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कन्हैया जी ......

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कन्हैया जी मुझे तुम बिन अब न ज़ीना 

कब राह तकूँ मैं,

जुदाई ज़हर अब न पीना 

कन्हैया जी मुझे तुम बिन अब न ज़ीना 

पंछी बना दो मुझे श्याम सुन्दर 

बोलो कहाँ उड़ आऊं,


अब न तुम आजमाओ जी हमको 

छलिया तेरा छल अब न सहना 

कन्हैया जी मुझे तुम बिन अब न ज़ीना 

रोम-रोम मेरा तुम्हें पुकारे 

सबकुछ तेरे चरणों मैं अर्पण 

अब,तू ही मेरी बन जा धड़कन 

कान्हा बस इतना करना 

कन्हैया जी मुझे तुम बिन अब न ज़ीना 

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                             आकांक्षा सक्सेना 
                             बाबरपुर ,औरैया 
                                  उत्तरप्रदेश 


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श्री कृष्ण जिन्हें बनाते हैं ...
.................... श्री कृष्ण जिन्हें बनाते हैं उन्हें कोई नहीं मिटा पाए 
श्री कृष्ण जिन्हें उठाते हैं उन्हें कोई नही गिरा पाए
  श्री कृष्ण हरे गोविन्द हरे गोपाल हरे श्री कृष्ण हरे ।।

भगवन जिनके हो जाते हैं उन्हें कोई नही सता पाए 
भगवन जिनको हँसाते हैं उन्हें कोई नहीं रुला पाए 

  श्री कृष्ण हरे गोविंद हरे गोपाल हरे श्री कृष्ण हरे ।।

श्री कृष्ण जिन्हें बुलाते हैं उन्हें कोई नही रुका पाए

श्री कृष्ण जिन्हें मिलाते हैं उन्हें कोई जुदा न कर पाए
  श्री कृष्ण हरे गोविंद हरे गोपाल हरे श्री कृष्ण हरे ।।

प्रभु दर्शन जिनको कराते हैं उन्हें कोई नहीं समझ पाए
परमानंद मैं जो खो जाते हैं उन्हें कोई नहीं डिगा पाए 

  श्री कृष्ण हरे गोविंद हरे गोपाल हरे श्री कृष्ण हरे ।।

प्रभु मित्र जिनको बनाते हैं सुदामा से तर जाते हैं 
प्रभु रिश्ता यूँ निभाते हैं बालक ध्रुव,प्रहलाद कहलाते हैं
  श्री कृष्ण हरे गोविंद हरे गोपाल हरे श्री कृष्ण हरे।। 

प्रभु रक्षा वचन जो निभाते हैं द्रोपती की लाज बचाते हैं 
संतो की वाणी मैं आकर प्रभु मानवता धर्म सिखाते हैं

  श्रीकृष्ण हरे गोविंदहरे गोपाल हरे श्री कृष्ण हरे …
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जय माँ गंगे            *************** जय माँ गंगे जय माँगंगे जयतारनहारीमाँ गंगे जय मोक्षदायनी माँ गंगे जय माँ गंगे जय माँ गंगे
निर्मल पावन नाम तेरा माँ गंगे निर्मल पावन जल तेरा माँ गंगे आप क्षमादात्री माँ गंगे आप दया की देवी माँ गंगे

आप स्वर्ग की महादेवी माँ गंगे
भागीरथ ने तपस्या की माँ गंगे
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दहेज़ कैंसर 
ब्याह + स्वार्थ = (बाजार )...........................................................आज कल अख़बार मैं विज्ञापन आता है | लड़की गोरी- सुन्दर,लम्बी,उच्च शिक्षित,ग्रह कार्य दक्ष,सरकारी नौकरी वाली को वरीयता,सर्वगुण संपन्न  कन्या चाहिए | मांगते हैं घर जाओ तो कुछ इस प्रकार से कहते हैं की हमने अपनी बेटी की शादी तो ८ लाख मैं की थी |हाँ, एक बात और कहते हैं कुछ लोग कल ही आये थे, ७ लाख रुपैया और एक स्विफ्ट कार देने को कह  रहे थे | देखा आपने फिर जब घर मैं लड़ाइयाँ हुईं कोर्ट के चक्कर काटे तब बोले क्या बताऊँ  बहु बहुत गलत मिली |हम फंस गए | अरी अब क्यूँ रोते हो आपने जो मंगा वही तो मिला आपको गोरी-सुन्दर कारवाली , नौकरीवाली,ढेर सारा  दहेज़ लाये ऐसी  बहु  मिले तो मिल गई न....आपने ये तो नही कहा था की हमें  एक अच्छी संस्कारी कन्या चाहिए 'एक बहु चाहिय' |एक अच्छा इंसान चाहिए | ये तो नहीं लिखा था न उस सदी के विज्ञापन मैं तो अब जो है उसको स्वीकार करो | ...................वास्तव मैं समाज की दशा आज दुर्दशा की कगार पर है सब कुछ स्वार्थ की भेंट चढ़        चुका है |.. ..आने वाली जो पीड़ी होगी उनके सव…

जीतने की हवस

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जीतने की हवस
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जीतने की हवस इतनी न हो तुम्हारी 
की,तुम खुद से खुद को हार जाओ
खुद को खुद से जुदा पाओ


   जीतने की हवस इतनी न हो तुम्हारी 
    की,तुम खुद ही मैं मिटते चले जाओ 
    और,खुद को ही भूल जाओ 


जीतने की हवस इतनी न हो तुम्हारी 
की,तुम खुद की राहों मैं डगमगाओ 
खुद ही को ढूँढो और खुद ही को बुलाओ


    जीतने की हवस इतनी न हो तुम्हारी     खुद का खुद पर विश्वास भूल जाओ      सामाजिक अंधकार को अँधा आईना दिखाओ

जीतने की हवस इतनी न हो तुम्हारी  घर की चोखट का पता भूल जाओ  माँ का दुलार और पिता की डांट भूल जाओ 
      जीतने की हवस इतनी न हो तुम्हारी 
      दया,अहिंसा मानवधर्म भी भूल जाओ 
      दौलत कि हवस मैं खुद ही बलि चढ़ाओ

जीतने कि हवस इतनी न हो तुम्हारी 
परिवार भूल जाओ चमक मैं फिसल जाओ 
दुनिया मैं आने और जाने का सत्य भूल जाओ 
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जिंदगी का नाम जिंदगी है....
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जिंदगी का नाम जिंदगी है 
जिंदगी काँटों से सजी है
ज़िंदगी तो जिंदादिली है 

  कभी आँसू यहाँ कभी खुशियाँ यहाँ 
          खुद को खुद से मिलाती जिंदगी है 
          जिंदगी का नाम जिंदगी है 

कभी गोद मैं सोयी कहीं सड़कों पे बिछी
मिटके जीना सिखाती जिंदगी है 
जिंदगी का नाम जिंदगी है

         कभी शर्दी की धूप कभी बारिस की बूंद 
         रात को दिन मैं बदल देती जिंदगी है 
 जिंदगी का नाम जिंदगी है 

कहीं जलते है तन कहीं बुझते है मन
दिल को दिल से छीन लेती जिंदगी है जिंदगी का नाम जिंदगी है 

         कहीं आँखों मैं बसे कहीं नज़रों से गिरे 
         छीन के फिर से लुटाती जिंदगी है 
         जिंदगी का नाम जिंदगी है 
कहीं मंदिर की आरती  कहीं मस्जिद की नवाज 
तुझे तुझ मैं जगाती जिंदगी है 
जिंदगी का नाम जिंदगी है 

       कभी सोते से जगाये कभी जागते मैं सुलाए 
       सपनों मैं सपने दिखाती ज़िन्दगी है 
       जिंदगी का नाम ज़िंदगी है 

कहीं दूल्हा ये बनाये कहीं दुल्हन ये सजाये 
और फिर,अर्थी भ

स्वप्न

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||कुछ स्वप्न इतने ज़ालिम होते हैं कि स्वप्न को ही एक स्वप्न बना कर छोड़ देते हैं||
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रिश्ता  ...
    ( माँ और बेटी का ).........................

स्कूल मैं डांट पड़ी तो घर आकर  माँ से शिकायत करके रोती है               रास्ते मैं शोहदों ने जब घूरा               माँ के आँचल को पकड़ कर रोती है  डोली उठी बेटी की माँ से लिपट के रोती हैं दो साल बनीं नही जो माँ,             माँ से छिप-छिप कर रोती है             ससुराल मैं जली-कटी सुनी तो, माँ को याद करके रोती है रोज़ अस्पतालों के चक्कर लगाये              पति की बेरुखी देख कर रोती है             जब पता चला भ्रूण है बेटी का, बेटी की जान बचाने को रोती है  जन्मी जब बेटी उतर गया सभी का चेहरा        सभी को समझाकर मन ही मन रोती है        नवजात फूल सी बेटी को सीने से लगाकर रोती है प्यारी बच्ची जब नन्हें-नन्हें कदम चले  नाजुक मुस्कान देख माँ हँसते-हँसते रोती है                जब बेटी दूर शहर पढ़े,                बेटी की चिंता मैं रोती है जवान बेटी की माँ आज, 'वर' की चिंता मैं रोती है               ढूँढने जाती वर तो मांग होती है लाखों की                 विवाह है या बाजार की सूरत समाज का हाल देख कर रोती है  अपने हालात देख कर रोती है               बेटी का …