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Showing posts from 2013

न पूछो जनाब

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दिल की हालत
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दिल में चुभन है
निगाहों में प्यास
मेरे दिल की हालत
बहुत ही ख़राब
दिल फेंक आशिक़
बहुत घूमते 
पहनाते लैला को
हवस की पाज़ेब
दिल होता कलम
निगाहें सुनाती फ़रमान
मेरे दिल की हालत
बहुत ही ख़राब 
दिल फेंक आशिक़
कुछ  ऐसे भी  है
बना डालते लैला को
जुल्म की एक क़िताब
दिल मैं टकराव
निगाहों मैं झुकाव
मेरे दिल की हालत
बहुत ही ख़राब 
अब दोस्तों भी
डाले रखती नकाब
हर दिल को पड़ी
आज धोखे की मार
दिल भी एक सवाल
निगाह भी एक सवाल
मेरे दिल की  हालत
बहुत ही ख़राब 
आज इंसान की
कोई कीमत नही
दिल बिकने लगे
संकरी गलियों मैं आज 
दिल में घूरता मातम
फिर भी निगाहों में सलाम
मेरे दिल की हालत
ना पूछो जनाब 
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आकांक्षा सक्सेना
जिला -औरैया
उत्तर प्रदेश
९मार्च २००१३
शनिवार
सुबह ११:२०  

कुर्सी ....कुर्सी ......कुर्सी का नशा ......

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आग बेबसी की ..
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ये कैसी बरसात है दोस्त 
न पानी न ओले है 
बरस रही ये आग सभी पर 
ये कैसे छलों के अँधेरे हैं 

ये कैसी आंधी है दोस्त 
न पत्ते उड़े न धूल उड़े 
ज़िस्मों से चुस  रहा 
लहू सभी का,
ये कैसे पिशाच लुटेरे हैं 

ये कैसी बिजली चमकी दोस्त 
न कड़कना न गिरना जाने 
इस हरक़त से मन, 
त्रस्त सभी का 
ये कैसे कुर्सी को घेरे हैं 
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आकांक्षा सक्सेना 
जिला- औरैया 
उत्तर प्रदेश 

बहुत किस्मत से मिलते है

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बहुत किस्मत से
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बहुत किस्मत से मिलते है दिलवाले किसी को 

मासूमियत की हिफाज़त करनेवाले किसी को 


सड़कों पर घूमते आँसुओं को 

अपनी पलकों पे सजालेनेवाले किसी को 


बहुत किस्मत से मिलते है हौसला बढ़ानेवाले किसी को

बहुत किस्मत से मिलते है निभानेवाले किसी को 


तंग हालत से घिरी लड़की को अपनानेवाले किसी को 

बहुत किस्मत से मिलते है चाहनेवाले किसी को 


बहुत किस्मत से मिलते है मिटनेवाले किसी को 

एक गरीब मित्र को कीमती सोफे पर बैठाने वाले किसी को 


बहुत किस्मत से मिलते है सत्य को स्वीकारने वाले

किसी को ...
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 आकांक्षा सक्सेना जिला -औरैया 

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आज प्रेम को
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आज  जिस्म को ज़िस्म से इतना लपेटा जाता है,इतना लपेटा जाता है
 क़ि लिपट -लिपट कर घुटन से उसका दम उखड जाता है ।




आकांक्षा सक्सेना
जिला औरैया
४ मार्च 2013
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सच समाज का  .................

खुबसूरत धुंध 

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मेरी अखियों को मिला
ख्वाब सुनहरा था
मेरे दिल को कोमल
पंखुड़ियों ने घेर था
तितलियों से आकर्षण का
मेरे नर्म होंठों पर रहता
उसकी चाहत का पहरा था
रोम -रोम में उसकी छुअन का
रहता इंतजार गहरा था
खिचने लगी बिन डोर उसकी
उसकी गर्म स्वांसों की ओर
मेरे दिल ने चुना,वो शख्स
हीरा था 
आज शाम हो रही नशीली थी
उसकी आहटों की मस्त
सुगंध फैली थी
क्या पता था आज
क्या होनेवाला था
दीदार उसका किसी भी
पल होने वाला था
उसकी परछाई मेरी परछाई
ये जा टकराई,ऐसा लगा मानो
स्वांस की स्वांस जा रही
उसकी निगाहें ज़िस्म पर
टिकी रह गयीं 
उसकी हर छुअन
ज़िस्म मैं ही सिमट गयीं
सारी ख्वाहिसें दम तोड़ने लगीं
मुस्कुरायीं मारे दर्द से आंखें
मेरी ,
मुझे प्रेम का हुआ एक भ्रम था
वो सिर्फ एक खुबसूरत धुंध था 

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आकांक्षा सक्सेना
जिला- औरैया
मार्च २०१३ 

दर्द के रंग

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दर्द के रंग                      ...................








देखो होली आई प्रिये 
आओ मिला कर नाचे गायें हम 
हर तखलीफ़ को भूल जायें हम 
रंगों कि मादक खुशबू में 
पोर -पोर भीग जायें हम 

में कैसे सज - धज आऊँ पिया 
 में कैसे त्योहार मनाऊँ पिया
मेरे हृदय के घाव हरे हैं  
में कैसे रंगों को हाथ 
लगाऊं पिया 

जब आज शहीद का शव 
बिन सिर के घर 
पहुँचाया जाता है 
शहीद कि पत्नी से 
अंतिम दर्शन भी 
छीना जाता है 
तो,इसी दर्द दोपहरी में 
मैं कैसे अश्रु छुपाऊँ पिया 


जब दुधमुही बेटी के साथ 
कुकृत्य हो जाता है 
फिर मुजरिम घर- परिवारी 
ही पकड़ा जाता है 
तो सोचो कैसा लगता है 
जीवन को दबाह करनेवाला 
चाँद सिक्कों मैं छूट घर 
आता है ,दिलों मैं लगी 
इस आग को देखकर 
मैं कैसे होलिका दहन 
कराऊं पिया 

 कभी जिनके आगन में
 तुलसी पर घी का
 दीपक जलता था 
 आज उसी घर का बच्चा
 सूखी रोटी से पला जाता है 
 तो ऐसी प्यासी महगाई 
 में, मैं कैसे होली के मिष्ठान 
 बनाऊं पिया 

देखो देश का भविष्य 
सड़कों पे रिक्शा खींच रहा 
सुनहरे सपनो की होली 
हर रोज़ हर दिल में
जलती रहती है 
बोलो,अब कौन सी होली 
मनाऊँ पिया 
मैं कैसे सब कुछ
भूल जाऊं  पिया 

अब दर्द से हाँथ कराह उठे
तुम्हें कैसे रंग लगा…

होली गीत

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    होली गीत 


..होली के दिन .श्री कृष्ण जी अपनी प्राणप्रिये राधे से कहते हैं ...देखो क्या कहते हैं ...




देखो होली आई प्रिये 
आओ प्रेम का रंग
 लगाओ प्रिये 
हर बात को भूल के 
रंगों की खुशबू में 
खो जाओ प्रिये 
रंगों के शीतल जल से 
जीवन बगिया को 
 महकायें प्रिये 
उस गुलाबी स्पर्श  का 
कब तक करूं 
इंतजार प्रिये 
अब आ भी जाओ 
कहीं से तुम 
मुस्कान की चूड़ियाँ
खनखाती प्रिये 
मेरे हृदय को फाल्गुन
बनाने प्रिये 
रंगों से भरी गगरी लेकर 
आओ अपने श्याम को 
भिगोने प्रिये 
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आकांक्षा सक्सेना 
 सुबह १०:३५ 
७ मार्च २०१३ 

रंग होली के

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रंग होली के ......................




रंग होली के सबको सुहाने लगते हैं 
अरे ! अस्सी साल के दादा भी 
आज दीवाने लगते हैं 

 रंग होली के देखो गज़ब कर जाते हैं 
 काले गोरे सभी को
 एक कर जाते हैं  

रंग होली के देखो क़यामत करते हैं 
होली के बहाने लोग गालों को 
छूने की हिमाकत करते हैं 

रंग होली के देखो मगन कर जाते हैं 
रंगे फटे -पुराने कपड़े पहने 
सभी झूमते नज़र आते हैं   

रंग होली देखो प्रेम बरसाते हैं 
रंग से भरी एक मुठ्ठी से 
लोग तन -मन में बस जाते हैं 

रंग होली के देखो कितना सिखा जाते हैं 
आपस प्रेम और सम्मान से रहने का 
  शांति सन्देश दे जाते हैं 







आकांक्षा सक्सेना 
जिला - औरैया 
ये पंक्तियाँ लिखने का समय 
साझ ३:४० 
७ मार्च २०१३ 

ये नंगी चट्टानें है

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ये नंगी चट्टानें है 
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ये नंगी चट्टानें है 

इनका कोई दिल ही नहीं 

और जब दिल ही नही तो 

दिल में जज्बात नही 

देखो सड़कों के किनारे 

आज लेटे है ठिठुरते 

दिल अनेका अनेक 



ये नंगी चट्टानें है 

इनमें कोई भाव नही 

छोटे छोटे मासूम यहाँ
लड़ते है रोज़ गरीबी से 

हर दिल की बोली

लगानेवालों की

बहुत लम्बी है 

कतार यहाँ 



ये नंगी चट्टानें है 

इनके अन्दर जीवन ही नही 

जीवन का अर्थ वो क्या जाने 

जो जड़ ही जन्मते

जय माँ राधारानी

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प्रेम रूप माँ राधारानी ........................



प्रेमपूर्ण माँ राधारानी 



अब तो सुन लो एक बात हमारी 


तुम हो प्यारे सावरे की धड़कन 


तुम से है क्या बात छिपानी 



        अब तो सुन लो ये बात हमारी 

 दर्शन  दे दो माँ राधारानी 

 जीवन भक्तों का दुखों से भरा 
दुनिया में बहती स्वार्थ की धारा 
भक्तों की नैया मझदार में है 
का दो सबका बड़ा पार ओ माँ 

         आ जाओ माँ ये अरज हमारी 
         सुन लो पुकार ओ ! बरसानेवाली 

तुम सारे जगत की माँ हो 
प्रेम रूप माँ शक्ति माँ हो 

ऋषियों मुनियों ने माँ ध्यान लगाया 
भक्तों ने हमेसा गुणगान तेरा गाया 

          अब आ भी जाओ जग माता 
           ये जन्म सुधारो जग माता 
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                   *जय श्री राधेकृष्ण* ............................................................            आकांक्षा सक्सेना            जिला - औरैया             उत्तर प्रदेश

कायल हूँ

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             कायल हूँ  ..........................................................................................................
नाथों के नाथ ओ श्याम मनोहर 
भक्तों की डांट-फटकार सुनो 
वो बुरा भी बोले तो बुरा सुनो 
वो गुस्से से उबले वो भी सुनो 
बस तुमसे एक गुज़ारिस है तुम प्रेम प्रभु हो बस प्रेम करो 
हम मूरख है हम पागल है 
तेरी भक्ति मैं प्रभु घायल हैं 
जो मीठा दर्द है तेरी भक्ति में 
बस उस दर्द के हम प्रभु कायल हैं ।
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आकांक्षा सक्सेना  जिला -औरैया  उत्तर प्रदेश 

ये प्यार है या कोई जंग प्रभु

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ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 
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ये प्यार है या कोई जंग प्रभु 
लेन-देन का खेल यहाँ  ये व्यापार है या कोई बाज़ार प्रभु 
ये प्यार है या कोई जंग प्रभु  बस आगे जाने की होड़ यहाँ  ये घर है या घुड़दौड़ मैदान प्रभु 
ये प्यार है या कोई जंग प्रभु  जब पैसा ही भगवान बना  ये इंसान है या रोबोट प्रभु 
ये प्यार है या कोई जंग प्रभु  गौ माता को काट बना हत्यारा  ये इंसान है या कोई दैत्य प्रभु 
ये प्यार है या कोई जंग प्रभु  ये संसार है या कोई स्वप्न प्रभु  जो घट रहा है वो असहनीय है प्रभु 
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आकांक्षा सक्सेना  जिला -औरैया  उत्तर प्रदेश