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Showing posts from January, 2016

सम्मान का अनुभव.....

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पीथयान मैग्जीन अखबार में हमारे और आपके पंसीदादा ब्लाग का जिक्र.......धन्यवाद पीथयान टीम और धन्यवाद शब्द प्रतिज्या अखबार टीम...!
हमारे शब्दों को जन-जन तक पहुँजाने के लिये बारम्बार धन्यवाद|
आपकी मित्र
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उ.प्र









कहानी

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मेरे चाचू ......................
शर्दी और उस पर ये बरसात दद्दा मरे जात हैं कसम से,अलाव से आग तापते हुऐ बेचे चाचा बोले,बड़ी ठण्ड हैं|तभी उनकी बात काटते हुऐ मलखे दद्दा बोलो,"जे क्या ठण्ड है |ठण्ड तो हमाये जमाने में पड़त ती छप्पर पर ओले की चद्दर बिछ जात ती और दिन रात बस आग का ही आसरा होत हतो बस बा थी ठण्ड पर अब तो मॉर्डन जमाना है रूम हीटर जला लेत लड़के बहू बस काहे की शर्दी यह सुन कर सब हंस पड़े|तभी सामने से गाँव में कुछ दिन छुट्टी पर आये ऐअर फोर्स के अधिकारी लोकेश कुमार आकर बोले,"अरे! चाचा बड़ी जोर की हंसी आ रही क्या बात है हम भी सुने|तभी बेचें चाचा बोले,"अरे! लला लोटन |तभी आलोक जी बोले लोटन बोलोगे तो हम नहीं बैठेंगें यहाँ|ये सुनकर सब बोले जा अंग्रेजी ने ना सब प्रेम खत्म कर दओ|लुटनवा में जो दुलार है वो लोकेश शब्द में नही |लोकेश ने मन ही मन सोचा गाँव के गँवार क्या जाने लाईफ क्या चीज स्टेन्डर्ड क्या....तभी पास में बैठी तोजी मौसी बोली,"बिटवा लोकेश जे बता बड़े शहर में क्या कुछ होत है...बता ना वहाँ की शादी पार्टी...कैसी होत |लोकेश ने घमण्ड में भर के कहा,"मौसी जी शादी…

मेरा संघर्ष : जीवन का एक पड़ाव

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शांति की रेखायें ............़़़़...................




दोस्तों इस नये साल में आपसे पुरानी बात करने का कोई मन नहीं पर बहुत मेल मिलते हैं कि मुझे लिखने की शक्ति कहाँ से मिलती है? हर किसी के क्यों और कैसे का जवाब आज मैं जरूर दूँगी तो दोस्तों लिखती तो बचपन से ही हूँ |जब सामने किसी दुखी, बीमार,गरीब विकलांग भिखारी को देखती तो तब उन दिनों हम भी बहुत गरीबा से जूझ रहे थे और बड़ी मुश्किल से गुजर होती थी तो उसकी कैसे मदद करते ? मगर मन बहुत करता कि उनको सीने से लगा लूँ |तो एक काम करती कि कॉपी पर एक कहानी बनाती उनको कहानी का पात्र बनाती और खुद को सुपर हीरो बनाकर उनको ढेर सारी खुशियाँ दे डालती और उनको अमीर और अच्छा इंसान बना देती, लिख डालती |एक दिन एक बहुत बीमार बाबा को खाना तो दे आयी पर उनकी खाँसी के लिये मेरे पास कुछ नहीं था पर तुरन्त घर आयी और कहानी में मैंने उन बाबा को बिलकुल ठीक कर दिया | बचपन ही था जो ठीक लगा सो कर दिया |लगभग दो-तीन दिन बाद वो बाबा दिखे और बोले बेटा तेरे टिफिन के खाने में जादू था मैं ठीक हो गया और हाँ रात को सपने में कोई आया जिसने मुझे सीने से लगा लिया भगवान थे शायद मैं देखो ब…