Friday, August 28, 2015

मिल रहा है प्यार और सम्मान......देखो !! मशहूर अभिनेता शेैलेन्द्र श्रीवास्तव जी का कॉमेन्टस..

मशहूर अभिनेता शैलेन्द्र श्रीवास्तव जी का ब्लाग 
समाज और हम की तरफ से अभिनंदन करते हैं |











त्योहार राखी का..जिसे रक्षाबंधन कहते हैं |


राखी

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आप सभी मित्रों को रक्षाबंधन त्योहार की
 हार्दिक बधाई|
यह त्योहार भाई बहन के अटल प्रेम का प्रतीक है |
इस त्योहार में जब बहन भाई की कलाई पर निस्वार्थ प्रेम  का धागा बांधती है तो भाई ताउम्र उसकी रक्षा करने का वचन देता है पर आज समाज के हालात बहुत बिगड़ गये हैं तो समाज और हम ब्लोग की तरफ से हम आप सभी से निवेदन करते हैं कि इस बार अपनी बहन से राखी बंधवाते समय आप यह भी वचन लीजिये कि जो सम्मान आज मैं अपनी बहन को दे रहा हूँ वही सम्मान में अपनी गली,मोहल्ले,कॉलेज और समाज की हर लड़की को दे सकूँ |बहन भी यह वादा करे कि वो जो इज्जत अपने भाई को देती है वैसे ही साथ पढ़ने वाले और साथ कार्य करने वाले हर लड़के को वही इज्जत देगीं हमेशा|
यह त्योहार निस्वार्थ प्रेम और सम्मान का प्रतीक है|
आइये इस त्योहार को हम हृदय से मनायें,और स्वभाव में उतारें भी तभी रक्षाबंधन त्योहार सचमुच एक सच्चा त्योहार सार्थक होगा |

आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उत्तर प्रदेश






Thursday, August 27, 2015

नायक

   

रियल हीरो....


सही मानसिकता और समाजहित में कुछ नया करने जुनून ही आगे चलकर आपको रियल हीरो बना देता है|
दुनिया में उस परम शक्ति ने हम और आपको रियल हीरो होने के लिये ही भेजा है....पर  हम क्या बन गये हैं...सोचो ?
समाज और हम ब्लोग के जरिये समाजहित में एक छोटा कदम है....

आकांक्षा सक्सेना




Wednesday, August 26, 2015

गुमनाम मुसाफ़िर

     




      गुमनाम आशियाना

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गुमनाम दिल तेरा दिवाना

तेरी याद ही मेरी जॉन अब मेरा आशियाना

दोस्त, कामयाबी के रास्ते गुमनामी से हैं जाते

तेरी नजरों से रोज मिलकर वापस हम लौट आते

तू वक्त है तो मुझ में बदल

तू नज़र है तो मुझ में ठहर

तू बुझी तो मैं कहाँ धहकूँगा

तेरे होठों से फिसला हूँ

बोलो अब कहाँ जाऊँगा

बदनाम है एक शब्द

पूरी दुनिया है जिसका ठिकाना

वो प्यार है मेरी जाँन

बदनाम जिसका आशियाना

मेरी श्वांस में घुली है तेरी श्वांस की वो जाँ

मेरी प्यास ही मेरी जॉन मेरा अब ठिकाना

अब ख्वाबों में ही सिमट जा

मेरी जाँन जानेजाना

तू ही है मेरी मंजिल मैं मुसाफिर तेरा पुराना

शदियों से इस जहाँ में अपना है आना-जाना

मैं गुमनाम दिल हूँ तेरा तू मेरा गुमनाम आशियाना



स्वहस्तरचित                  
आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
उ.प्र
दिनांक 26 अगस्त 2015
दिन  बुधवार
समय  शाम 12:15








मिल रहा लोगों का प्यार और सम्मान...

आने लगे अॉफर फिल्म में कहानी लिखने के
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माननीय मुख्यमंत्री जी ने "समाज और हम" में खुद को add किया है.......धन्यवाद, मुख्यमंत्री जी...










Monday, August 17, 2015

जीवन की वास्तविकता ..





               वास्तविक

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हमारे एक मित्र ने कहा आज इंसान चाँद और मंगल पर जा पहुँचा है सोचता हूँ आखिर! दुनिया में सबसे कठिन कार्य क्या होगा? ऐसा जो इंसान की हद से बाहर हो |यानि कि इंसान के जीवन का असम्भव कार्य क्या है?तुम कुछ बोलो इस सम्बंध में,...

हमने कहा," हाँ, वैसे तुमने ठीक कहा कि इंसान चाँद,मंगल तक पहुँच गया है | वो दुनिया का बड़े से बड़ा कार्य कर सकता है|उसने ऐवरेस्ट चोटी फतह की|
उसने जंगी जहाज समुद्र में चलाये और हवा में उड़ाने की काबीलियत दुनिया को दिखायी|उसने हर असम्भव को सम्भव करने में अपनी दिमागी शक्ति झोंक डाली है पर एक कार्य है ऐसा जो इंसान करने में खुद को असहज महसूस करता है|

वो कार्य है खुद की बुराई करना|

खुद की गलती महसूस करके उसको प्रकट कर देना|
ऐसा कई बार होता है कि हम गलत सिद्ध होते हुए भी ढ़ेरों झूठ बोलकर अपनी गलती छिपा लेते हैं|हम कभी इतनी हिम्मत ही नहीं बटाेर पाते कि खुद की गलती उजागर कर सके|खुद की बुराई और गलती दुनिया के सामने उजागर करना दुनिया का असम्भव कार्य है|
मित्र ने पूछा," आखिर! कौन कर सकता है यह कार्य?
यह कार्य एक सुलझा हुआ इंसान कर सकता है |

मित्र ने सोमवार
सुलझा इंसान?

हमने कहा," हाँ,सुलझा इंसान जो ना तो आस्तिक होता है और ना नास्तिक होता है वो जीवन में वास्तविक होता है |इसलिये इंसान को इंसान ही रहना कम होगा उसको जीवन में वास्तविक इंसान बनना होगा|

हम दोनो ने एक ही बात पर पहुँचे कि आज वास्तविक होना बहुत कठिन है |आज वास्तविक होना असम्भव है|यही जीवन की वास्तविकता भी है|

                                     
                                     
 आकांक्षा  सक्सेना
दिनांक 17/08/2015
समय 3:45 pm
दिन सोमवार

             

जीन्स को लेकर समाज की राय.....

      संकीर्णता

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मेरी एक मित्र ने पूछा कि संकीर्णता क्या हैं ? किसी सरल घटना से समझाओ जिससे मुझे समझ आ जाये|
हमने कहा," सुनो, ये दो सहेलियों का वार्तालाप से समझो |

सहेली रेखा," सुनो सोनल की माँ,कल तुम कहाँ गयीं थी? मैं  आयी और वापस लौट गयी|

सोनल की माँ," वो मैं अपनी पुरानी सहेली के घर गयी थी |
सहेली रेखा,"कोई खास काम था क्या?
सोनल की माँ," सोचा उसकी लड़की शादी लायक हो गयी है काफी पढ़ी एम.बी.ए तो सोचा अपने गौरव के लिये देख लूँ,गौरव भी उसको पसंद करता है| ये बात मैं जानती हूँ|

सहेली रेखा," हाँ,तो परेशानी क्या है कर डालो शादी बच्चों की खुशी में अपनी खुशी|"

तभी अचानक सोनल चश्मा लगाये बाल खोले पटियाला सलवार पहने अपनी माँ और आंटी(रेखा) को नज़रअंदाज करती हुई ऊपर अपने कमरे में चली गयी|
सहेली रेखा को सोनल का यह व्यवहार बिल्कुल अच्छा न लगा|

तभी सोनल की माँ पानी और पेठा लेकर आयी और बोली लो पानी पी लो,गरमी आजकल बहुत हो रही है|

सहेली रेखा पानी पीकर बोली,"चलो,फिर गौरव की शादी कब है?

सोनल की माँ,"मुझे वो लड़की ही पसंद नहीं आयी जब आयी|जब दूसरी अच्छी लड़की देखूंगी तब करूगीं अपने गौरव की शादी लड़की ऐसी हो जो घर लेके चले
संस्कारी हो |

सहेली रेखा," अच्छा,ये बताओ तुम्हारी उस सहेली की बेटी का नाम क्या है|

सोनल की माँ," शिवानी|"

रेखा,"तो,शिवानी ने तुमको देख कर नमस्ते की ?

सोनल की माँ,"हाँ,नमस्ते की ,उसने तुरन्त मेरे लिये चाय बनायी और गरमागरम पकोड़े भी बनाये पास बैठी हंसती रही बतियाती भी रही|

रेखा,"तो,कमी क्या लगी उसमें ?

सोनल की माँ,"वो जीन्स टी-शर्ट पहने थी|

ऐसी लड़कियाँ क्या घर परिवार समभालेंगी बोलो?
 मैने गौरव से कह दिया अब उसकी बात ना करे|

सहेली रेखा," पहनावा से क्या,उसका स्वभाव तो अच्छा है |अतिथि का सम्मान करना जानती है |बृद्धाआस्रम में जितने भी बुजुर्ग हैं उन सभी को क्या जीन्सवाली बहुओं ने उन्हें वहाँ पहुँचाया ? तुम्हारी बड़ी बेटी को ससुराली जनों ने घर से निकाल दिया क्या वो भी जीन्स पहनती थी नहीं ना फिर अरे! हम तुम ने भी तो अपने जमाने मैं वेलवॉटम पहने थे तो क्या हम लोगों ने गृहस्थी नहीं देखी? सोचो! जब तुम दूसरे के लड़की के लिये ऐसे सोच सकती हो तो कल के दिन तुम्हारी भी लड़की को लोग देखने आयेगें वो क्या बोलेगें?

सोनल की माँ,"मेरी सोनल तो पटियाला सूट दुपट्टा पहनती है|"

रेखा," हाँ,पहनती है,पर मुझसे, नमस्ते तक ना करी उसने ....बुरा मत मानना, पहनावा नहीं संस्कार देखो
खुशदिल स्वभाव देखो| बहू को बेटी समझो,घर में कामकरनेवाली फ्री की नोकरानी नहीं,घर बच्चे सम्भालनेवाली आया नहीं|

सोनल की माँ ," कुछ सोच पाती,तभी सोनल बोली मॉम में अपने फ्रैंन्डस के साथ मूवी देखने जा रही हूँ,मेरा खाना मत बनाना|"

रेखा," बोली,मैं चलती हूँ,ये अपने दिमाग की संकीर्णता खत्म करो और जिंदगी मैं सही फैसले लो किसी के कपड़ों से उसके बारे में गलत राय न बनायें|

सोनल की माँ,"तुम शायद सच कह रही हो|"

रेखा के चले जाने के बाद ये रेखा की बच्ची मुझे
समझा रहीं ये समाज तो चाहता है कि कोई जीन्स वाली
बहू आ जाये और हम पिटें रोज वो मुझे रोटी भी न दे और घर से निकाल दे|

मैं न आनेवाली इन लोग की बातों में|
.....................................

देखो ! मित्र यही है दिमाग की संकीर्णता की रेखा के समझाने से सोनल की माँ पर कोई असर न हुआ वो ये सोचती रहीं कि में रेखा की बात मानकर छोटी सिद्ध न हो जाऊँ | इंसान में जो अंह की भावना है ना यही संकीर्णता हैं जो इंसान का इंसानियतरूपी कद बढ़ने ही नहीं देती |
                                         
                           
स्वहस्तरचित
आकांक्षा सक्सेना
दिनांक 12/08/2015
समय 12:15pm

       



   

Friday, August 14, 2015

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें |

    स्वतंत्रता

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जब तक हम अपनी दकियानूसी सोच से स्वंय को मुक्त नहीं करते तब तक ना ही हम विकाश के शिखर को छू सकते हैं और न ही हम सही मायने में स्वतंत्र ही कहे जा सकते हैं |



                 
   आकांक्षा सक्सेना        
दिनांक 15 अगस्त 2015
समय 11:02



.........................जयहिन्द......................................








Monday, August 10, 2015

छोड़ो अब बहुत हुआ.....



   सुन रे सखी


......................            

हम ना हिन्दू हैं मित्रों हम ना मुसलमान हैं
हम ना सिक्ख हैं मित्रों हम ना ईसाई हैं

देखो खुद को देखो हमको देखो चारो ओर सखी
हम मानव हैं हम मानव हैं मानवता अपना ईमान सखी

देखो अपने दिल में झाकों देखो अपना हाल सखी
इस जात-पात दीन-धर्म के कारण बट गया इंसान सखी

लूटा है झूठे वादे करके लूटा है कुछ धूर्तों ने सखी
विध्वंश किया है परिवारों का बर्बाद किया पूरा देश सखी

दिल भी खरीदे इन ज़ालिमों ने तगड़ी वसूली करली है
देशभक्तों की कुर्वानी का मलाल नही है इनको सखी

सोचो हम है कौन सखी और हम कहाँ से आये हैं
एक है मालिक एक है धड़कन रक्त भी देखो लाल सखी

बस अपनी पूजा करवाने का शौक़ पुराना इनका सखी
अब तो जागो अब तो सुनो अंतरात्मा की पुकार सखी

तेरा-मेरा मेरा-तेरा बस छोड़ो अब बहुत हुआ
आओ सब साथ में बोलो मानवता धर्म अपना सखी

बोलो सखी बोलो मित्रों आकांक्षा ने क्या गलत कहा
वही कहा है वही कहा है जो हम-आप ने महसूस किया

किसी की बुराई की हो जो हमने तो हम माफी चाहते हैं
चाहते हैं बस इतना कि अब ना टुकड़ो में बँटना चाहते हैं

                               
                                           

                                   आकांक्षा सक्सेना
                                   दिनांक 22/08/2012
                                   समय 9:45 pm

समाजहित की भावना ही शिवत्व....





         सच्चा जलाभिषेक


भगवान शिव ही सत्य है|भगवान शिव हिमालय पर वाश करते हैं|हर तरफ वर्फ ही वर्फ फिर उनको जलाभिषेक प्रिय क्यों है ? सावन में तो वैसे भी पानी बहुत बरसता है| फिर क्यों है सावन में जलाभिषेक का
महत्व ? प्रकृति जो भगवान शिव की शक्ति है वह मनुष्य को यह समझाती है जिस तरह बादल बरस कर पूरी शिवमय धरती का समभाव से जलाभिषेक करते हैं|उसे हरा-भरा और सुन्दर बनाकर पूरे पर्यारण में सुगंधित घोल देते हैं|इसी प्रकार मनुष्य को भी जल के रूप में अपने अंहकार और बुराइयों को भगवान शिव को अर्पण कर देना और समाज में अच्छे कार्य करने का संकल्प लेना ही सच्ची शिव भक्ति होगी|समाजहित की भावना ही शिवत्व है|मनुष्य प्रेम और समभाव से अपने घर, समाज और देश को सुन्दर बनायें|यही सच्चा जलाभिषेक होगा|
     आइये स्रद्धा के इस सावन में समाजहित और राष्ट्रहित की भावना लेकर जीवन रूपी सफर को खूबसूरत और सुगम बनायें|




 ..........ऊँ नमः शिवाय...............

                                      आकांक्षा सक्सेना   
                                      जिला औरैया
                                      दिनांक 10/08/2015
                                      समय 11:40 am   
                                      दिन सोमवार                 


Saturday, August 8, 2015

खुशखबरी....


न्याय मिल गया.....


सामानता का अधिकार मिलने से खुशी की लहर
हाईकोर्ट ने......
 TET 2011 में 82 अंक पाने वाले सभी
 अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण मान लिया है 15000 अध्यापक भर्ती में 28 अगस्त से सामान्य वर्ग के 82 अंक पाने वाले भी होंगे पात्र......जल्दी हो ज्वाइनिंग नवम्बर में 5 साल हो जायेगें....टी.ई.टी 2011 को........





       






कविता

                       

                  यादों की रानी


वो यादों की रानी है यादों में उतरती है
कभी आँखो से बरसती है कभी जामों में झलकती है
मेरी दिल की सीड़ी पर वो चढ़ती उतरती है 
वो यादों की रानी है यादों में उतरती है...

मैने करली थी ये जिद्द सोचूँ न कभी उसको
वो,आँखो के सामने से हर वक्त गुजरती है
आँखे बन्द करता हूँ तो सपना बन जाती है
आँखों को जो मैं खोलूँ सामने खड़ी मुस्काती है
मेरा मन ही मुझको यारों पागल ठहराता है
मुझे समझ नही आता मुझे क्या हो जाता है

भूल के भी उसको यारों मैं भूल न पाता हूँ
यादों में आकर के वो कुछ एेसे लिपटती है
दिन,दोपेहर,रात का अब असर नहीं मुझपर
हर पहर से निकल के वो मेरी रात बन जाती है
मेरी यादों की दुनिया की वो अबूझ पहेली है
कभी फूलों में उतरती है कभी तारों में चमकती है
फिर,ज़ालिम ओस बनके वो मुझपे बरसती है

मेरे दिल को तड़पा के वो आँसू में उतरती है
तस्वीर में हँसती है तस्वीर में सजती है
यादों में उसकी ही हुकूमत चलती है
कभी गर्म हवा बनकर मुझको छू जाती है
कभी शर्द हवा बन कर मुझको तड़पाती है

मैने ढूँढना चाहा तो मिलती है यादों में
पुकारता हूँ उसको आती है ख्वाबों में
उसकी डांट मेरा हर ख्वाब टुड़ाती है
फिर,सामने धूप बनकर वो मुझको जगाती है

मेरी जॉन तेरी मुझको बहुत याद सताती है
आजा कहीं से तू अब जॉन ये जाती है
तू मेरी कहानी है तू मेरी ज़ुबानी है
तेरी याद में मेरी जॉन इक उम्र गुज़ारी है

मॉफ करदे मुझे मेरी जाँ बस इतनी गुज़ारिस है
ले ले मेरी ये जॉन ये जॉन तुम्हारी है
अब आजा कहीं से तू लगजा मेरे सीने से
मर जाऊंगा तेरे बिना तू हर श्वांस की रानी है

          तू मेरे दिल की रानी है
          मेरी रूह में उतरती है
          तू मेरे दिल की रानी है
          दिन रात धड़कती है

                                       
 
 
                                 
                                                                                                             आकांक्षा सक्सेना                                                         Saturday
                                        8:45am
                                        8/10/2011





गीत






दिल का हर साज हो तुम......


दिल का हर साज हो तुम 
मन की आवाज हो तुम
मेरी अँखियों में बसे 
मेरे हमराज हो तुम

       दिल का हर साज हो तुम,मन की आवाज हो तुम

रातों में जब भी जाँगू 
तुझे ही सामने पाऊँ
मेरी धड़कन में बसे
मेरे सरताज हो तुम

         दिल का हर साज हो तुम,मन की आवाज हो तुम

जिधर भी मैं देखूँ
तू ही तू नज़र आये
मेरी श्वासों में बसे
मेरे भगवान हो तुम

         दिल का हर साज हो तुम,मन की आवाज हो तुम

आईना जो मैं देखूँ
तेरा ही अक्स पाऊँ
मेरी पलकों में बसे
हसीन ख्वाब हो तुम

         दिल का हर साज हो तुम,मन की आवाज हो तुम





                                     आकांक्षा सक्सेना
                                      25/09/2011
                                       Monday 8:35 am