सभी,न नमन, त से तमन्ना अर्थात बसंत की एक मात्र तमन्ना यह है कि वह मानव,जीव और पादप सभी में अपने सुकर्मों द्वारा बहार लायें और प्रकृति के उस सुगंधित नव परिवर्तन को बारम्बार नमन करता रहे |बसंत एक संत के रूप पतझण रूपी दकियानूसी मानसिकता को हर वर्…

समलैंगिक सम्बंधों के लिये जिम्मेदार कौन ?

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उपेक्षा ...................................
आज टी.वी चैनलों पर बड़ी बहस चल रही है समलैंगिकता पर और इस मुद्दे को मीडिया में इतना हाईलाईट किया जा रहा है जो ठीक नहीं हैं क्योंकि जब समाचार देखते समय छोटे बच्चे पूछते हैं कि इसका क्या मतलब है तो माता-पिता के पसीने छूट जातें हैं कि क्या जबाब दूँ|फिर वो ही बच्चा अपना प्रश्न किसी और से पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत तो कर लेता है पर अपने कोमल मन में उपजे उस वासना के अंतरद्वन्द को शांत नहीं कर पाता और वह अतत: गलत राह पर चल पड़ता है जो सिर्फ पतन की ओर ही जाती है|इस समलैंगिकता को हमने ही बढ़ावा दिया है |हमने अपने सपनों को अपने बच्चों पर जबरदस्ती थौप दिया है और इतना ही नहीं कि अपने बच्चों से अत्यधिक अपेक्षायें पालकर और सिर्फ अपने बच्चों को बढ़ता देखना और बार-बार उसे नीचा दिखाना कि तुमसे ज्यादा तो तुम्हारा दोस्त होशियार है |वो देखो ! दिन-रात पढ़ता है और सुन्दर भी | वो देखो ! सरकारी नौकरी में हैं तुम यहीं पड़े हो |वो देखो: मि. शर्मा का बेटा अमेरिका में शिफ्ट हो गया और एक हमारी किस्मत है बहुत खराब अरे !  वो तो नशीबवाले माँ-बाप हैं|ये सब जो झींटाकसी करते…

बहस का मुद्दा

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सहिष्णुता ..............................................
आज हम सभी ये रोज देख रहें हैं कि सभी न्यूज चैनल पर एक बहस शुरू तो हो जाती हैं पर वह मुद्दे से भटक के  निजि आरोप-प्रत्यारोप से घिर कर बस हंगामे और शोर पर खत्म हो जाती है समझ में नहीं आता कि हममें बस इतनी ही तितिक्षा बची है बस इतने ही सहिष्णु हैं हम|बुरा तो इस बात पर भी लगता है कि जब बहस का मुद्दा मंदिर-मस्जिद,शनि देव और सबको श्रद्धा -सब्र की बात कहने वाले सांई बाबा और गौ,गंगा और कन्या पर होती है जबकि हमारे देश में यह सभी पूज्यनीय हैं |अगर इन पर हम लोग बहस के नाम पर झगड़े करेगें राजनीति करेगें तो क्या इससे हमारे देश का नाम और प्रतिष्ठा कलंकित नहीं होगी |हमारा देश तो महान धार्मिक और स्वयं में तीर्थ देश कहलाता हैं |हम हमेसा सरकारों को कोसते हैं दूसरों पर दोषारोपण करते हैं पर खुद को नहीं देखते कि हमारे जीवन मूल्य कितने गिर गये|सोचो! उस समय हमारी सहनशीलता,संवेदना और दया कहाँ चली जाती है जब हमारी गाय दूध देना बन्द कर देती है,वह बूढ़ी-बीमार और कमजोर हो जाती है तो उसे बेसहारा सड़क पर छोड़ देते हैं झूंठन के नाम पर पॉलीथीनरू…