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Showing posts from September, 2015

बात जो सीधी दिल पर लगे.......

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Wrt.by Akanksha saxena District- Auraiya State -Uttar pradesh Date  - 6/09/2015


हमारी सबसे लोकप्रिय रचना पत्रिका में प्रकाशित....

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!! राधे भजन !!

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राधेरानी बनी हैं कोतवाल........... .......................................

राधे रानी बनी है थानेदार कन्हैया जी मुजरिम बने वृंदावन में लगी है कचहरी...लगी है कचहरी .. बलदाऊ जी बने हैं थानेदार......कन्हैया जी मुजरिम बने
दौड़ के आयीं सखियाँ सारी...सखियाँ सारी.. देख के हो गयीं सब हैरान कि काहे कान्हा मुजरिम बने हथकड़ियों में आज श्याम बँधे हैं.... फिर भी खड़े मुस्काय रहें हैं..... ऐसो देखो ना अचरज महान  कि काहे कान्हा मुजरिम बने........
बरसाने में लगी है कचहरी ..लगी है कचहरी.... सुदामा जी बहस कर रहें हैं .. उत्पात श्याम के ना कम हो रहैं हैं.. अब बहस में गये सब हार कि काहे कान्हा मुजरिम बने....
देखें सखियाँ देख रहे सब नर-नारी देखन आये हैं देवता हजार कि काहे कान्हा मुजरिम बने... राधे रानी ने पूछो है सवाल बताओ कान्हा तुम काहे मुजरिम बने
नटखट श्याम प्रेम से बोले राधे प्रेम ही मेरो है अपराध हर जन्म तेरो मुजरिम रहूँ                 तू मेरी अदालत करो मेरा फैसला
सदा रहना तू मेरी कोतवाल
 मैं सदा तेरा मुजरिम रहूँ

राधेरानी बनी है
कोतवाल कन्हैयाजी मुजरिम बनें..



......स्वहस्तरचित भजन रचना..... आकांक्षा…

!! शुभ जनमाष्टमी !!

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कान्हा भजन  .........................

कोई गोपाल पुकारे कोई गोविन्द पुकारे तू मेरा राजदुलारा तुझे तेरी मैया पुकारे
आँखों में बसजा अब तुझे धड़कन ये पुकारे तुझे मेरी ममता पुकारे तुझे तेरी मैया पुकारे
कोई घनश्याम पुकारे कोई रणछोड़ पुकारे तू मेरा राजदुलारा तुझे तेरी मैया पुकारे
आँखो में बसा है ऐसे चहूँओर लाल पुकारे तू मेरे श्वाँस की डोरी तुझे हर श्वाँस पुकारे
कहाँ छिपा है नटखट क्यों मुझे राह भुलावे तू मेरा राजदुलारा तुझे तेरी मैया पुकारे
तुझे सीने से लगा लूँ तुझे मेरी गोद पुकारे तू प्राणों से प्यारा तुझे ये पुकार पुकारे 
कोई भगवान पुकारे कोई दीनानाथ पुकारे मेरा प्यारा सा लल्ला तुझे तेरी मैया पुकारे

 आकांक्षा सक्सेना         11/01/2013 12:37 am Wrt. By Akanksha saxena District - Auraiya State- Uttar Pradesh


सुन्दरता......."आज"........!!

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सुन्दरता ............ सुंदरता सिर्फ धोखा,तन्हाई,आँसू और पछतावे के और कुछ नहीं देती बल्कि अच्छा स्वभाव सारी उम्र साथ देता है  इसे इस तरह समझो कि एक हीरा देखने में बहुत अाकर्षक लगता है और अगर पहन लो तो लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बना देता है |लेकिन अगर कोई इसे चख ले तो यह दुनिया का सबसे ख़तरऩाक ज़हर है और यह दुनिया की सबसे मंहगी,सबकी चाह खूबसूरत चीज दुनिया के सबसे कठोर पदार्थ के नाम से विख्यात है |  बात यहीं खत्म नहीं होती दोस्तों यह आँखों को चौंधियाँ देनेवाली चीज, इस दुनिया के सबसे पैने कटर के नाम से बदनाम भी है| इसलिये दोस्तों किसी की बदसूरती से उसकी शख्सियत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता |          हो सकता है शक्ल-सूरत से अजीब दिखने वाला इंसान एक अच्छा पथप्रदर्शक,शुभचिंतक, सच्चा प्रेमी और सबसे अच्छा मित्र साबित हो सकता है जो आपको जीवन की सच्ची संतुष्टी दे सकता है|    इसलिये दोस्तों इंसानियत की इज्जत करो |सदगुणों से प्रेम करो क्योंकि सदगुण कभी कुरूप नहीं होते और सुन्दरता सदैव नहीं रहती |


wrt by Akanksha saxena  आकांक्षा सक्सेना जिला - औरैया उत्तर प्रदेश

Eye.....

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True Eye ...............

Each student has his teacher's eyes, they see the world through the eyes of his teacher.

Every teacher who is that person for me any of his statements and behavior give a change of heart.

Teacher's Day to all the friends you greetings from the depths of the heart.



Written by
Akanksha saxena
District- Auraiya
State - Uttar Pradesh            
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जीवन का शिक्षक कौन....?

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शिक्षक और  शिक्षा ..............................




शिक्षा का अर्थ है जो हमें जीवन की विसंगतियों से जूझ कर उनसे उबरने की दक्षता प्रदान करें|

मनुस्य का जीवन जो आशावादी बनाकर समाजहित में लगा दे,वो है शिक्षक |

जीवन को जो सरल बना दे वो है शिक्षक |

शिक्षक सम्पूर्ण जीवन का मार्गदर्शन ही नहीं करते बल्कि
मार्गदर्शन देने के लायक भी बना देते हैं |

          पर, जीवन का सही मायनों में जो शिक्षक है वो
है ," दुःख" |दुःख सबसे अच्छा शिक्षक है क्योंकि जितना दुःख हमें सिखा और समझा जाते हैं उतना कोई हमें नहीं सिखा सकता |

              दुःख हमें भीतर तक झकझोर कर हमें भीतर से तराशते हुऐ बाहर तक चमका देता है,ये चमक और कुछ नही बल्कि हमारे स्वःअनुभव से सीखा गया व्यवहार और खुद के जीवन्त सूत्र होते हैं जिनको हमने ही रचा होता है | अपनी परेशानियों रूपी सवालों को हल करने के लिये, स्वयं के अनुभव से |जीवन में स्वंय के अनुभव ही हमें मंजिल तक पहुँचाते है और मंजिल तक जाने वाले रास्तों में सही रास्ता चुनने में स्वंय को विश्वासी और मजबूत पातें हैं |

                इसलिये अब आधुनिक और यांत्रिक युग है|समय बदल …