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Showing posts from September, 2012

उज्जवल प्रदेश बनाना है...

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उज्वल प्रदेश बनाना है .....






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माननीय मुख्य मंत्री जी को समस्त उत्तर प्रदेशवासियों  
की तरफ से विनयपूर्ण प्रणाम ।

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*****उज्वल प्रदेश *  ****
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कलयुग को सतयुग बनाना है 
हमें मानवता धर्म निभाना है 
भावी पीढ़ी को राम बनाना है ।।

मंथरा जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटाना है 
हमें लक्ष्य पर ही निशाना लगाना है 
हमें सच्चाई का मार्ग अपनाना है।। 

भ्रष्टाचार जैसे रावन को आज मिटाना हैं 
अपने राष्ट्र को सुद्रण बनाना है 
चारों तरफ ज्ञान का प्रकाश फैलाना है ।।

रोतों को आज हँसाना है 
सभी के प्रति आदर-भाव जगाना है
हर रात को दिवस बनाना है ।।

अपने प्रदेश को पूर्ण साक्षर बनाना है 
अपने उत्तर प्रदेश को उज्वल प्रदेश बनाना है 
जन-जन तक ये सन्देश पहुँचाना है ।।

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अपने प्रदेश से सभी को लगाव होता है।.
बस इसी लगाव को शब्दों मैं पिरोकर…

नशे मैं बर्बाद आशियाँ..

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दर्द ...दर्द देता है...
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किधर नज़र थी और किधर देखा 
दिन मै तो मेरे साथ थे रात किधर देखा 
क्या कमीं थीं मुझमे और क्या उसमें देखा 
मेरे ज़ख्म नहीं देखे,
किसी के सिर को सहलाते देखा ।।

किधर घर बसाया और मुड़ के किसे देखा 
किसी को इक नज़र भी नहीं 
किसी पर मर-मिटते देखा 
किसीको कठपुतली बनाया,
किसी की कठपुतली बनते देखा ।।

किससे फेरे पड़े थे और किसके चक्कर लगाते देखा 
किसी पर हाँथ उठाया
किसी की गाली खाते देखा 
किसे के लिये दो वक्त की रोटी नहीं, 
किसी पर सबकुछ लुटाते देखा ।।


किससे है बंधन और किसे बाँहों मै भरते देखा 
किसी की पायल को नहीं देखा 
किसी के घुंगूर मैं बजते देखा 
किसी को दिल से निकाला,
किसी को धड़कनों मैं बसते देखा ।।

किसी को कफ़न उड़ाया किसी का घूँघट उठाते देखा 
किसी को हमेंसा रुलाया 
किसी पर रोते हुए देखा 
कोई दुनिया से उठ गया,
किसी को लौटते देखा ।।

घर के गुलशन को देखा तो उजड़ा हुआ देखा 
हिम्मत न थी की चित्र पर माला डालें 
लगा आज खुद की जयमाला को जलते देखा 
बहुत रोया हारा-बेजान सा बैठा,
खुद को…

shikayat apne thakur se....

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* जय श्री कृष्ण *


                शिकायत अपने ठाकुर से ....
                        (आखरी इंतजार बचा ) 
............................................................................... हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया उपहार मै मिलता है धोखा उत्सव भी मना के देख लिया

हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

लुटा के सब कुछ देख लिया 
बर्बाद भी होकर देख लिया 
कोई बनता नहीं हमराज़ यहाँ 
हमने तो मिट के देख लिया 
तेरा दरश मिले अब तो कान्हा 
दुनिया को मनाना छोड़ दिया 

हे श्याम तुहारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

भीख मांग रहा बचपन देखो 
सड़कों पे भटकता घूम रहा 
हैं महलों के दरबाजे बंद 
सिंघासन तन्हा डोल रहा 
अब कुछ भी रहीं न चाह मेरी 
सबकुछ चाह के देख लिया 

हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया।।

जब तक रहता मतलब सबको 
रखतें है खबर एक पल-पल की 
जब मतलब निकल जाता है 
तब कौन था तू और कौन थी मैं 
धोके ही बस हासिल है यहाँ 
ख़ुद को भी सता के देख लिया 

हे श्याम तुम्हारी दुनिया मै आकर के हमने देख लिया 

हर रिश्ता स्वार्थ की भेंट चढ़ा 
दौलत पे घुटने टैक गया 
अब साथी…

JAI SHRI KRSHNA...

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जय श्री कृष्ण
                            ( भजन )
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 भगवान आपसे कुछ भी छिपा नही 
करते है लोग बुरा काम उनको कुछ भी पता नही है ।।

भगवान आपमें संसार बसा है 
इंसान का घमण्ड उससे भी बड़ा है ।।

भगवान आपमें प्रेम सधा है 
इंसान ने नफ़रत को साधा है ।।

भगवान आपसे कुछ भी छिपा नही है 
इंसान को अगले पल का पता नही है ।।

भगवान तत्व हर दिल मै बसा है 
इंसान की इक्षाओं का अंत नही है ।।

भगवान आपसे कुछ भी छिपा नही है
दर्द देनेवालों को खुद कल का पता नही है ।।

भगवान आपसे कुछ भी छिपा नही है 
प्रभु जी  मार्ग दिखाओ हमें तो कुछ भी पता नहीं है ।।

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                                               बाबरपुर जिला -औरैया 
                                                   उत्तर प्रदेश 

SAVE ALL BIRD

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ये पंख की पुकार है ..
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 इस तरह जीवों को मारा नहीं करते 
 उनमें भी जान होती है 
 वो भी करते होंगें प्यार किसी से 
 रही  होगी उनकी भी पहिचान किसी से,

      उड़ते रहतें हैं वो किसी  की एक झलक पाने को
      होगी उन्हें भी आरजू किसी  की
      वो भी करते हैं अपनी 'जान' की हिफ़ाजत 
      होता होगा उन्हें भी बेशर्त इश्क किसी  से ।।

ढेरों वादें  किये होंगें अपनी 'जान' से उसने
तुमने मार जो दिया की वो वापस नहीं लौटे 
उनके  शव भी न मिले  उनके परिवारों  को 
बेचारे बिना बात वो बेवफा भी कहलाये होंगें ।।


"क्या मिलता है उन्हें मार के तुमको 
किसी को जिन्दा करने की कोई तरकीब आती है?''

अरे ..उनका भी कोई अपना आँशु बहाता होगा 
दर्द वो अपना किसको सुनायेगें . ..
वो दर्द,तुम महसूस कर नहीं सकते
क्योंकि दिल बन चुका तेरा पत्थर 
और शर्म तुने गवाई है ।।

जा जाकर देख तू अपने दिल की चोखट पर 
हर दीवार पर तेरी करतूत छायी है
सदाएँ गूँजतीं है आँशु इंसाफ मां…

AKANKSHA KI AKANKSHA

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प्रार्थना 
(  आरजू )

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 हर  जगह रहनेवाले मालिक 
मेरी इक  आरजू पूरी  दे ....
अब तक माँगा नहीं कुछ भी तुमसे 
चाहे कितना भी कैसा समय था,
आज दिल कह रहा है प्रभु जी 
तू आज मेरी फ़रियाद सुन ले ।।


उन अनाथों को सनाथ कर दे 
बदले मै, मेरी हर तमन्ना तू छीन ले 
उनकी ज़िन्दगी रोशन तू कर दे
बदले मै  मेरी हर एक ख़ुशी ले ।।




उनके क़दमों मै  बिछ जाएँ दुनिया 
बदले मै मेरी हर श्वांस छीन ले 
उनकी हर राह फूलों से महके 
बदले मै मुझे जहाँ की सजा दे ।।

सलामत रहें सभी के घर और अपने 
बदले मै तू मेरी जिंदगी ले 
हर दिल मै बसनेवाले मालिक 
मेरी दुआ  की लाज रख ले 
मेरी यह आरजू पूरी कर दे ।।



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 "हमारी  बस यही आकांक्षा है की बाल मजदूरी ,बाल तस्करी ,बाल शोषण अब बंद  हो ।हर साल  
2000 बच्चे देश से गायब हो जाते है।
वो कहाँ चले जाते है  कोई  नहीं जानता,उन मासूमों के साथ क्या होता होगा ।उनके  दिन  बेबस और रातें विवश होती हैं । आइये समाज और  हम मिलकर कुछ सकारात्मक प्रयास करें इसलिये नहीं की हमें दुनिया जाने बल्कि इसलिये की हमें …

समाज और हम : ATUNK KE SAAY

समाज और हम : ATUNK KE SAAY:                       आतंक के साये                           (सोचो ) ..................................................................

TEACHER

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हमारे अध्यापक    ******************************************                                       * आप जैसे लोग ही बड़ी फुर्सत से बनाए जाते हैं  जिसको भी मिल जायें         वो किस्मतवाले कहलाते हैं ।।
जूठ -फरेबी से जिनका   नाता नही होता  गुरु आप सा जिसको मिल जाए         वो सफल मुकाम पा जातें हैं ।।
कथनी और करनी मैं जो भेद नही करते  आपका आशीर्वाद मिल जाए जिसको         वो,जीवन मैं  खुद के सहारे  होते है ।।
आप जैसा विनयी यूँ तो कठिनता से मिलता है  कभी मिल जाए तो सचमुच         कोई पुण्य पुराने होते हैं ।।
आपकी  तारीफ करना भी संभव नहीं हो  पाता ..... क्योंकि खुद बनानेवाला भी सोचता है ......          '''मैं भी आपका  शिष्य बन पाता '''"
******************************************         गुरुओं  के लिए  जितना भी लिखा जाए कम है क्योंकि "गुरु''  महान  है,आज हम सभी जो भी है सब अपने गुरुओं  के कारण  ही  तो है।     
           ******ॐ श्री गुरुवे नमः *******
                                                आकांक्षा सक्सेना                                  …

Shri Krshn Bhajan

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श्री कृष्ण भजन 

                 (तू जिस हाल मै  रखेगा .....)
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तू जिस हाल मै रखेगा उस हाल मैं  जी लेंगें 
आधी रोटी खा के कान्हा,तेरा भजन कर  लेंगें ।।

                 तू जिस हाल मैं  रखेगा उस हाल मै जी लेंगें         

तुझको  पसंद है जो ये आँशु तो जी भर के हम रो लेंगे  
तड़प -तड़प के कान्हा जी हम जिंदगी  जी लेंगें ।।

              तू जिस हाल मैं   रखेगा  उस हाल मै जी लेंगें 

तुझको पसंद है,जो मेरी हार तो हार के ही  जी लेंगें 
मिट -मिट के  ओ कान्हा जी ये  जिंदगी जी लेगें ।।

            तू जिस हाल मै रखेगा उस हाल मै  जी लेंगें 

तुझको पसंद है जो संकीर्तन  तो आठो पहर कर  लेंगें
तेरी ख़ुशी  की खातिर कान्हा  कुछ भी हम सह लेंगें ।।

           तू जिस हाल मैं  रखेगा उस हाल मै  जी लेंगें 

अंत समय ओ कान्हा जी बस एक जिद्द कर  लेंगें 
तुझे देखे बिना ओ कान्हा जी,हम श्वांस नहीं छोडेंगे ।।

तू जिस हाल मै  रखेगा उस हाल मै  जी लेंगें 

प्रभु हम आश नहीं छोड़ेंगे, विश्वास नहीं  छोडेंगे 
तेरे चरण छुए बिना संसार नहीं छोड़ेंग…

ATUNK KE SAAY

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आतंक के साये

                          (सोचो )

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चोटें लगतीं हैं पिघलती जाती है यादें 
कोई जात पे वार करता है 
कोई देशों पर वार करता है 
पत्थर तो दिन- रात बरसते है
          सोचो ये पत्थर बनते कहाँ।।

कहीं जलते है मकां,कहीं बुझते  है चिराग 
कहीं सुलगते हैं अरमां,कहीं लाशों के  धुऐं 
कोई कहता है कहीं, सच दिखता  नहीं 
सिन्दूर उड़ रहा है आज गलियों मैं 
           सोचो ये मुद्दे जाते कहाँ ।।

सूजी रहतीं है आंखें तस्वीरों के सामने 
ख़ामोशी जो देखें घर बन गए शमशान 
कोई दोष देता है खुद को, कोई सरकारों को 
कफ़न की दुकानें दिन -रात जागतीं हैं 
          सोचो वो काफिले जाते कहाँ ।।

जिस्मानी ज़ख्म सह लेते है हम 
रूह की खरोंचें सही जाती नहीं 
कोई छुपाता  है कसक,कोई लुटता है हर दिवस
बच्चों का व्यापर पार तक है जाता 
         '' सोचो '' हम सभलें  भी तो जायें कहाँ ।।
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                                                    आकांक्षा सक…

BURE WQT NE MALIK KE KARIB PAHUNCHA DIYA.

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इबादत 
.................................................................................मत सोचो ज़िन्दगी मै कितना बुरा हो चुका  बुरा वक्त था दोस्तों 'देखो 'गुजर गया।। बुरे समय से पहले कैसे सुन्दर लगते थे तुम ? वो समय बीत गया और तुम्हें हसीन बना गया।। मत सोचो चोटें और कितने घाव है झेले  तुम्हारा घाव भी तुम्हे जाते -जाते सलाम कर गया ।।
पत्थरों ने बरस के तुझको ध्यान से देखा  तेरा धैर्य पत्थरों को भी  सुन्दर मूरत बना गया ।।
देकर  हजारों  गम खुदा ने आखिरकार.. ये पुछा ऐ मेरे बन्दे तू ये सब कैसे सह गया ?

ऐ मेरे रब मैंने कुछ भी नहीं किया 
कुछ भी नहीं किया .......
तुझपर था यकीन बस  चलता  चला गया 
सच मैंने कुछ भी नहीं  किया ....
कुछ भी नहीं किया ......

"तू चाहता है  क्या बोल मेरे बन्दे 

मांग ले ये "कायनात"सब तेरे हे लिए है''

इतने गम दे मुझे की*****
..**** फिर कोई मुझे गमगीन देखी न पड़े ***

"ये क्या मांग लिया तुने ऐ मेरे नेक बन्दे"

इसी ''गम'' ने आज,तुझे मेरे  सामने ला खड़ा किया 

"अरे ,मांग मेरे बन्दे मौका है तेरे पास''

 .....या मेरे मालिक *****
.. अ…

DAHAEJ

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                               दहेज़ 

                         (उनके  हस्ताक्षर )
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मन मै असमंजस की टकरन से 
शीशा चकनाचूर हुआ 
दुकुड़ों मैं  ख्याल बचा,
हांथों की रेखाएँ मिटी 
       उनका बस एहसास बचा ।।

दिन प्यास बन के बीता 
रात का आखरी घूंट बचा 
पतली -संकरी गलियों मैं,
      बस,आखरी इंतजार बचा ।।

जुल्फों के छोर से टपक रहा 
अब एक-एक आँसूं मोती सा 
दिल की माटी से फूट से पड़ा 
      बदले की भावना का अंकुर ।। 

चढ़ावे की  करधनी के निशान 
पड़े सभी है अंगों पर,
इन्हीं निशानों मैं जाकर 
        ढूढें है उनके हस्ताक्षर ।।

मन और कदम बढ़े जहाँ 
नहीं तमन्ना कुछ भी हो,
जब सामना हुआ मौत से 
      आँखों मैं खून उतर आया ।।

चाकू बढ़ा जो सीने पर 
मुस्कराहट ने चाकू गिरा दिया, 
हांथों को उनके हाँथ मैं पाकर 
      फिर से ये  दिल हार गया ।।
........................................................................................ये 17 जुलाई 2007 मई लिखी थी ।

  ।। दोस्तों इस रचना के…

ESTHATI

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                                                                  ....शोहदे ......
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अंगुलियों के पोरों पर गड़ना की सितारों की 
इस अँधेरी दुनिया मै आशा  की उजालों की
घर मै  रखा है फूटा बरतन,
                                      बातें की हजारों की।।

कंकरीट पर रात बिता के  सपने देखें महलों के 
इस भिखारी दुनिया से आशा  की मिल जाने की 
सिर पर रखा है बोझ बहिन का,
                                            बातें की मसालों  की।।

एक पुरानी बात छिपा कर कोशिश की सो जाने की 
एस भूखी दुनिया से आसा की भुनाने की 
यादों से भरा है दिल का कोना,
                                          बातें की ब्याह रचाने की।।

हथेली पर पापों का लेखा बातें करते पुण्य  की 
एस मुर्छित दुनिया से आशा  की स्वः जगाने की
मेहंदी से रचे हांथों को पकड़कर,
                                           बातें …

PYARI MAA

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प्यारी माँ 
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 आदत है हमारी  ख़राब 
आपको निहारते रहने की 
                        रहतीं है आप भी बेक़रार 
                        हमारी कमियों को मिटने की,
 सुबह होती है हमारी 
 मुखड़ा देख के आपका 
                       साँझ ढलती हमारी 
                        अच्छाई आपकी सोच -सोच कर 
आदत है हमारी ख़राब 
आपको चुपके -चुपके देखने की 
                        रहतीं आप भी बेक़रार 
                        तुरन्त अभिव्यक्ति देने की,
मोसम की  ठंडक है स्वभाव आपका 
 समय बीतता  है प्यारा जो हो आशीर्वाद आपका 
                        आदत है हमारी ख़राब 
                        आपको यूहीं हँसाने की 
रहतीं है आप भी बेक़रार 
हमारी एक झलक पाने की 
                        शुरुआत की शुरुआत होती है 
                        आपकी शुरुआत देख कर 
ह्रदय प्रेम से भर जाता है 
आपका कान्तियुक्त व्यक्तित्व देख कर 
.....................................................................................                                     …

MEHANGAI...SE JUJHATA BACHAPAN...

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रुपैया के दो कम्पट  ................................................................................. माँ ने पुकारा ओ श्यामसुंदर   चुपचाप से ले आओ दालमोठ और बिस्कुट  मेहमानों को बिल्कुल भी ख़बर तक न होगी  जल्दी से मुझे दे दो बस एक अठन्नी 
                आज श्यामसुंदर उदास सा है बैठा                  ढ़ेरों सवाल वो खुद से खुद से ही  कर रहा है                  दुकान भी वही है कम्पट भी वही है                  बदला आखिर क्या क्यों चल न रही अठन्नी 
आज श्यामसुंदर स्कूल से है लौटा  देखा जो मेहमानों को हुआ बेहद गदगद  माँ ने कहा श्यामसुंदर ले आओ सिर्फ बिस्कुट  अब अठन्नी नही है चलती देना पड़ेगा रुपैया 
                माँ ने गौर से देखा पल्लू की गांठ खोली                  पाकर छोटी से हथेली पर बड़ा सा रुपैया                   दौड़ गया श्यामसुंदर लेने को अपना कम्पट                   रुपैया के दो कम्पट लेकर लौटा है श्यामसुंदर ...................................................................................................................यह कविता 2004 मै  लिखी थी।                                                  …